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जब बिन बुलाये दोस्त को याद करने पहुंचे पी नरहरि : सईद की यादें …सईद के सरोकार में ..

श्रद्धांजलि सईद 

‘सईद की याद…सईद के सरोकार..: हमसईद’

सईद की स्मृति को ज़िंदा रखने, यादों को ताज़ा रखने, खुशी-खुशी याद करने के लिए 19 मार्च 2017 को इन्दौर के प्रेस क्लब में ‘सईद की याद…सईद के सरोकार..: हमसईद’ कार्यक्रम आयोजित हुआ।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य कोरी श्रद्धान्जलि के स्थान पर सईद को ऐसे याद करना था कि उन सरोकारों को अपने भीतर फिर से जीवित महसूस करना जिन्होंने सईद को ईमानदार, विश्वसनीय एवं सबका चहेता बनाया। दुखद है कि आम लोगों के जीवन को केंद्र में रखकर पत्रकारिता करने वाले सईद का 46-47 वर्ष की आयु में पिछले वर्ष कैंसर से जूझते हुए असमय निधन हुआ। जब सईद लिवर कैंसर से जीवन की लड़ाई लड़ रहे थे तब उनके चाहने वालों और दोस्तों ने ‘हमसईद’ सहायता समूह बनाया था। 

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संवेदनशील पी नरहरि भी पहुंचे श्रद्धांजलि देने 

‘हमसईद’ कार्यक्रम में यादों के गंभीर, वैचारिक सिलसिले में मार्मिक पड़ाव तब आया जब इंदौर के पूर्व नगर निगम आयुक्त और ज़िले के वर्तमान कलेक्टर नरहरि सभा में अचानक ही पहुंचे।

उन्हें जब सईद की याद में बोलने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा- सईद से मेरा दोस्ताना था। हम हमेशा संवाद में रहे। कभी सईद याद कर लेते तो कभी मैं। मैं 2004-05 में इंदौर से गया तो सईद यहीं रहे। मैं जब दुबारा कलेक्टर बनकर आ रहा था तो उम्मीद थी कि सईद से फिर संवाद रहेगा। मुझे बहुत दुख हुआ जब पता चला कि सईद लिवर कैंसर के इलाज के लये दिल्ली हैं। नरहरि जी ने कहा कि अपने सोलह साल के करियर में यह पहला कार्यक्रम है जिसमें मैं बिना बुलाये आया हूँ। मुझे समाचारों से पता चला तो मैं यहाँ आने से खुद को रोक नहीं पाया। सईद जैसे पत्रकार निस्वार्थ पत्रकार होते हैं।

दिल्ली से शुरुआत कर भोपाल में पत्रकारिता कर चुके और इन्दौर के पत्रकारिता जगत में बहुत कम समय में ही काफ़ी लोगों का प्यार और इज्जत हासिल कर लेनेवाले, भाषा पर अच्छी पकड़ रखनेवाले, देश दुनिया से लेकर शहर-मोहल्ले की दुरुस्त जानकारी रखनेवाले, पायनियर, डेकन क्रॉनिकल, हिन्दुस्तान टाइम्स आदि में अनेक वर्षों तक जनपक्षधर, हस्तक्षेपकारी पत्रकारिता करनेवाले पत्रकार सईद खान को विगत 13 मार्च को गुज़रे हुए एक साल पूरा हुआ।

