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मन से रावण जो निकाले , राम उसके मन में है ….

क्यूँ ना एक रावण हम भी मारें !

रावण इतिहास का एक चरित्र नही, हमेशा हर युग में पैदा होने वाले “गुणों के अभावों” के चरित्र का नाम है | जहाँ सद्गुण नहीं वही रावण है… घर में, ऑफिस में, कॉलोनी में…कही भी..

आज हम भी मारें, उस रावण को जिसने हमारी एकता , सहिष्णुता, प्रेम , सद्भाव, सद्गुण और संस्कार रूपी शान्ति का अपहरण किया है |

हमारे चरित्र को गुस्सैल, असहिष्णु, धार्मिक भेदभाव और रंग पर आधारित बना दिया है | ऐसे देशवासियों के साथ जो क्रूर और हिंसा के साथ वैमस्य फैला रहे हों हम विश्व गुरु तो कया अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए एक अच्छे उदाहरण भी नहीं बन पायेंगे |

आईये एक रावण हम भी मारें …दुर्गा को बलि दे इन दुर्गुणों रूपी दानवों की …समझदार बने , दूसरों के दुःख और भावनाओं को समझ सकने वाले उच्च चरित्र वाले सच्चे भारतीय और सच्चे मनुष्य बने|

रावण को जलाने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम राम थे। मर्यादा पुरुषोत्तम यानी सदैव मर्यादा के अनुसार कार्य करने वाला श्रेष्ठ पुरुष। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। उन्होंने अपना पूरा जीवन मर्यादा के अनुरूप ही निर्वाह किया।

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  • आज जो लोग रावण को जलाते हैं क्या उनमें राम जैसी खूबियां हैं, राम जैसे गुण हैं?
  • क्या रावण को जलाने वाले खुद मर्यादा पुरुषोत्तम हैं?

राम ही तो करुणा में हैं , शान्ति में राम है. राम ही है एकता में , प्रगति में राम है ….
राम बस भक्तों नहीं शत्रु के भी चिंतन में है …
देख तज के पाप रावण , राम तेरे मन में है …
राम तेरे मन में है , राम मेरे मन में है …
राम तो घर घर में है , राम हर आँगन में है …
मन से रावण जो निकाले , राम उसके मन में है ….

 

दोस्तों जरूर बताएं किस- किसने मारा एक रावण ! 

दशहरे की शुभकामनाएं ! 

  • समीर शर्मा | ohindore@gmail.com
वामन हरी पेठे, इंदौर

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com
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