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इंदौर में बी एम डब्ल्यू कार हादसा , किशोर बालक से हुआ एक जानलेवा अपराध !

इंदौर में बी एम डब्ल्यू कार हादसा , किशोर बालक से हुआ एक जानलेवा अपराध !

आज शहर में एक और मौत हुयी , एक अत्यंत धनवान परिवार के किशोर युवा (जिसका नाम अभी तक किसी भी अख़बार ने नहीं छापा है ) की लापरवाही एक युवा व्यापारी , एकलौते बेटे , और मात्र कुछ वर्ष की बच्ची के पिता की जान ले गई और शहर चुप है !

उस नाबालिग किशोर ने कभी नही सोचा होगा कि अपनी लापरवाही से वह एक व्यक्ति की मौत का कारण बनेगा और उसके जीवन के सामने एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लग जायेगा….

ये लेख उन लोगों के लिए लिख रहा हूँ, जिनके घर मे गाड़ी है और किशोर युवा बच्चे भी…किशोर यानी 12 से 18 वर्ष तक के…आपको बदलना होगा, चौकन्ना और अनुशासन की रेखा खींचनी होगी अपने नौनिहालों के लिए…नही तो उनका भविष्य समाप्त हो सकता है सिर्फ आपकी लापरवाही से…

आज शहर में एक बड़ा हादसा हुआ है और उसमे एक मौत भी , एक अत्यंत धनवान परिवार के किशोर युवा (जिसका नाम अभी तक किसी भी अख़बार ने नहीं छापा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की किशोर अपराध अधिनियम रूलिंग में यह निषिद्ध है) की लापरवाही एक युवा व्यापारी , एकलौते बेटे , और मात्र दो वर्ष की बच्ची के पिता की जान ले गई |

अब इस खबर की चर्चा पूरे शहर में है, नईदुनिया एयर दैनिकभास्कर ने इसे प्रमुखता से छापा है, पर सबसे बड़ी बात और दुःख की बात यह कि इंदौर शहर इतना खोखला हो गया है कि डिजिटल मीडिया, समाजसेवी, एक्टिविस्ट , पोलिस और प्रशासन सभी कोई इस हादसे को महत्व नही दे रहे हैं।

खैर पहले यह फैक्ट्स पढ़ लें फिर आसानी होगी :

किशोर की अधूरी जानकारी जो इन्टरनेट से प्राप्त हुयी :

# किशोर दून स्कूल का छात्र है| – पिता अत्यंत प्रभावी और मीडिया में सक्रिय हैं |
# ऐसा अखबातों में छापा है कि बी एम डब्ल्यू कार एक किशोर, जो कि १६ वर्ष का है वह चला रहा था – कानूनन जुर्म है !
# बी एम डब्ल्यू कार का नंबर तक नहीं डाला हुआ था – कानूनन जुर्म है !
# टक्कर के बाद डिवाइडर कूदा कर गाड़ी भगाने लगा था नाबालिग – कानूनन जुर्म है !
# 33 वर्षीय आनंद पिता प्रकाश डोसी (जैन) निवासी वैभव नगर की मौत हो गई – गैर इरादतन हत्या का सीधा मामला !
#किशोर की मार्कशीट और आयु सम्बन्धी पेपर्स पोलीस अभी तक जुटा नहीं पाई – इंदौर पोलिस की लचर कार्यवाही और अन्याय !

आनंद ,जिनकी हत्या हुई उनके तथ्य : –

# मृतक आनंद की २ वर्ष की बेटी है|

# २८ वर्षीय पत्नी है जिनसे ४ वर्ष पूर्व विवाह हुआ

# वे अपने माता पिता के एकलौते बेटे थे

# वे एकमात्र आय अर्जित करने वाले थे |

# उनकी उम्र ३८ वर्ष थी |

अब बात इंदौर शहर , पोलिस , मीडिया और किशोर के अभिभावकों की ..

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अभिभावक :

यह पूर्णत: अभिभावकों की असंवेदनशील लालन-पालन का मामला है , किशोर युवा अपने जीवन में प्राप्त आसान लाइफ स्टाइल , लग्ज़री सुख साधन को न सिर्फ एन्जॉय कर रहा था बल्कि अभीभावको के द्वारा उसे यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा , जीवन -मृत्यु, नैतिक जिम्मेवारी से पूरी तरह से अनजान और लापरवाह , इसकी पूरी जिम्मेवारी इसके अभिभावकों की है जो इसे एक जिम्मेदार युवा नहीं बना पाए , और नतीज़ा उसके टेस्टेस्टेरोंस ने कमाल दिखाया और मानवीय गुणों और घर के अनुशासन की ढीली रस्सी को तोड़कर उसका अश्वरुपी मन आज़ादी की बी एम् डब्ल्यू लेकर निकल पडा …. और एक युवा व्यापारी की मृत्यु के बाद ही यह तांडव थमा …

एक और मौत हुई …उसी युवा की , उसकी युवावस्था पे जो दाग लगा है वह कितने भी प्रभावी मां बाप हों , धनी हों , मीडिया और समाज से छुपा लें नहीं धुलेगा |

उसके मन-मानस और आत्मा पर एक खून अंकित हो गया है ! उसके अपराध को भुलाया नहीं जा सकता पर उससे भी बड़े अपराधी उसी के माता पिता है|

पूरी दुनिया को मैनेज करने वाले पिता १६ वर्षीय किशोर को नहीं समझ पाए न ही शिक्षित कर पाए | इसे सिर्फ एक दुर्घटना कहना भी अपराध है ….

