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अखबार का प्रथम-पृष्ठ – फ्रंट पेज – प्रदीप शर्मा की टिप्पणी आज के अखबारों पर

अभी- अभी 

प्रदीप शर्मा जी का कॉलम … 

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नमस्कार ! विजयादशमी की शुभकामनायें।

अखबार पत्रकारिता का एक प्रमुख अंग है । प्रमुखतः यह समाचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है ।

जन-भावना को  प्रकट करने और समाज में जागरूकता लाने का काम भी अखबार बखूबी करते आए हैं । व्यवस्था,प्रशासन और सरकार  को कुम्भकर्णी नींद से जगाने के उत्तरदायित्व को निभाने के कारण ही इसे समाज का प्रहरी भी कहा जाता है ।

अखबार कोई सा भी हो,लोग मालिक को नहीं संपादक को जानते हैं । मुखपृष्ठ और संपादकीय ये दो ही किसी अखबार के अंग होते हैं,जो उसे किसी अन्य अखबार से अलग करते हैं,उसकी अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाते हैं ।

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(शहर के  प्रमुख अखबार का प्रथम पृष्ठ )

राजेंद्र माथुर,राहुल बारपुते और नरेंद्र तिवारी की तिकड़ी ने इंदौर के समाचार-पत्र नईदुनिया को एक पहचान दी थी । पत्रकार और संवाददाता की मेहनत तब रंग लाती है,जब उसे ऐसे मँजे हुए संपादक मंडल के साथ काम करने का अवसर मिलता है ।

आज भी पुराने समाचार-पत्रों के मुखपृष्ठ ऐतिहासिक घटनाओं की स्मृति-स्वरुप संजोकर रखे जाते हैं । आपातकाल पर संपादकीय कॉलम खाली रखना एक संपादक की मौन अस्वीकृति,असहमति और विद्रोह था ।

इसी अखबार का प्रथम-पृष्ठ कई वर्षों तक एक ही पत्रकार जयसिंह जिन्हें लोग ठाकुर साहब के नाम से संबोधित करते थे,के ज़िम्मे था । अख़बार का फ्रंट-पेज सबसे आखिर में छपता था ताकि कोई प्रमुख खबर छूट न जाए । यह वह समय था जब इलेक्ट्रिक मीडिया ने अपने पाँव ज़माना शुरू नहीं किये थे । इंटरनेट के आगमन से जो संचार क्रांति हुई,उसने अखबारों के महत्त्व को कम कर डाला । आज आप मोबाइल पर सभी अखबार पढ़ सकते हैं । इसका सबसे बुरा प्रभाव अखबार के प्रथम-पृष्ठ पर हुआ ।

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(शहर के  प्रमुख अखबार के प्रथम पृष्ठ )

आज सभी अखबारों के मुख-पृष्ठ पर दो अथवा चार पृष्ठ के विज्ञापन शोभायमान हो रहे हैं । प्रथम-पृष्ठ पर सिर्फ अखबार का नाम और फुल पेज का बजाज,हौंडा अथवा अन्य किसी बड़ी कंपनी का विज्ञापन ही नज़र आता है । अंदर के पृष्ठों की तो बात ही मत कीजिए । अब लोग खबर अथवा संपादकीय के लिए अखबार नहीं पढ़ते । क्लासिफाइड विज्ञापन,वैवाहिक और शोक-सन्देश ही किसी अखबार की एकमात्र पहचान बन गए हैं । एक समय था,लोग अखबार में विज्ञापन ढूंढते थे,आज ख़बरें ढूंढते रह जाते हैं ।।

अखबार से फ्रंट पेज का गायब होना एक सुहागन के माथे से बिंदी का गायब होने जैसा है ।

ख़बरों-रहित ,फुल पेज के विज्ञापन से सुसज्जित अखबार का प्रथम-पृष्ठ वह भारतीय महिला है,जिसके गले में हीरे का हार तो है, पर मंगलसूत्र नहीं । शायद मंगलसूत्र भी हो, पर उसी तरह, जिस तरह फ्रंट-पेज के विज्ञापन तले,अंदर दबा हुआ  प्रथम-पृष्ठ !!!।।

 

प्रदीप शर्मा 

अभी- अभी  प्रदीप शर्मा जी का कॉलम ...  नमस्कार ! विजयादशमी की शुभकामनायें। अखबार पत्रकारिता का एक प्रमुख अंग है । प्रमुखतः यह समाचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है । जन-भावना को  प्रकट करने और समाज में जागरूकता लाने का काम भी अखबार बखूबी करते आए हैं । व्यवस्था,प्रशासन और सरकार  को कुम्भकर्णी नींद से जगाने के उत्तरदायित्व को निभाने के कारण ही इसे समाज का प्रहरी भी कहा जाता है । अखबार कोई सा भी हो,लोग मालिक को नहीं संपादक को जानते हैं । मुखपृष्ठ और संपादकीय ये दो ही किसी अखबार के अंग होते हैं,जो उसे किसी अन्य अखबार से…

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