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हिंदी साहित्य

भिया राम का वर्ल्ड रिकॉर्ड : राजीव नेमा इन्दोरी ने किया ५६ दुकान पे धमाल

पूरी ५६ दूकान आज भिया राम , तिरिभिन्नाट , बोलबाले , आ रिया है , जा रिया है, १२ बजवा रिया है , इसकी १२ की ढेर जैसे जुमलो से रोशन रही   …मौक़ा था राजीव नेमा के फैन मीट  का ….. आज ५६ दूकान पर राजीव नेमा इन्दोरी ने अपने …

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मुंशी प्रेमचंद की यादगार कहानी: “ईदगाह” ईद-स्पेशल , याद है न हामिद का चिमटा और अमीना दादी

. ईदगाह  ये कहानी उतनी ही मीठी है जितनी कि ईद की सिवैयां … आज यह पढ़ने के बाद आप अपने बचपन में ज़रूर जायेंगे , इतनी भोली कहानी और कितना मार्मिक सन्देश….हर बच्चे को पढ़ना चाहिए और बड़े को भी …   मुंशी प्रेमचंद की क्लासिक कहानीयों में से …

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इंदौर का ईराक , उसके सद्दाम और धाँसू बमबारी ..जी हाँ इंदौर राईटर्स क्लब

समीर शर्मा | इंदौर | इंडियन कॉफ़ी हाउस इंदौर में इराक?  …कॉफ़ी हाउस में हर ईतवार जमता हिंदी साहित्य और अनुभव का मजमा … जी हाँ और इस  इराक में बांटती है खुशियाँ , लगते हैं कहकहे , कही और सुनी जाती  है कविता , कहा जाता है व्यंग , किस्सागोई …

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नहीं रहा “वर्दी वाला गुंडा” : विश्व के सबसे प्रसिद्द उपन्यास के लेखक वेदप्रकाश शर्मा नहीं रहे …

लेख संकलन : समीर शर्मा | इंदौर वेदप्रकाश शर्मा : स्मृति शेष   इस बात पर बहस हो सकती है कि लेखक जन्मजात होते हैं या नहीं पर इतना तय है कि कुछ लोग लिखने के लिए ही पैदा होते हैं और पाठकों का मिजाज जानने की वजह से वे …

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इन्दोरी भिया की मेराथान कथा – इन्दोरी बोल में भिया की बात – संजय पटेल की कलम से

  इन्दोरी भिया की मेराथान   भिया यूं तो सूरजवंशी हैं यानी सूरजदेव के अगाध श्रध्दा रखते हैं और उनके प्रकट हो जाने के बाद ही बिस्तर छोड़ते हैं लेकिन इंदौर मेराथान की हवा चलते ही भिया ने घनघोर निच्चय कर लिया कि हम भी दौड़ेंगे। मंडली को ताकीद किया …

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एक इन्दोरी के नए साल के संकल्प – अभय बर्वे

  भिया हर साल जैसे इस बार भी नया वर्ष आ रिया है, इसलिए मजबूरन मेरेको भी नए वर्ष के संकल्प करना पड़ रिये है, इसमें कुछ संकल्प पिछले साल से लगत में चलते रेंगे ( गतांक से अग्गे टाइप )   १) पिछले साल का रेझल ( रेझर का …

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क्या है ! आपके पास आपका “पैराशूट”? याद किया है आपने उसे कभी ?

आपका “पैराशूट” : (Whats App Message Story ) एयर कमोडोर विशाल एक जेट पायलट थे ।   एक लड़ाई में उसके फाइटर प्लेन ने दुश्मन की सेना में बड़ा धमाल मचाई और शत्रु सेना का बहुत नुक्सान  कर दिया , उनके प्लेन के आते ही खलबली मच जाती थी | उसी लड़ाई …

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एबले की डायरी – केसलेस इन्दोरी की परेसानियाँ

  गुल्लू उर्फ़ भुवन मेहता ने आज सुबह सुबह यह व्हाट्स एप पर भेजा और इसे आपके साथ शेयर करना बनता है | किसी इन्दोरी “भेजे” ने पूरे मन से अपनी मालवी और इन्दोरी रचनात्मकता इस लेख में डाली है , इनका नाम तो पता नहीं पर जब भी मिलेंगे …

