Breaking News
Home / Bahai / बहाई उपवास : विश्वशांति और एकता के लिए रख रहे हैं बहाई अनुयायी उपवास , १-१९ मार्च तक

बहाई उपवास : विश्वशांति और एकता के लिए रख रहे हैं बहाई अनुयायी उपवास , १-१९ मार्च तक

समीर शर्मा | बहाई धर्म | उपवास | इंदौर

“यह पृथ्वी एक देश है और मानवजाति इसकी नागरिक”

– बहाई पवित्र लेख 

बहाई  उपवास प्रारम्भ १ से १९ मार्च 

१ माह यानि १९ दिन के उपवास 

बहाई कैलेण्डर जिसे “बदी पञ्चांग ” भी कहा जाता है , के  अनुसार उपवास का महीना 1 मार्च से 19 मार्च है,  और इसे हम आला (उच्चता) का महीना कहते हैं।

इस दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त तक हम अपने को अन्न’जल से दूर रखते हैं और संयमित रहते हैं। जो सीमायें तय की गई हैं उन्हें लांघने की छूट किसी को भी नहीं है और न ही किसी को अपनी इच्छा और कोरी कल्पना के अनुसार इस विधान का अनुपालन करने का अधिकार है।

सच, वे सौभाग्यशाली हैं जो उपवास की ऊर्जा से प्रभु के प्रति अपने प्रेम को प्रगाढ़ करते हैं।

हालाँकि ऊपर से उपवास कठिन (कष्ट साध्य) लगता है, लेकिन अंदर से यह हमें अकथनीय प्रसन्नता से भर देता है। उपवास के द्वारा शुद्धिकरण का मार्ग प्रशस्त होता है। उपवास में असंख्य लाभ छिपे हुये हैं।

बहाई धर्म के अनुयायी अपने कैलेंडर “बदी” कैलेण्डर के अनुसार १९ दिनों तक प्रतिवर्ष विश्वशांति और एकता के लिए उपवास करते हैं | यह इस धर्म के आध्यात्मिक रूप से अनिवार्य नियम में है |  

 

बहाई धर्मं में प्रार्थना और उपवास ही अनिवार्य है , और कोई रीति -रिवाज़ इस धर्म में नहीं | 

 

नई दिल्ली स्थित बहाई उपासना मंदिर “लोटस टेम्पल “

 

 

कैसे करते हैं बहाई अपने उपवास ?

  • बहाई उपवास १५ वर्ष से ऊपर और ७० वर्ष तक के व्यक्तियों के लिए आध्यात्मिक रूप से अनिवार्य है |
  • इससे कड़ी मजदूरी करने वालों, गर्भवती स्त्रियों, यात्रियों और बीमारों को छूट है |

निर्जल प्रभु आराधना 

इस वर्ष भी १ मार्च से १९ मार्च तक बहाई धर्मावलम्बी अपने उपवास रख रहें हैं  | सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक भौतिक अन्न, जल तथा अपने स्वभाव और इन्द्रियों को संयमित रखने का अभ्यास और प्रभु आराधना, प्रार्थनायें इस आध्यात्मिक उपवास में करते हैं| 

19 दिनों का उपवास मानवजाति के लिये बहाउल्लाह के अनेक उपहारों में से एक है। इन 19 दिनों के दौरान प्रत्येक दिन लगभग 12 घंटे तक खाने-पीने पर हम आत्मनियंत्रण रखते हैं, इन बारह घंटों के दौरान हम अन्न-जल कुछ भी ग्रहण नहीं करते यानि निर्जला उपवास धारण करते हैं। शरीर-विज्ञान की दृष्टि से देखें तो उपवास के इन बारह घंटों के दौरान भी हमारे शरीर के क्रियाकलाप सामान्य ढंग से संचालित रहते हैं। बहाई लेख हमें बतलाते हैं कि खान-पान पर रोक रखना ही उन्नीस दिनों के उपवास का मूल उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह किसी अन्य महानतर उद्देश्य का चिन्ह है। रात्री में सूर्यास्त के पश्चात उपवास खोला जाता है (एकासना) | 

 

उन्नीस दिनों की यह एक आध्यात्मिक यात्रा है, यह आत्मनियंत्रण और प्रगाढ़ रूप से प्रभु-चिन्तन का काल है। 

