Breaking News
Home / Culture / कम्पोस्ट बनाये , घर पर अपने लिए या पूरी सोसाइटी या कॉलोनी के साथ मिलकर

कम्पोस्ट बनाये , घर पर अपने लिए या पूरी सोसाइटी या कॉलोनी के साथ मिलकर

स्वच्छ इंदौर

.

स्वच्छ भारत – स्वच्छ इंदौर के लिए एक और पहल 

भाग १ – आईये कम्पोस्ट बनायें 

एक , सुझाव या आइडिया है, कि क्यूँ ना हम सभी इन्दोरी मिल कर वर्षा ऋतू के पहले २ महत्वपूर्ण कार्य कर लें  , और मेरी बात मानिये आप खुश ही नहीं होंगे आप एक आदर्श बन जायेंगे …इसके फायदे तो अनगिनत हैं ही …..

१  कम्पोस्ट पिट बनाना ( घर या फ़्लैट / सोसाइटी में ) (एकल या सामूहिक ) 

२  वाटर रिचार्जिंग पिट बनाना  (एकल या सामूहिक )

आप जीत सकते हैं इस अवार्ड को और आप अपनी प्रविष्टी ,

फोटोग्राफ्स और स्टोरी के साथ भेजिए हमें १५ मई २०१७ तक

.

साथ ही हम सभी खुद को और अपने आस-पास के माहौल  को भी अगर जागृत कर पायें तो हमने अपने “सर्वोत्तम ईश्वरीय कृति ” यानि मनुष्य होने का प्रमाण तो दे ही दिया …

.

.

हम अपने मीडिया जगत के साथ मिलकर इस कार्य को करें और जनता इसमें भागिदार बने …और फायदा हम सभी उठायें …हम आपके साथ मिलकर आपके प्रयास को पूरे शहर और सरकार तक भी पहुंचाएंगे | ओह इंदौर आपके इन कदमो में आपके साथ है | 

आज पहला कदम :

कम्पोस्ट कैसे बनाये घर या अपने कॉलोनी / सोसाइटी में 

.

घर पर कम समय में सरल तरीके से कम्पोस्ट कैसे तैयार करें।

Related image

 

.

घर में एक प्लास्टिक बिन या मटके में या सोसाइटी में सामूहिक रूप  से , एक बड़ा पिट/ गड्ढा खोद कर हम सभी उसमे जैविक कचरा डाल कर इस वर्षा से पहले ३ माह में काफी मात्र में कम्पोस्ट बना पायेंगे और उसका उपयोग वर्षा ऋतु में नई सब्जीयों , बागवानी , फूल और पौधों में कर पायेंगे |

 

 

 

 

कम्पोस्टिंग ( Composting ) क्या है ?

कम्पोस्टिंग एक सूक्ष्म जैविक विघटन प्रक्रिया है जिसमें मिट्टी में प्राकृतिक तौर से पाए जाने वाले बैक्टिरिया और अन्य छोटे जीव प्राकृतिक जैविक अपशिष्ट पदार्थों को पाचन प्रक्रिया के द्वारा कम समय में विघटित करके खाद में बदल देते हैं। कम्पोस्टिंग से प्राप्त उत्पाद को हम कम्पोस्ट या जैव उर्वरक के नाम से जानते हैं।

प्रकृति में कम्पोस्टिंग एक निरंतर होने वाली प्रक्रिया है।  अगर ध्यान दें तो आप देखेंगे की हमारे आसपास मिट्टी की उपरी उपजाऊ परत वास्तव में एक जैव विघटित खाद (कम्पोस्ट) ही है। इस खाद को हम हयूमस  कहते हैं, इसने करोड़ों वर्षों में परत दर परत इकट्ठा होकर हमारी धरती को एक हरित गृह बना दिया है।

जैविक कम्पोस्ट (खाद) के प्रकार –

  • बायोगैस स्लरी
  • वर्मी कम्पोस्ट
  • हरी खाद
  • जैव उर्वरक (कल्चर)
  • गोबर की खाद

 

Related image

 

 

कम्पोस्ट के प्रमुख घटक या पदार्थ जिनसे यह बनाया जा सकता है –

सूखे पदार्थ हरी सामग्री सूक्ष्म जीव (कृमि) और उनका भोजन

अंडे के छिलके

ख़राब आटा या बेसन

सूखी पत्तियां

छोटी टहनी

सूखी कटी घास

धान की भूसी

ख़राब दलहन

गन्ने की खली

घोंघे के सूखे खोल

दफ्ती

लकड़ी का बुरादा

ख़राब आलू चिप्स या पापड़

फलों के छिलके (केला)

