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इंदौर की हिंदी मैगजीन “वीणा” देश की सबसे लम्बे समय से लगाताप्रकाशित होने वाली पत्रिका बनी

इंदौर की हिंदी मैगजीन “वीणा” देश की सबसे लम्बे समय से लगाताप्रकाशित होने वाली पत्रिका बनी

वीणा के संपादक ने बताया कि वीणा का पहला अंक सन १९२७में प्रकाशित हुआ था. ये देश की एकमात्र पत्रिका है जो तब से अब तक निरंतर प्रकाशित हो रही है. उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर आने के बाद वीणा के सुर पूरे विश्व में गूंजेंगे तथा विश्व भर में फैले रचनाकार इस पत्रिका से जुड सकेंगे.

इंदौर की पत्रिका  “वीणा” – देश की सबसे  लम्बे समय से प्रकाशित हो रही पत्रिका 

इंदौर ने देश के इतिहास , वर्तमान और भविष्य के लिए सदैव ऐसे योगदान दिए हैं जो अकल्पपनीय होने के साथ साथ अपने आप में एक कीर्तिमान भी हैं |

आप को जानकर गर्व होगा कि वर्तमान में हमारे इंदौर से एक ऐसी मासिक पत्रिका निकलती है जिसके नाम ९२ वर्षों से लगातार प्रकाशित होने का रिकॉर्ड है| अच्छा एक और बात , यह रिकॉर्ड सिर्फ हिंदी भाषी पत्रिका की वजह से नहीं , अपितु देश में किसी भी भाषा में आज तक ९२ वर्षों से लगातार प्रकाशन होते रहने का कीर्तिमान हमारी मध्यभारत हिन्द साहित्य समिति (आर एन टी मार्ग ) की पत्रिका “वीणा” के नाम है |

वीणा के आज तक 1104 से अधिक अंक निकल चुके है , चाहे गुलामी का दौर हो , आज़ादी की फिजा हो , या इमरजेंसी हो वीणा सदैव झंकृत होती ही रही है और आज भी २००० प्रतियों के साथ मासिक सूप से अपने उच्च हिंदी सहित्र, भारतीय संस्कृति और सभ्यता का परचम अकेले लहरा रही है |

कैसे बनी वीणा और मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति :

इंदौर के महाराजा होलकर, सर सेठ हुकुमचंद और उस समय के विद्वान् डॉ सरजू प्रसाद तिवारी ने मिलकर हिंदी के विकास के लिए इस संस्था की कल्पना की , होलकर महाराज ने ज़मीन दी यह आर एन टी मार्ग पर स्थित, बड़ी सी से जमीन है, जहाँ कार्यालय और मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति का ऑडिटोरियम भी है , सर सेठ हुकुमचंद ने इसके लिए छापाखाना यानि प्रिंटिंग प्रेस का इंतज़ाम किया और इस सपने को पूरा करने का बीड़ा यानि मैनेजमेंट किया डॉ सरजूप्रसाद तिवारी ने जो की पेशे से MBBS डॉक्टर थे तो ऐसे शुरू हुई मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति , और इसने प्रयासों से सन १९२७ में पं. अम्बिकाप्रसाद त्रिपाठी जो की इसके प्रथम सम्पादक थे ने पहला अंक प्रकाशित किया जो आज तक वीणा’ के वर्तमान सम्पादक श्री राकेश शर्मा जी के साथ अनवरत जारी है |

श्री राकेश शर्मा बताते हैं कि इस पत्रिका में बापू यानि महत्मा गाँधी , टैगोर, निराला, सुमित्रा नंदन पन्त, बच्चन,  महादेवी वर्मा से लेकर अटल बिहारी बाजपाई सरीखे लोगों ने भी अपने लेख लिखे हैं |

हाल ही में ९० वर्ष होने पर इसका विशेषांक “रचनात्मकता के नौ दशक” के नाम से प्रकाशित हुआ है|

 

यह पत्रिका श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति की नहीं नहीं अपितु इंदौर और भारत देश की धरोहर है और इंदौरवालों को चाहिए की इसे पढ़ें , नई पीढ़ी को इसके बारे में बताएं , स्कूलों में इसका सब्सक्रिप्शन करवाए ताकि लगभग एक सदी से चहली आ रही हिंदी की इस बेल को पुष्पित और पल्लवित रखा जा सके |

यह ऑनलाइन भी उपलब्द्ध है इंटरनेट पर वीणा : www.veenapatrika.com

Sameerr Sharma
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