 

c99a90d1-405a-4c82-9f02-14d601852bc3

सभी धर्मों में सामान रीति से उपवास का प्रावधान है :

ये उपवास वैसे ही हैं,  जैसे कि  हिन्दू धर्म में वैदिक रीति, क्रिस्चियन या ईस्लाम  में मूल रूप में दिए हुए हैं – भोजन का त्याग और ईश्वर की आराधना, सत्य, ईमानदारी, दिव्य-गुणों का जीवन में पालन |

इससे भी पता चलता है की सभी धर्मों का मूल एक ही है |

 

बहाई पवित्र लेखों के अनुसार

“आध्यात्मिक और आदर्श उपवास वह है जिसमे मनुष्य अपनी स्वार्थी कामनाओं, लापरवाही, और अपनी पाशविक प्रवत्तियों से बचा रहे”

बहाउल्लाह के पवित्र शब्दों में “प्रार्थना और उपवास , मानव जीवन के दो पंखों के समान हैं”

उपवास मनुष्य के पुनरुत्थान का कारण है, इससे हृदय कोमल बन जाता है और मनुष्य में आध्यात्मिकता की वृद्धि होती है। इसका निर्माण इस वास्तविकता से होता है कि मनुष्य के विचार ईश्वर को याद करने में केन्द्रित होते हैं और इस पुनर्जीवन और प्रेरणा के बाद उन्नति संभव होती है।

 

उपवास दो प्रकार के हैं-भौतिक और आध्यात्मिक।

भौतिक उपवास खान-पान से दूर रहना है यानि शारीरिक भूख से दूर रहते हैं। परन्तु आध्यात्मिक अथवा वास्तविक उपवास यह है कि मनुष्य व्यर्थ कल्पनाओं से और अमानवीय गुणों से दूर रहते हैं।

इसलिए भौतिक उपवास आध्यात्मिक उपवास का एक प्रतीक मात्र  है|

Image may contain: text

उपवास में की जाने वाली बहाई  प्रार्थना 

‘‘हे दिव्य विधाता! विरक्त हूँ जिस तरह मैं दैहिक कामनाओं, अन्न और जल से, मेरा हृदय भी शुद्ध और पावन कर दे वैसे ही, अपने अतिरिक्त अन्य सब के प्रेम से; भ्रष्ट इच्छाओं और शैतानी प्रवृत्तियों से मेरी आत्मा को बचा, इसकी रक्षा कर, ताकि मेरी चेतना पवित्रता की सांस के साथ संलाप कर सके और तेरे उल्लेख के सिवा अन्य सबका परित्याग कर सके।’’

 

 

कौन हैं बहाई धर्म के अनुयायी ?

बहाई धर्म के अनुयायी पूरे विश्व में फैले हुए हैं और अपनी समाज निर्माण की गतिविधियों के कारण सराहे जाते हैं |

भगवान् श्रीकृष्ण के कल्कि अवतार के रूप में “बहाउल्लाह” (ईश्वर की आभा) को इस युग का अवतार मानते हैं तथा बहाउल्लाह को पूर्व के सभी अवतारों जैसे श्री राम , हज़रात मूसा , ईसा मसीह , जरथुस्त्र , हज़रत मुहम्मद की वापसी मानते हैं |

बहाई धर्म की मान्यता है की ईश्वर एक है , और सभी अवतार समय समय पर ईश्वर मानवजाति को आध्यात्मिक और सामाजिक शिक्षा देने हेतु भेजते हैं अत: सभी अवतार सत्य और पूजनीय हैं और सभी धर्मों का स्त्रोत केवल एक ही ईश्वर है|

 

अधिक जानकारी के लिए बहाई धर्म की वेबसाईट www.bahai.in या www.bahai.org  करें |

 

 

 समीर शर्मा | 9755012734

www.ohindore.com | ohindore@gmail.com | @checksameer

 

Indore Ka Raja - Ganeshotsav

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com

ये भी तो देखो भिया !

19 दिनों के व्रत के बाद बहाई मनाएंगे नव वर्ष – नवरोज़ : एक अनोखी कम्युनिटी, जो है एकता की शानदार मिसाल

Share this on WhatsApp ओहइंदौर .कॉम | विशेष | बहाई नव वर्ष | समीर शर्मा  …