सईद सम्मान की शुरुआत 

हमें ऐसे कार्यक्रम तो करने ही चाहिए साथ ही यह भी होना चाहिए कि जब ऐसे लोग जीवित हों तो उनको साथ और सच्चे सहयोग मिले। सईद की स्मृति में इंदौर प्रेस क्लब देगा खोजी पत्रकारिता के लिए सम्मान सईद खान का परिचय देते हुए इन्दौर प्रेस क्लब के महासचिव नवनीत शुक्ला ने कहा- सईद, दोस्त, साथी पत्रकार ही नहीं हमारे लिए सलाहकार जैसे भी थे। हर हाल में किसी भी अवसर पर उनकी सलाहे हमें उबारती थीं, आगे बढने का हौसला देतीं थीं औऱ समृद्ध करतीं थीं। हमने तय किया है कि उनकी स्मृति में इंदौर प्रेस क्लब की ओर से हर वर्ष खोजी पत्रकारिता के लिए एक सम्मान दिया जाएगा। यह सम्मान प्रतिवर्ष प्रेस क्लब के वार्षिक समारोह में 9 अप्रैल को दिया जायेगा। पुरस्कार की राशि 11 हज़ार रुपये होगी।

 

सईद के भाई अकबर खान भी थे मौजूद 

सईद के भाई एवं पायनियर के पत्रकार रहे अकबर खान ने कहा- मैं इस दिन के लिए तैयार नहीं था। आप एक उम्र में आकर अपने बुज़ुर्गों के न रहने के लिए तैयार हो जाते हैं लेकिन सईद ऐसे बेवक़्त चला जाएगा, ये मैंने कभी नहीं सोचा था और आज तक भी इस पर यक़ीन कर पाना मुश्किल होता है। कभी खयाल भी नहीं आया कि उसकी याद में ऐसे बोलने का दिन आयेगा। सईद और मैं भाई, दोस्त और जोड़ीदार थे। हमारे वालिद भी लेखक थे। मुम्बई में हमारे घर में उस वक़्त देश के सबसे बड़े पत्रकारों का आना जाना लगा रहता था। बचपन से ही हम दोनों को शायद वहीं से पत्रकारिता के प्रति दिलचस्पी पैदा हुई होगी। खूब पढ़ने की हम लोगों को लत थी। सईद को हमारे वालिद से सीख मिली कि हमें आम भाषा में लिखना है, अपनी अंग्रेज़ी का प्रदर्शन करने के लिए नहीं। सईद पैदल खूब चलता था। वह सड़क से जुड़ा था। पैदल चलने के कारण सड़क के लोगों से उसका वास्ता था। वह उनके सरोकारों के बहुत करीब था। उसने तरक्की के बारे में कभी नहीं सोचा।लोग दिल्ली जाते हैं वह दिल्ली, भोपाल छोड़कर इन्दौर आ गया। उसके भीतर सरोकार इस तरह समा गये थे कि सरोकार ही सईद थे। उसके सरोकार में बच्चे, सड़क के लोग, पेड़, पानी ही थे। वह खुद को सड़क गड्ढों का, पेड़ पानी का पत्रकार कहता था। थोडे समय में ही इन्दौर और सईद एक ही हो गये थे। सईद अब हमारा ही नहीं रहा। वह आप सबका हो गया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार, स्वजन एवं अलग अलग क्षेत्रों की शख्सियतें उपस्थित रहीं। उपस्थित लोगों में प्रमुख रूप से भोपाल से आईं सईद की भाभी फौज़िया, प्रेस क्लब इंदौर के अध्यक्ष अरविन्द तिवारी, पूर्व अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, अजय लागू, सुलभा लागू, सारिका श्रीवास्तव, रुद्रपाल यादव, प्रमोद बागड़ी, संजय वर्मा, कैलाश गोठानिया, कल्पना मेहता, कविता जड़िया, अनुराधा तिवारी, हसन भाई, जावेद आलम आदि उपस्थित थे। प्रलेसं, इप्टा, सन्दर्भ, रूपांकन, इन्दौर प्रेस क्लब एवं मेहनतकश के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में रूपांकन इंदौर की ओर से अशोक दुबे द्वारा पत्रकारिता पर केंद्रित पोस्टर प्रदर्शनी भी लगायी गयी। इस कार्यक्रम का संचालन विनीत तिवारी ने किया।.

वामन हरी पेठे, इंदौर

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Founder and Editor, www.ohindore.com

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