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डीपीएस स्कूल बस हादसे के बाद अब क्या ? अगला एक्सीडेंट कब ? अब भी जाग जाएँ तो एक नन्ही जान बचेगी …

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मैंने कभी सोचा न था कि मेरे शहर इंदौर के लिए नए साल की शुरुआत इतनी भयावह होगी …

इंदौर के डीपीएस स्कूल की बस का दर्दनाक हादसा, पूरा शहर सकते में है, दहशत और सदमे में भी ।  मारे गए नन्हे-मुन्नों  के परिवार के दुख को आंकना संभव ही नहीं और उनके नुकसान की भरपाई कभी भी नही की जा सकती । 

सोशल मीडिया पे बाढ़ आयी है संवेदनशील लोगों के संदेशों और आरोपों की जो शायद २-४ दिनों तक रहेगी , कुछ लोग DP भी बदल रहे हैं |

 

शहर में कुछ युवा और जागृत लोगों ने अपना खून दिया और इकट्ठे हुए बॉम्बेअस्पताल में,  कई लोग भी  तैयार हैं हर मदद को ….इस बात ने बताया कि इंदौर वाकई में कुछ जगहों पर संवेदनशील है। 

 

मुख्यमंत्री इंदौर में थे पर आए नही, टवीट किया कि खर्च वहन वह करेंगे और कल आएंगे । 

 

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अब बात मुद्दे की…

 

इन सब घटनाओं के बीच शहर में  मातापिता का समूह ऐसा है जो कि बहुत डर गया है। वो बच्चे  जो बच  गए उनके माता पिता , जो बच्चे उस बस में नही थे,  जो उस स्कूल में नही हैं वो भी और जिनके बच्चे  रोज़ाना स्कूल बसों , ऑटो रिक्शा, मिनी बस , मैजिक या किसी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट साधन से स्कूल जाते हैं। 

 

हांलांकि ये पेरेंट्स फीस को लेकर बहुत संवेदनशील हैं, महंगाई को लेकर भी, स्कूल में मिल रही सुविधाओं को लेकर भी , पर कभी भी क्या इन्होंने स्कूल की तरफ से दिए जा रहे सुरक्षा इंतज़ामों के बारे में  सोचना चाहा या बात की है। 

 

क्या कभी ये देख कि कितने लोगों को बैठा कर मैजिक या ऑटो जा रहा है। आरटीओ के मुताबिक एक ऑटो में  5 बच्चो से ज्यादा की जगह नही पर जाते हैं कम से कम 15…माता पिता रोज़ देखते हैं पर कहते या करते कुछ नही । 

 

सेक्युरिटी ऑडिट जैसी टर्म से बेखबर हैं। 


अगर सेफ्टी बेल्ट्स हो तो  …

 National Highway Traffic Safety Administration (NHTSA) अमेरिका की इस संस्था ने लगभग सभी स्टेट्स में स्कूल बसेस में सेफ्टी बेल्ट्स अनिवार्य करवा दिए हैं |

 

 

खैर स्कूल सब कुछ करे ये मुमकिन नही , ये साझा जिम्मेवारी है , मातापिता, स्कूल, आरटीओ प्रशासन , पोलिस और मीडिया की भी…..

पालक संघ ने कभी भी फीस के अलावा अपनी कोई और  गतिविधि इंदौर क्या पूरे देश मे।नही दिखलाई। 

डीपीस स्कूल की बस का  हादसा एक अलार्म है …

स्कूली बच्चों के आसपास कुछ और खतरे घूम रहे हैं जिनसे ये समाज अनजान बन रहा है… ये हैं ड्रग्स, पोर्न,  मोबाइल अडिक्शन, नैतिक मूल्यों का पतन , व्यवहार में आया बदलाव और भी बहुत कुछ …

 

बस हादसे की जिम्मेवारी शायद ड्राइवर या स्टीयरिंग पर डाल दी जाएगी क्योंकि आरटीओ ने बस फिटनेस प्रमाण पत्र दिख दिया है जो सही है, जीपीएस रिपोर्ट भी सही है, ट्रक सही आ रहा था तो क्या गलती भगवान की थी ?

स्कूल बस के रूट्स क्या हाइवे के होने चाहिए, या क्या स्पीड गवर्नर्स , इमरजेंसी ब्रेक्स या सीटबेल्ट्स नही होने चाहिए । पर ये डिमांड करेगा कौन ….?

 

जब कोई भी जागरूक नही , अपने बच्चों को लेकर भी नही तो बच्चों की शहादत तो होगी ही। 

यह आरोपों का समय नही आत्म आंकलन , समाधान और आपस मे।बैठकर इन नन्हे मुन्नों की ज़िन्दगी का सवाल है और इसकी जिम्मेवारी हम सभी की है।  शायद सभी मिलकर इसके बारे में सोचें और प्रशासन के साथ  मिलकर गाइडलाइंस बनाये सिर्फ बस की ही  नही , बल्कि बच्चों को ज़िन्दगी के लिए ज़रूरी सभी आयामों की …

नहीं तो ये मैसेज भेजते रहेंगे आप :

रास्ता निहारती रही मां घर पर बैठ कर….
बच्चे थे कि बिना बोले स्कूल से जन्नत चले गए…

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तभी श्रुति, खुशी, कृति, स्वस्तिक जैसे बच्चे  सुरक्षित घर लौट पाएंगी… नही तो खबरों का क्या है छपती रहेंगी …ड्राइवर पर आरोप डालकर सभी बचना चाहेंगे , वो सही नहीं …उसे भी अपनी जान की फिक्र थी, उसका भी परिवार है , ज़रूर कोई ऐसी स्थिति में ही यह हुआ है जो नियंत्रित नहीं की जा सकी होगी ….पर अब जागना ज़रूरी है …बच्चो की सुरक्षा सिर्क्फ़ बस नहीं , गुणों में , आदतों में , शिक्षा में , नैतिक आचरण में और सबसे ज़रूरी है आपका जागृत होना ….

 

समीर शर्मा 

Founder,

www.ohindore.com | 9755012734

 

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com