ख़राब फल और सब्जियां

फल का जूस निकालने के बाद बचा पदार्थ

मटर के छिलके

हरी पत्तियां

हरी घास

साग

फूल

जलकुम्भी

जलीय पौधे

कैक्टस

पोषक मिट्टी

गोबर

केंचुए

ख़राब हो चुका गुड़

गाय का मूत्र

जिन्दा घोंघे

Related image

.

कम्पोस्ट बनाने में किन बातों का ध्यान रखें –

  • कम्पोस्ट बनाते वक्त इसे ऐसी जगह तैयार करें जहाँ सीधी धुप न पड़े।
  • तैयार होते वक्त कम्पोस्ट का तापमान बढ़ जाता है, धूप में गर्म होने से इसमें नमी बहुत जल्दी ख़त्म हो सकती है।
  • नमी कम होने से जैविक विघटन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। ज्यादा सूखने पर यह पूरी तरह रूक भी सकती है।
  • कम्पोस्ट मिश्रण केवल नम होना चाहिए, गीला होने पर इसमें सड़ने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
  • याद रखें कम्पोस्ट या जैविक विघटन एक जैव अभिक्रिया है जिसके विपरीत सड़ने की प्रक्रिया एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है।
  • सही तरीके से तैयार हो रहे कम्पोस्ट में दुर्गन्ध और कीड़े लगने की समस्या नहीं होती है।
  • अगर मिश्रण से दुर्गन्ध आ रही हो या इसमें केंचुए के आलावा दूसरे कीड़े लग रहे हों तो इसमें और पदार्थ न डालें, अगर मिश्रण से दुर्गन्ध कुछ दिन में दूर न हो तो इस मिश्रण को फेंक दें।
  • मिश्रण में कोई भी एक पदार्थ अधिक मात्र में न डालें।
  • कम्पोस्ट में अम्लीयता (एसिडिटी) नहीं होनी चाहिए, नींबू या मौसमी आदि खट्टे पदार्थ अनुपात में कम रखें।
  • जैविक प्रक्रिया होने के नाते कम्पोस्ट को आक्सीजन की अधिक जरुरत होती है, पूरी तरह से बंद जगह में कम्पोस्टिंग की प्रक्रिया धीमी या फिर बंद हो सकती है।

 

Image result for compost

 

” किन पदार्थों को कम्पोस्ट में न डालें “

  • मांस या अन्य कोई पशु उत्पाद
  • पका हुआ भोजन (बहुत कम मात्रा में डाला जा सकता है)
  • प्लास्टिक
  • रसायनिक स्याही से छापा हुआ कागज़
  • किसी भी किस्म का कृतिम संश्लेषित रसायन
  • रासायनिक खाद
  • कोयला

 

 

 

घर पर कम्पोस्ट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ 

  • रसोई से निकले फल व सब्जियों के अवशेष
  • ख़राब हो चुके खाद्यान पदार्थ
  • बगीचे सी निकली सूखी और हरी पत्तियां
  • फूल और कैक्टस
  • अंडे के छिलके

 

 

.

 

घर पर या सोसाइटी में  जैव उर्वरक कैसे तैयार करें –

.

