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इसरो – १०४ नॉटआउट …अन्तरिक्ष विज्ञान में भारत के इसरो ने बनाया रिकॉर्ड १०४ सैटेलाईट एक साथ सफलतापूर्वक भेजे

समीर शर्मा  | #इसरो #सैटेलाईट #रिकॉर्ड | इंदौर 

 

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने एक साथ 104 सैटेलाइट्स को लाँच करके नया इतिहास रचा है.

एक अंतरिक्ष अभियान में इससे पहले इतने उपग्रह एक साथ नहीं छोड़े गए हैं. इसरो का अपना रिकॉर्ड एक अभियान में 20 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने का है. इसरो ने ये कारनामा 2016 में किया था.

इससे पहले अब तक किसी एक अभियान में सबसे ज़्यादा उपग्रह भेजने का विश्व रिकॉर्ड रूस के नाम था, जिसने 2014 में एक अभियान में 37 उपग्रहों को भेजने का काम किया था.

 

इस अभियान में भेजे गए 104 उपग्रहों में से तीन भारत के हैं. जबकि बाक़ी के 101 सैटेलाइट्स इसराइल, कज़ाख़्स्तान, नीदरलैंड, स्विटज़रलैंड और अमरीका के हैं.

इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए इसरो के चेयरमैन एएस किरण कुमार ने मीडिया से कहा, “इनमें से एक उपग्रह का वजन 730 किग्रा का है, जब बाक़ी के दो का वजन 19-19 किग्रा है. इनके अलावा हमारे पास 600 किग्रा और वजन भेजने की क्षमता थी, इसलिए हमने 101 दूसरे सैटेलाइटों को भी लाँच करने का फ़ैसला लिया.”

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रिकॉर्ड के अलावा ये भी होगा

किरण कुमार ने इस पूरे अभियान पर होने वाले खर्च का ब्यौरा तो नहीं बताया लेकिन ये स्पष्ट किया कि मिशन का आधा खर्च विदेशी सैटेलाइटों को भेजने से आ रहा है. हालांकि अनुमान है कि इसरो को विदेशी सैटेलाइटों से 100 करोड़ रूपये से ज़्यादा की आमदनी हुई है.

वरिष्ठ विज्ञान पत्रकार पल्लव बागला ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “ये महज रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं किया जा रहा है, बल्कि ये भारतीय अंतरिक्ष अभियान के साथ इसरो का कामर्शियल पहल भी है. मुश्किल काम है इसलिए दुनिया भर की नज़र इस पर टिकी है.”

सैटेलाइट लॉँच- भारत की मोटी कमाई का ज़रिया

जिन देशों के सैटेलाइट्स को इसरो ने लाँच किया है, उनमें अमरीका और इसराइली सैटेलाइट भी शामिल हैं, जो ये बता रहे हैं कि सैटेलाइट प्रक्षेपण के बाज़ार में भारत बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा है.

दरअसल पिछले कुछ सालों में भारत अंतरिक्ष प्रक्षेपण के बाज़ार में भरोसेमंद प्लेयर बनकर उभरा है. बीते कुछ सालों में भारत ने दुनिया के 21 देशों के 79 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया है, जिसमें गूगल और एयरबस जैसी बड़ी कंपनियों के सैटेलाइट शामिल रहे हैं.

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एक साथ ही 104 सैटेलाइट्स को भेजने के बाद इस बाज़ार में भारत की जगह और मज़बूत होगी. इसकी सबसे बड़ी वजह तो यही है कि अमरीका की तुलना में भारत से किसी सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने का खर्चा करीब 60-65 फ़ीसदी कम होता है, मोटे तौर पर महज एक तिहाई खर्च में भारत किसी का सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज सकता है.

चीन से भारत की होड़

भारत में उपलब्ध सस्ता श्रम के अलावा कम लागत की वजह इसरो का सरकारी तंत्र होना भी है. हालांकि भारत को इस सस्ते बाज़ार में भी चीन से होड़ लेनी पड़ रही है, क्योंकि चीन भी सस्ते दर पर अंतरिक्ष में उपग्रहों को भेजने के लिए बड़ा बाज़ार है.

पल्लव बागला के मुताबिक भारत इस बाज़ार में चीन को तभी चुनौती दे पाएगा जब वह बड़े बड़े सैटेलाइटों को प्रक्षेपित करेगा.

बागला कहते हैं, “अंतरिक्ष के कार्मिशयल लांचर का जो बाज़ार है उसमें छोटे सैटेलाइट का हिस्सा बहुत कम है, बड़े सैटेलाइट को भेजने से ज़्यादा पैसा आता है.”

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इसके अलावा चीन अपने अंतरिक्ष अभियान पर भारत की तुलना में ढाई गुना ज्यादा पैसा खर्च कर रहा है और उसके पास सैटेलाइटों को लाँच करने की क्षमता भी चार गुना ज़्यादा है.

मौजूदा स्थिति में भारत में हर साल में पांच सैटेलाइट अभियान लाँच कर सकता है जबकि चीन की क्षमता 20 अभियान लाँच करने की है. बावजूद इस अंतर के अंतरिक्ष बाज़ार में भारत और चीन की होड़ को जानकर उसी तरह से देख रहें जिस तरह की होड़ कभी अमरीका और सोवियत रूस में हुआ करती थी.

बहरहाल, भारत जिस तरह से 104 उपग्रहों को एक साथ भेजने की कोशिश कर रहा है उससे प्राइवेट प्लेयरों में भी उम्मीद पैदा की है. बेंगलुरू स्थित टीम इंडस को भरोसा है कि मौजूदा वातावरण का उसे फ़ायदा मिलेगा. टीम इंड्स चंद्रमा पर सैटेलाइट भेजने वाली पहली निजी कंपनी बनने के लिए प्रयास कर रही है.

 

इस मौके पर आइए जानते हैं इसरो से जुड़ी कुछ खास बातें…

1. इसरो की स्थापना 1969 में स्वतंत्रता दिवस के दिन हुई थी. इसके संस्थापक डॉ. विक्रम साराभाई थे.

2. एसएलवी-3 भारत का पहला स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल था. इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम थे.

3. इसरो कम खर्च में काम करता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसरो का 40 साल का खर्च नासा के छह महीने के खर्च के बराबर है.

4. भारत में इसरो के विभिन्न शहरों में 13 सेंटर हैं.

5. इसरो के मार्स मिशन को सबसे सस्ता बताया जाता है. अब तक इस पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.

6. भारत पहला ऐसा देश है जिसने इसरो की मदद से पहले ही प्रयास में मार्स तक पहुंचने में कामयाबी हासिल कर ली.

7. कहा जाता है कि इसरो एक ऐसा ऑर्गेनाइजेशन है जिसमें सबसे अधिक बैचलर काम करते हैं.

8. इसरो ने अब तक 23 पीएसएलवी सैटेलाइट लॉन्च किया है.

9. इसरो ने 65 भारतीय सैटेलाइट के साथ-साथ 29 विदेशी सैटेलाइट की लॉन्चिंग भी की है.

10. इसरो का फेसबुक पेज भी है. यहां इसरो से जुड़ी जानकारी लगातार अपडेट की जाती है. पेज के करीब 13 लाख फॉलोअर्स हैं.

 

 

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Founder and Editor, www.ohindore.com