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प्यारे स्कूल के पहले दिन – A Letter from your Childhood by Littleredbox.in

 
प्यारे स्कूल के पहले दिन…
 
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जैसे-जैसे गर्मी की छुट्टियाँ खत्म होने लगती तुम्हारा टेंशन सताने लगता था. यूँ लगता था कि मानो जिससे पुराना उधार लिया हो, वह वापिस वसूल करने आने वाला हो. फिर वही पढ़ाई, किताबें, होमवर्क, क्लास टेस्ट, रिज़ल्ट…मन में आता काश ये छुट्टियाँ चलती रहें.

स्कूल शुरू होने के पहले मम्मी-पापा के साथ नया बैग, टिफ़िन, किताबें, यूनिफार्म लाना, किताबों-कापियों पर कवर चढ़ाकर स्पाइडरमैन, सुपरमैन आदि के पसंदीदा नेम-स्टीकर चिपकाना थोडा मोटिवेशन तो देता था, पर उतना भी नहीं.

खैर समय को हमारे इमोशन्स से क्या? आखिर आ ही जाता था वो स्कूल का पहला दिन. घड़ी के कांटे ऐसा लगता उस दिन एक्स्ट्रा फ़ास्ट चल रहे हों.

अलसुबह मन मारके उठकर, बची नींद टॉयलेट में पूरी कर, मम्मी की डांट सुनकर, गिरते-पड़ते, जैसे-तैसे स्कूल को रवाना होते थे. कमबख्त छुट्टियाँ इतनी जल्दी क्यूँ खत्म हो गई…यह सोचते हुए. रास्ते में अपने जैसे और कई उनींदे नज़र आते थे.

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पर स्कूल में कदम रखते ही जादू हो जाता था. इतने सारे बच्चों की एनर्जी मानो मूड को रिचार्ज कर देती थी. साइकिल स्टैंड पर ही यारों-दोस्तों का झुण्ड मिल जाता, उनके साथ गपशप, छुट्टियों में क्या-क्या शरारतें की इस पर नोट्स शेयरिंग, हँसी-ठिठोली के बीच नई क्लास में जाना, खिड़की वाली बेंच पर दौड़कर अधिकार जमाना, नई किताबों की सुगंध अपने अन्दर भरना, जाने-पहचाने चेहरों के बीच कुछ नए चेहरे पाना, नए टीचर्स से मिलना-मिलाना…और शुरू हो जाता एक और साल का सफ़र.

फिर वही पढ़ाई, किताबें, होमवर्क, क्लास टेस्ट, रिज़ल्ट…पर मन इसमें जुट ही जाता था. क्यूँकि प्यारी-प्यारी  गर्मी की छुट्टियों ने, इसके बाद ही मिलने का वादा जो किया रहता था!

 

सौजन्य से : लिटिलरेडबॉक्स.इन

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यह पोस्ट लिटिलरेडबॉक्स.इनसे साभार लिया गया है, ओहइंदौर.कॉम और लिटिलरेडबॉक्स.इन  के साझा करार के तहत अनुमति लेकर इसे प्रकाशित किया गया है | बेहतरीन हिंदी कटेंट को इंदौर के सभी लोगों तक पहुंचाने और अच्छे साहित्य को बढ़ाना ही इसका मूल उद्देश्य  है |

यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसे श्री आरिश नांदेडकर और सुश्री अतुला गुप्ता दो मित्र और पार्टनर्स संचालित करते हैं | यह एक उम्दा हिंदी रचनाओं का ब्लॉग है, जो आपको आपके स्वर्णिम बचपन और पुरानी यादों में लेकर जाता है

 

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