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गुरु पूर्णिमा – सच्चे सतगुरु को श्रद्धा अर्पण करने का दिन

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“गुरु पूर्णिमा” इस भरतखंड में सदियों से मनाई जा रही है,  

अन्धकार से जो हमें प्रकाश में लाये उसे गुरु माना गया है | 

पर वास्तविकता में गुरु कौन है ? किसे सद्गुरु कहा है ?

क्या हो की सद्गुरु को सच्ची श्रद्धा अर्पण हो सके ? 

 

मानव जगत में दो प्रकार के गुरु पद हैं , एक सद्गुरु जो आध्यात्मिक ज्ञान देता है , जीवन का उद्देश्य बताता है और हमें हमारे रचियता यानि ईश्वर से जोड़ता है | दूसरा इस पार्थिव जगत के शिक्षक , जिन्हें हम लौकिक शिक्षा , ज्ञान , अनुभव , दर्शन, विज्ञान और सदाचार के लिए अपना गुरु बनाते हैं , ये भी सद्गुरु यानि आध्यत्मिक गुरु से ही प्रकाशित/ दीक्षित होते हैं |

जब बात गुरु पूर्णिमा की है तो यह बात जानना अत्यंत आवश्यक है कि यहाँ पर सद्गुरु यानि दैवीय और आध्यात्मिक गुरु की बात हो रही है | आजकल कुकुरमुत्तों की तरह उग आये ज्ञानी और स्वयंभू गुरुओं की नहीं , बाबाओं की नहीं , और ना ही ज्योतिषों और तांत्रिकों की …..

एक श्लोक बड़ा प्रचलित है ” गुरुब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुदेव महेश्वर: , गुरु साक्षात्परब्रह्म तस्मैश्री गुरुवे नम:” यानि ईश्वर के विभिन्न गुणरूपी दैवीय स्वरुप को ही गुरु माना गया है |

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शिक्षक और गुरु में अंतर बहुत आवश्यक है , परन्तु सम्मान में कही त्रुटी ना हो यह भी ध्यान रखना परम आवश्यक है | जब हम ज्ञान और शिक्षा में अंतर कर पायें तो हम गुरु और शिक्षक में भी अंतर कर पाएंगे | 

सदगुरु वह है जो हर युग में ईश्वर और मानव के बीच में सेतु का काम करता है , अपने जीवन की परवाह किये बिना समस्त विरोधों को सहते हुए वह हमें ईश्वरीय ज्ञान देता है और उस युग के आध्यात्मिक और सामाजिक नियमो को देकर चला जाता है | जैसे श्रीराम , श्री कृष्णा , प्रभु ईसा मसीह , हज़रत मुहम्मद , गुरु नानक देव जी, भगवान बुद्ध और अब कल्कि अवतार बहाउल्लाह…

आध्यात्मिक ज्ञान के बिना हमारा विकास संभव नहीं , मनुष्य में मानवता नही और जगत में शांति , प्रेम और एकता नहीं , और इसी अन्धकार से निकालने वाले इन अवतारों को सच्ची रूप में धन्यवाद देना , श्रद्धांजलि अर्पण करना ही गुरु-पूर्णिमा को मनाना है ….इनकी शिक्षाओं पर चलना जो हमारे मनुष्य होने की साक्षी दें, सच्चा व्रत है |

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 शिक्षकों को जिस तरह गर्व होता है अपने छात्रों पर जब वह उनके दिए ज्ञान का प्रदर्शन इस जगत में करते हैं , वैसे ही यदि हम अपने आराध्य गुरुओं यानि ईश्वरीय अवतारों के दिए ज्ञान का पालन करेंगे तो वह सच्ची गुरु दक्षिणा है | श्री कृष्णा ने कहा है कि सभी कुछ त्याग कर मेरी शरण में आ जाओ अर्थात मेरी सुनो किसी अन्य की नहीं , गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो मेरी बातों को मानेगा वह मुझे प्राप्त होगा , जो पत्थर , वृक्ष , यक्ष, देव की सुनेगा वह उन्हें ही प्राप्त होगा मुझे नहीं | 

ऐसा ही सभी धर्मों में साफ़ कहा गया है कि हमें सिर्फ ईश्वरीय वाणी द्वारा दिए गए सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारना है , मनुष्यों द्वारा रचित पाखंड, कर्म्कांड और अंधविश्वासों को नहीं , और ना ही ह्यूमन वर्शिप / व्यक्ति पूजा | 

 

जब भक्त या मोमिन ऐसा करेंगे तो , सच्ची गुरु पूर्णिमा मनेगी …..क्योंकि यह पर्व गुरु को गुरु दक्षिणा देने का पर्व है , आज गुरु अपेक्षा करते होंगे उनके मानव शिष्यों से ! क्या कर पाएंगे हम यह ……?

 

सभी सदगुरुओं के स्वरुप को नमन और गुरु पूर्णिमा की बधाईयाँ ….

 

– समीर शर्मा 

वामन हरी पेठे, इंदौर

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Founder and Editor, www.ohindore.com
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