इस युवा का पूरा जीवन सामने है, इसे बेहद मानवीय और परिपक्व ढंग से संभालने की ज़रूरत है। काश परिवार इसे समझकर इस किशोर का जीवन बचाएं।

मीडिया :

शहर के कुछ अख़बारों ने इसे छापा , पर बिना नाम के , मृतक का नाम तो था पर अपराधी किशोर और परिवार का नहीं ….सभी दुहाई दे रहे थे किशोर अपराध अधिनियम की ….

शहर के ईल्क्ट्रोनिक मीडिया वाले और कमाल के निकले , व्हाट्स एप्प पर एक ही खबर को तीन बार अलग अलग शीर्षक से छापकर कई मर्तबा पोस्ट करने वाले लोकल न्यूज़ पोर्टल आज खामोश थे …उन्हें अपने मीडिया समाज के मित्र को बचाना था….खोखले , घटिया पत्रकार इसे लीपने पोतने में लग गए , न इन्हें ईश्वर का डर है , न इनकी खुद की आत्मा कचोटती है न ही ईमान ….

अगर यही किसी कैमरामैन या छुटभैयी पत्रकार को किसी ने घूर के देख लिया होता तो ये DIG , कलेक्टर तक का घेराव कर लेते ….अच्छा है इस बिरादरी की सच्चाई जनता तक पहुंचेगी |

उम्मीद है कुछ बड़े पत्रकार (यानि सच्चे क्राईम रिपोर्टर्स , नई पीढ़ी के जो शहर को हिलाए हुए हैं अपनी कलम से ) ज़रूर इसे उठाएंगे ….ऐसी आशा है |

पोलिस :

अद्भुत है पोलिस तो इंदौर की , किशोर की मार्कशीट और पेपर्स ही नहीं ले पाई , शाम तक जमानत पर छोड़ भी दिया ! बच्चे के बदले हुए बयान की मैं नहीं ड्राइवर चला रहा था आने लगे हैं …पोलिस और वकील की सलाह पर !

वकील :

दाई से पेट नहीं छुपता और वकील से अपराध…. देखते हैं इंदौर के वकील क्या अब भी किशोर को मुक्त कराने में अपनी स्किल्स और सेटिंग्स का उपयोग करेंगे या एकजुट होकर अभिभाषक संघ इंदौर में न्याय की मिसाल रखेगा जैसे निर्भया के केस में की थी और बताएगा की समाज को ऐसे ही सही करने की ज़रुरत है |

शहर :

शहर शांत है …देखकर यदि चुप रहा तो अगली बार किसी बढ़िया ब्रांड की कार के नीचे आप ही होंगे….वैसे अब इंदौर खोखला हो चला है ….बिना मतलब के यहाँ पत्ता तक नहीं हिलता….

फिर क्या हो ?

यह सच है कि हर अभिभावक की तरह किशोर के अभिभावक तनाव में और अत्यंत दुखी होंगे , हर संभव कोशिश करेंगे इसे जैसे -तैसे निपटा लें, किशोर विदेश जाने वाला था कुछ ही दिनों में

अब…यदि वे आगे आयें एक नई परिपाटी बनाये जिसमे वे स्वीकारें अपनी गलती को , पूरी तरह से जिम्मेदारी लें और मृतक के परिवार के साथ मिलकर , पोलिस -प्राशासन और काऊन्सलर्स के साथ मिलकर इसका निपटान करें तो स्वर्गीय श्री आनंद जैन और उनके परिवार को न्याय मिलेगा , पत्नी और बेटी को न्याय मिलेगा , शहर को सीख और एक सबक मिलेगा …

नहीं तो किशोर पूरी ज़िन्दगी इस अपराध बोध में रहेगा और हाँ याद रखना अगला नंबर आपका !

Photo Credits : Patrika, Dainik Bhaskar , Internet

Sameer sharma

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1 Comment

  • कीर्ति राणा
    March 28, 2019, 12:58 pm

    ओह…….इंदौर !
    bmw जैसी गाड़ी आप हम के पास तो हो नहीं सकती। जिनके भी पास औसे महंगे वाहन होते हैं उनके लिए कानून रेड कारपेट की तरह बिछ बिछ जाता है। याद करिए ना फिुटपाथ पर सोए वो लोग और अभिनेता की वो कार, क्या हुआ !

    REPLY

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