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इन्दोरी भिया की मेराथान कथा – इन्दोरी बोल में भिया की बात – संजय पटेल की कलम से

 

इन्दोरी भिया की मेराथान

 

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भिया यूं तो सूरजवंशी हैं यानी सूरजदेव के अगाध श्रध्दा रखते हैं और उनके प्रकट हो जाने के बाद ही बिस्तर छोड़ते हैं लेकिन इंदौर मेराथान की हवा चलते ही भिया ने घनघोर निच्चय कर लिया कि हम भी दौड़ेंगे।

मंडली को ताकीद किया कि अपन को फूटी कोठी रोड पे दौड़ने की पिरेक्टिस करना हेगी तो छर्रों के मूं में पानी आ गया। भिया बोले, कोई जलवा पूजन का न्योता आ गया क्या ?… एक मूंग का भजिया बोला, भिया दौड़ने के बाद गुरु के पोए और जलेबी तो पक्की हो गई न !

भिया ने समर्थन में मुंडी हिलाई और बोले, कल सुबेपेली साढ़े पांच बजे राणा प्रताप इश्टेचू पे मिलो……इसके पेले भिया टीआई जाकर नाईकी के जूते, चड्डी और टी शर्ट भी खरीद लाए। झक्कास कपड़े पेन के गले में मेराथान का लेबल लगाया और भाभीजी से मोबाइल पे फोटू हेड़ के वाट्सएप्प के तमाम गुरूप और फेसबुक पे पेल दिया।

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लोगहोन बोले, भिया आपने तो दौड़ के पेले ई फोटू चेटा दिए तो भिया गुलकंदी मुस्कान फेंकते हुए बोले, यार बाद में फोटूहोन की भीड़ हो जाएगी। हम तो एक्सक्लूसिव वाले हेंगे। मंडली भिया के जयकारे लगाने लग गई

भिया ने पूरे मोहल्ले में न्योता दे दिया कि मेराथान के दिन भिया को भव्य विदाई दी जाएगी और मुंह अंधेरे चाय-पान भी करवाया जाएगा। गली के नुक्कड पे फ्लैक्स भी लगवा दिया, जिसका नारा था अपना नेता कैसा हो, मेराथान में दौड़ने वाले जैसा हो। जब तक सूरज-चांद रहेगा, भियाजी का ऐलान रहेगा दौड़ो-दौड़ो, दौडने में भलाई..भियाजी ने सबको रोसनी दिखाई। ऐसे टाप क्लास के स्लोगन्स के साथ भिया ने मेराथान के बिल्ले के साथ फोटू खिंचाते हुए बोर्ड जगो-जगो लगवा दिए।

भियाजी मेराथान के दिन घर के बाहर आए, बई से टीका कढ़वाया, भाभीजी ने आरती उतारी, मंडली ने हार पिनाए। सारे मुरब्बों ने नारा बुलंद किया, भियाजी की जयकार, दौड़ने को इंदौर तियार

भियाजी तो क्या दौड़े, जनसंपर्क बुलंद कर लिया। हवा बना दी कि भिया शहर के हर काम में अगुआई करते हैं। मेराथान से चहल-कदमी करते भिया घर आए और गोदड़े पे ऐसे चौड़े हुए कि अब भगवान ही जानता कि सूर्योदय कब होगा।

 

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संजय पटेल 

संजय पटेल जी , इंदौर में अपने लेखन, सम्वाद , मन्च सञ्चालन और भाषा विज्ञान के लिए जाने जाते हैं | मालवी भाषा के जानकार हैं और नई प्रतिभाओं की सहायता के लिए हमेशा आगे रहते हैं | वे अपनी एक एड एजेंसी भी चलाते है| संजय जी की अनुमति से यह लेख हमारी पोर्टल पर पब्लिश हो पाया , उनका बहुत बहुत आभार . पोस्ट फोटोग्राफ के लिए मेरे अभिन्न मित्र श्री अंसार अहमद जी और राजकुमार वतनानी जी का  आभार जिन्होंने भी सहज ही अनुमति दी |

समीर शर्मा | ओहइंदौर .कॉम | www.ohindore.com

 

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वामन हरी पेठे, इंदौर

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