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हार्ट ब्लॉकेज में लगने वाले स्टेंट अब हुए 8५% सस्ते , एंजियोप्लास्टी हो जायेगी बेहद सस्ती …

 

हार्ट पेशेंट के इलाज में इस्तेमाल होने वाले

स्टेंट 85% सस्ते हुए,7 से 31 हजार में मिलेंगे

एंजियोप्लास्टी हो जायेगी बेहद सस्ती लगभग ३०% खर्चे में हो जाएगा काम 

 


नैशनल फार्मासूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने एक नोटिफिकेशन जारी कर इस बात की जानकारी दी कि जनता के हित में यह फैसला लिया गया है जिसके तहत स्टेंट की कीमतें सरकार ने तय कर दी है।

दिल के मरीजों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने कॉरनरी स्टेंट की कीमतों में 85 फीसदी तक की कमी की है। अब इसके हिसाब से मेटल के स्टेंट 7,260 रूपये में और ड्रग इल्यूट स्टेंट की कीमत 29,600 रूपये होगी।

 

” बेर मेटल स्टेंट्स (बीएमएस) और ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट्स (डीईएस) का दाम मूल्य वर्धित कर यानी वैट और दूसरे स्थानीय कर सहित कुल क्रमश: 7,623 रुपये और 31,080 रुपये से अधिक नहीं होगा।”

 

स्टेंट क्या है ?

कोरोनरी स्टेंट एक छोटे छल्ले की शक्ल का उपकरण होता है जिसे नसों के बीच में लगाया जाता है |

धमनी (कोरोनरी र्टरी ) में लगा हुया मेटल स्टेंट

जिसके बाद रक्तप्रवाह आसानी से होने लगता है। यह नस को फुला कर रखता है ताकि रक्तप्रवाह आसानी से होता रहे।

बंद रक्त धमनियों को खोले जाने के लिए स्प्रिंगनुमा दो तरह की स्टेंट होते हैं। जिसमें एक मेडिकेटेड एवं दूसरा बेयर मेटल का बना होता है। इस स्टेंट को बंद रक्त धमनियों की जगह पर लगा दिया जाता है जिससे कि वहां दोबारा रक्त का थक्का नहीं जमता और मरीज के दिल में रक्त का सर्कुलर बना रहता है। मेडिकेटेड स्टेंट सबसे ज्यादा उपयोग में लाए जाते हैं क्योंकि मेडिकेटेड होने के कारण यहां रक्त का थक्का नहीं जमता है।

 

कब लगाया जाता है स्टेंट ?

जब व्यक्ति की धमनियां (कोरोनरी आर्टरी ) में वसा जम जाता है और वह रक्त प्रवाह में बाधा बनाती है जिसे “ब्लॉकेज” कहा जाता है , और जिससे हार्ट अटैक का ख़तरा बहुत बढ़ जाता है , तब धमनियों को चौड़ा करने के लिए ताकि रक्त प्रवाह समय रूप से हो यह नाली रूप स्टंट लगाया जाता है |

इन ब्लॉकेज को पता लगाने वाले टेस्ट को एंजियोग्राफी कहते हैं और इसके ईलाज में स्टेंट लगाने की प्रक्रिया को एंजियोप्लास्टी कहते हैं | यदि धमनियां ६० या ८० प्रतिशत ब्लाक होती हैं तो स्टेंट नहीं लगाये जाते , तब बायपास सर्जरी की सलाह दी जाती है | 

 

 

स्टेंट के दाम की सीमा तय करने से इसके प्रति स्टेंट में 80,000 से लेकर 90,000 रुपये तक की बचत होगी। दिल के मरीजों को सालभर में इस राहत से कुल मिलाकर 4,450 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपने मौजूदा स्टॉक का दाम भी बदलना होगा। उन्होंने कहा कि जो भी अधिक दाम वसूलेगा उसके खिलाफ सख्त कारवाई की जायेगी।

 

भारत में है कमीशन का खेल 

भारत में अस्पताल में मरीजों को मनमाने दामों पर स्टेंट बेचे जाते हैं , ३० डॉलर के इस स्टेंट के २ लाख तक वसूले जाते हैं , दिल की बीमारी के वक्त भारती मरीज़ और उसके परिजनों की मानसिक हालत वैसी ही अत्यंत असावधानी की होती  है और उसी हड़बड़ी में अस्पताल इसका फायदा उठाते हैं | कई डॉक्टर्स भी इसमें कमीशन के चक्कर में बड़ी अहम् भूमिका निभाते हैं | अब ऐसा करने पर मरीज़ शिकायत करेनेगे तो डॉक्टर का लाईसेंस और अस्पताल की वैधानिकता दोनों जा सकते हैं 

कैसे लगता है स्टेंट इस वीडियो से जाने 

 

 

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com

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