  • मटका विधि –एक बड़े आकार के मिट्टी के मटके में पहले से तैयार थोड़े से कम्पोस्ट के साथ बाकी सामग्री कुछ दिनों के अंतराल पर मिलाएं।  जैसे-जैसे कम्पोस्ट तैयार होगा यह दब कर कम हो जायेगा तब आप इसमें और चीजें डाल सकते हैं।  समय-समय पर ध्यान दें की मिश्रण बहुत सूखा न हो जाए, अगर ऐसा हो तो इसमें थोड़ी हरी सामग्री या फिर केवल सादा पानी भी डाल सकते हैं। मटके के पूरा भर जाने पर इसके ऊपर एक पतला कपड़ा बांध दें और कभी कभार इसे हिला कर मिश्रण को ऊपर निचे पलट दें।  इस विधि से कम्पोस्ट दो से छह महीने में तैयार हो जायेगा।
  • खुला कम्पोस्ट –अगर घर में मध्यम या बड़े क्षेत्रफल का बागीचा है तो कम्पोस्ट खुले में भी बनाया जा सकता है। एक जाल या इंट का बाड़ा बना कर कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। मटके या बड़े कंटेनर की तुलना में इसे सरलता से ऊपर नीचे पलटा जा सकता है। बड़ा आकार होने से यह क्रिटिकल द्रव्यमान के स्तर तक जल्दी पहुँच जाता है जिससे कम समय में ज्यादा कम्पोस्ट प्राप्त किया जा सकता है। इस विधि से कम्पोस्ट दो से तीन महीने में तैयार हो जायेगा।
  • गमले में कम्पोस्ट –कम्पोस्ट का यह सबसे सरल और अत्यधिक उपयोगी तरीका है खास तौर से उन लोगों के लिए जो इस काम के लिए ज्यादा समय नहीं दे सकते या इससे जुड़ी तमाम मुश्किलों से निपट नहीं सकते। इस विधि में आधे तैयार तैयार कम्पोस्ट या फिर शुरूआती मिश्रण को गमले के तह में आधा भरा जाता है, इसमें आप बीच- बीच में तैयार कम्पोस्ट या मिट्टी की पतली परत भी दाल सकते हैं। इसके ऊपर के आधे हिस्से में तियार कम्पोस्ट या मिट्टी भरी जाती है और कोई ऐसा पौधा लगाया जाता है जो किसी भी स्थिति में सरलता से बढ़ सके। इस गमले में आप कुछ केंचुए भी डाल दें जो मिट्टी को ऊपर नीचे पलटते रहेंगे। इस विधि में कम्पोस्ट का तैयार होना मायने नहीं रखता, आप इसे पहले दिन से ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

 

 

 

 

 

कुछ सरल उपाय –

  • कम्पोस्ट के लिए सुझाए गए सूखे / हरे पदार्थ, सूक्ष्म जीव और उनका प्रारम्भिक भोजन में से आप अपनी सहुलियत के अनुसार किसी भी अनुपात या कम्बिनेसन में मिला सकते हैं।
  • किसी गलत प्रयोग का दुस्प्रभाव केवल कम्पोस्ट तैयार होने में लगने वाले समय को बढ़ा सकता है।
  • प्रयोग करने से न घबराएँ समय के साथ आप अपनी विशेष परिस्थितियों में भी कम्पोस्ट तैयार करने की नयी विधि खोज लेंगे।
  • एक ही जगह पर और एक ही तरीके से कम्पोस्ट बनाने की अपेक्षा थोड़े छोटे और अलग स्तर पर इसे तैयार करें। किसी एक प्रकिया के असफल होने की स्थिति में दूसरे को सुधारा जा सकता है।
  • पहले तैयार हो चुके कम्पोस्ट में से कुछ हिस्सा इस्तेमाल करके नया कम्पोस्ट बैच तैयार किया जा सकता है।
  • मटका विधि से घर के अन्दर भी कम्पोस्ट बनाया जा सकता है।
  • गीलेपन से बचाने के लिए आप इसमें पकी इंट के छोटे-छोटे टुकड़े दाल सकते हैं, यह अतिरिक्त पानी सोख लेगा और मिश्रण को लम्बे समय तक नम बनाये रखेगा।

 

.

यदि आप कम्पोस्ट किट बकेट  खरीदना चाहते हैं तो संपर्क करें :

श्री नासिर , १११ सियागंज , इंदौर फोन : 9425319330 

आप जीत सकते हैं इस अवार्ड को और आप अपनी प्रविष्टी , फोटोग्राफ्स

और स्टोरी के साथ भेजिए हमें १५ मई २०१७ तक

ohindore@gmail.com 

 

 

.

समीर शर्मा | ओहइंदौर .कॉम 

ohindore@gmail.com 

 

वामन हरी पेठे, इंदौर

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com

ये भी तो देखो भिया !

“मैं प्रकृति के साथ हूं क्या आप भी हैं?” थीम पर वर्ल्ड इनवायरमेंट वीक – १ से ६ जून तक जिम्मी मगिलिगन सेंटर, सनावादिया इंदौर पर

Share this on WhatsApp . “प्रकृति के साथ एक सप्ताह”-जिम्मी मगिलिगन सेंटर पर 1-6th June …

error: नी भिया कापी नी करने का ...गलत बात