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जिम्मी मगिलिगन सेंटर पर होली के लिए प्राकृतिक रंग बनाना सीखिये

जिम्मी मगिलिगन सेंटर पर होली के लिए प्राकृतिक रंग बनाना सीखिये
जिम्मी मगिलिगन सेंटर Sameer Sharma

जिम्मी मगिलिगन सेंटर पर होली के लिए प्राकृतिक रंग बनाने का प्रशिक्षण 14 जनवरी से 20 जनवरी तक रोजाना

 

पिछले सात साल की तरह इस बार फिर पर्यावरण प्रेमिका जनक पलटा मगिलिगन गाँव सनावदिया स्थित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर होली महोत्सव मनाने के लिए प्राकृतिक रंग बनाने वाले प्रशिक्षकों व् इन रंगों को बनाकर उद्यमी बनना चाहते है , उनके लिए सप्ताह भर (मार्च 14 -20, 2019 हर दिन 10-1 बजे के दौरान) का प्रशिक्ष्ण देंगी जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को बचाना है !

जिम्मी मगिलिगन सेंटर फार सस्टेनेबल डेवेलपमेंट पर रंगौत्सव होली की तय्यारी में सभी उम्र के छोटे – बड़े लोगचुकन्दर,पारिजात, पोई , टेसू, अम्बाड़ी, गुलाब की पत्तियों , संतरे के छिलकों से प्राकृतिक रंग बनाने के लिए बड़े उत्साह से प्रशिक्षण लेने आ रहे है

 

पहले दिन मार्च 14 को, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के 25 गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि टेसू/ पलाश जैसे फूलों ,सब्जियां, और फल नारंगी के छिलके, चुकंदर के पारंपरिक प्राकृतिक रंगों के सिद्धांत और व्यावहारिक सीखेंगे। कार्यक्रम का शुभारम्भ की मुख्या अतिथि श्रीमती आर्यमा सान्याल निदेशक अहिल्या बाई एयरपोर्ट इंदौर ने किया |

इस सप्ताह के दौरान, गांवों और शहर के स्कूलों, कॉलेजों और स्वयंसेवकों के समूह सीखेंगे। प्रशिक्ष्ण सभी के लिए खुला है कोई शुल्क या पंजीकरण नहीं है, जनक पलटा से पूर्व की पुष्टि janakjimmy@gmail.com प्राप्त कर आ सकते है

 

सेंटर की निर्देशिका डॉ श्रीमति जनक पलटा मगिलिगन ने स्वागत व परचिय में कहा कि वे प्राकृतिक रंगों के निर्माण  का प्रशिक्षण दे स्वच्छ स्वस्थ व सुंदर होली खेलने के लिए स्मार्ट सिटी के लोगों को सशक्त कर रही हैं। उनके अनुसार होली को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से रंगोस्त्व बनाकर प्यार के साथ मनाए जाने वाले रंगों का एक त्यौहार है।

सस्टेनेबल गोल्स में से एक गोल “ जिम्मेदार निर्माता और उपभोक्ताओं को बनाना है” ताकि पर्यावरण और लोगो को बचाना है सभी प्रनिओं में सद्भावना बढानी है इसीलिए वह प्राकृतिक उत्पादों से होली के गीले सूखे व मलने वाले रंग बनाना सिखाती है । लोगों ने पोई , पारिजात , टेसू /पलाश, अंबाडी, गुलाब की पंखुड़ी और नारंगी के छिलकेके पेस्ट, सोलर ड्रायर और सोलर कुकर पर गीले रंग बनाने सिखाये इन सभी रंगों में लागत कुछ भी नहीं है, आसानी से उतारा जाता है और बिल्कुल सुरक्षित भी है। प्रकॄति ने भारत को जी भर के आशीष दिया सबसे ज्यादा ऋतुये है.,कितने सारे रंग व मौसम..उनमें बसे त्योहार.. फागुन में पळाश.पोई शबाब पर है,   किस तरह फूलों को नाज़ुक सलीके से पत्तियां को तोङना, निकलने से लेकर रंग बनाना पानी में किस तरह उबालना ,पारिजात के फूलों व अम्बाडी को सुखाकर उनका केसरइया रंग पोई के चटक बैंगनी रंग ,टेसू के एक रंगीन माहौल बना रहा है |

 

पारिजात के हलके केसरी रंग, गुलाब की पत्तियों का सूखा गुलाबी रंग अम्बाड़ी का सुर्ख लाल पर्यावरण के साथ संस्कृति को भी बचाने के लिए श्रीमती  नंदा चौहान व राजेन्द्र चौहान सुरक्षित और स्वस्थ होली मनाना सिखाने का प्रयास कर रहें है| अच्छी बात यह है कि लोग व्यक्तिगत उपयोग के साथ ही आजीविका के लिए भी इसे सीख सकते हैं .. उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के अनुकूल सुरक्षित और स्वस्थ होली खेलना सीखना है।निशुल्क प्रशिक्षण सभी लोगों के लिए खुले हैं। 

 

सादर जनक पलटा मगिलिगन
janakjimmy@gmail.com 09893719609 /

Sameerr Sharma
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