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इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल – १६ से १८ दिसंबर , साहित्य का कुम्भ

समीर शर्मा | ओह इंदौर.कॉम | १५-१२-२०१६ | इंदौर तीन दिनी इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल आह्वान 16 दिसंबर से शुरू होगा।    16 दिसंबर को सुबह 10 बजे होटल फॉर्च्यून लैंडमार्क में इसका उद्घाटन नृत्यांगना रागिनी मख्खर और साथियों  के इन्क्रेडिबल इंडिया डांस से होगा। 18 दिसंबर तक चलने वाले इस …

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हाथ से बुना स्वेटर , एक याद , एक अहसास – एक प्यार से भरी हुई गर्माहट – लिटिल रेड बॉक्स से

  प्यारे हाथ से बने स्वेटर, तुम्हारा नाम लेते ही भरी सर्दी में भी एक प्यार भरी गर्माहट दिल पर छा जाती है. मानता हूँ, दिन भर मॉल से खरीदा ऊँचे ब्रांड का महंगा स्वेटर पहने घूमता हूँ. उसकी चमक लाजवाब है, फिनिशिंग कमाल की और डिजाइन भी मॉडर्न. पर …

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माँ की लोरी – हर एक के बचपन का सबसे सुनहरा क्षण …

चंदामामा दूर के,  पुए पकाये गूड़ के   …..आई न याद …ये है आपकी ज़िन्दगी की सबसे पहली म्यूजिकल  प्लेलिस्ट जो आप कभी नहीं भूलेंगे ….लोरियां  लोरी , जब भी आप यह “जादुई” शब्द सुनेंगे तो ये हीओ नहीं सकता की आप अपने बचपन में ना चले जाएँ ,या अपने बच्चों …

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अखबार का प्रथम-पृष्ठ – फ्रंट पेज – प्रदीप शर्मा की टिप्पणी आज के अखबारों पर

अभी- अभी  प्रदीप शर्मा जी का कॉलम …  नमस्कार ! विजयादशमी की शुभकामनायें। अखबार पत्रकारिता का एक प्रमुख अंग है । प्रमुखतः यह समाचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है । जन-भावना को  प्रकट करने और समाज में जागरूकता लाने का काम भी अखबार बखूबी करते आए हैं । व्यवस्था,प्रशासन और सरकार …

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याद हैं ना ये टिफिन बॉक्स – बचपन का सबसे कीमती सामान और ना भूलने वाली याद

हमारे टिफिन की कहानी और यादें  हिंदी ब्लॉग साईट लिटिल रेड बॉक्स एक बार फिर से आपकोअपनी मीठी यादों में ले जाने को तैयार है , तो चलें  इस बार अपने स्कूल के टिफ़िन के मेनू की यादों में … एक खन या दो खन का जर्मन / अलुमिनियम डब्बा …

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अभी – अभी – आज के हालात पर प्रदीप शर्मा जी का एक नोट …

  अभी- अभी      परिस्थितियां इंसान को कमज़ोर बना देती हैं और परिस्थितियां ही उसे महान भी बना देती हैं । खराब हाव्लात में भी इंसान को लड़ते देखा गया है और अच्छे हालात में भी समर्पण करते देखा गया है । सन् 47 के पहले सभी गुलाम पैदा हुए और 47 के बाद …

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“ये ज़मीन ये आसमां….हमारा कल, हमारा आज….हमारा बजाज” हिंदी ब्लॉग साईट लिटिल रेड बॉक्स की एक और प्रस्तुति

हिंदी ब्लॉग साईट लिटिल रेड बॉक्स एक बार और आपको अपनी मीठी यादों में ले जाने को तैयार है , तो चलें  इस बार अपने बजाज पर सैर करने ..यादों की …:)   प्यारी बजाज स्कूटर, ये ज़मीन ये आसमां….हमारा कल, हमारा आज….हमारा बजाज! तुम्हारा नाम पढ़ते ही कौन ऐसा …

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