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लगभग 400 वर्ष पुराना नवग्रह मंदिर की कहानी …

लगभग 400 वर्ष पुराना नवग्रह मंदिर की कहानी …

राजबाड़ा के पास सबसे पुराने इलाके नंदलालपूरा में सब्जीमंडी से एक संकरी सड़क जूनी इंदौर की और जाती है और यहीं लगभग ४०० वर्ष पुराने घर नमबर ५९ में  में स्र्थित है एक प्राचीन नवग्रह मंदिर …नौ ग्रहों को उनके ज्योतिष विधानपूर्वक प्रतिमा स्वरुप में प्रतिष्टित किया गया है , बहुत कम लोग इस मुख्य मार्ग स्थित मंदिर के बारे जानते हैं …

कैसे बसा यह मंदिर और घर …

इंदौर के बसने के पूर्व की बात है जब सातारा में रहने वाले महाराष्ट्रियन ब्राह्मण पाठक परिवार को इंदौर जो की ठीक से बसा नहीं था की बसाहट के लिए निमंत्रण संदेशा आया और यह परिवार इंदौर आ गया अपने शिवलिंग अर्चन पद्धति के साथ , चूंकि ये परिवार लिंग-पूजन करता था सो इन्हें यहाँ पर लिंगार्चनी के नाम से जाना गया |

विशेष :राजबाड़ स्थित प्रसिद्द सत्यानारायनण मंदिर की ३ मूर्तियाँ भी यही परिवार इंदौर लाया था |

इस परिवार की मुखिया श्रीमती वसुंधरा  बताती हैं की हमारा यह मंदिर निजी मंदिर है और यहाँ पर धार्मिक परम्पराओं का पुर्ण पालन किया जाता है , अत: किसी भी प्रकार के शोर-शराबे, दिखावे या विज्ञापन वर्जित हैं | भंडारा और रतजगा जैसे दिखावे और भीडभाड से परे यह मंदिर घर के अन्दर स्थित शांति और सौम्यता से भरपूर है |

पूरा परिवार इसकी स्वच्छता और शुचिता के प्रति समर्पित है अभी इनकी वर्तमान पीढ़ी में  उनके पुत्र चिंतामणि और हेमंत जी इसका सञ्चालन  कर रहे हैं |

चंद्रभागा में बह गया था मंदिर

यह मंदिर लगभग ४०० वर्ष पुराना है पर अभी के स्वरुप में ३० के दशक में श्री गोपाल शंकर  जी लिंगार्चनी द्वारा पुन: स्थापित किया गया यह पहले नदी किनारे हुआ करता  था और इसके चंद्रभागा लबालब बहती थी , और एक बार चंद्रभागा नदी की बाढ़ में सन ३० में यह पूरा बह गया था | तब पहले यह प्रतिमाएं और घर मिटटी का हुआ करता था ,  फिर होलकर काल में इनकी पाषाण प्रतिमाएं स्थापित हुयीं | आज इस स्वारूप में यह सन ३० से वैसा ही है …इस घर के बाहर लगा बोर्ड जो हिंदी भाषा में लिखा है वो भी ३० के दशक का बना है |

विशेष :

कपडे पर पेंट की गई प्राचीन श्री कृष्णा , सत्यभामा और रुकमनी की अद्भुत पेंटिंग भी यहाँ देखने को मिलेगी जो कहीं नहीं पाई जाती |

 

नौ ग्रहों के ९ पाषानाकर प्रतिमाओं को यहाँ स्थापित किया गया है वो भी क्रमानुसार …ज्योतिर्विद्या में निपुण यहाँ के पुजारी ने इनकी स्थापना कुंडली के अनुसार की है | यहाँ पर ज्योतिष समाधान और जाप किये जाते हैं |

अद्भुत कथाएं और मान्यताएं

यहाँ पर किये अर्पित किये जाने वाले ११ नारियल के तोरण की कहानियां बहुत प्रसिद्द हैं , जिस भी नेता ने यहाँ शीश झुकाया है वह अजेय और विजयी हुया है , ताई सुमित्रा महाजन ने अपना पहला चुनाव यहीं से आशीर्वाद और तोरण चढ़ाकर किया था |

लिंगार्चनी परिवार का यह घर और मंदिर धरोहर है इंदौर की …

Sameerr Sharma
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