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जगजीत सिंह जन्मदिन विशेष: तुमको देखा तो ये ख्याल आया…

समीर शर्मा | इंदौर | जगजीतसिंह

हर एक के दिल की आवाज़ – जगजीत सिंह 

 

मेहदी हसन, गुलाम अली, बेगम अख्तर जैसे दिग्गज गजल गायकों की आवाज हर दिल अजीज की आवाज तो थी, लेकिन ये आवाजें कभी भी आम आदमी की जिंदगी में उस तरह से दखलअंदाजी नहीं कर पाई, उसके दुखों और दर्द के लिए संगीत का मरहम नहीं बन पाई, जो आवाज जगजीत सिंह की बनी.

 

जगजीत सिंह जन्मदिन विशेष: तुमको देखा तो ये ख्याल आया...

 

यकीनन जगजीत सिंह गजल गायिकी की परंपरा में एक ऐसा नाम है और ऐसी आवाज है जिसने न केवल गजल को बदल दिया, उसके संगीत को बदल दिया, बल्कि उसकी साज और संगीत दोनों को बदल दिया. बदलाव की ये बयार गजल के क्षेत्र में ऐसी थी कि 70 से 80 के दशक में जगजीत सिंह की आवाज गजल का पर्याय बन गई.

आज 8 फरवरी को ही जगजीत का जन्म हुआ था. 1941 को राजस्थान के गंगानगर में जगजीत पैदा हुए थे. पहले उनका नाम जगमोहन था, लेकिन पिता के कहने पर उन्होंने अपना नाम बदल लिया.

 

ग़ज़ल को आम आदमी तक पहुंचाया 

गजीत सिंह ने ग़ज़लों को जब फ़िल्मी गानों की तरह गाना शुरू किया तो आम आदमी ने ग़ज़ल में दिलचस्पी दिखानी शुरू की लेकिन ग़ज़ल के जानकारों की भौहें टेढ़ी हो गई।

ये वो दौर था जब गजल उस्तादों की परंपरा और तबले और पेटी के साथ महज कुछ साजों के बीच चंद लोगों की महफिलों का हिस्सा थी और ख़ासकर ग़ज़ल की दुनिया में जो मयार बेग़म अख़्तर, कुन्दनलाल सहगल, तलत महमूद, मेहदी हसन जैसों का था। उससे हटकर जगजीत सिंह की शैली शुद्धतावादियों को रास नहीं आई।

दरअसल यह वह दौर था जब आम आदमी ने जगजीत सिंह, पंकज उधास सरीखे गायकों को सुनकर ही ग़ज़ल में दिल लगाना शुरू किया था। दूसरी तरफ़ परंपरागत गायकी के शौकीनों को शास्त्रीयता से हटकर नए गायकों के ये प्रयोग चुभ रहे थे। आरोप लगाया गया कि जगजीत सिंह ने ग़ज़ल की प्योरटी और मूड के साथ छेड़खानी की। लेकिन जगजीत सिंह अपनी सफ़ाई में हमेशा कहते रहे हैं कि उन्होंने प्रस्तुति में थोड़े बदलाव ज़रूर किए हैं लेकिन लफ़्ज़ों से छेड़छाड़ बहुत कम किया है। बेशतर मौक़ों पर ग़ज़ल के कुछ भारी-भरकम शेरों को हटाकर इसे छह से सात मिनट तक समेट लिया और संगीत में डबल बास, गिटार, पिआनो का चलन शुरू किया।

 

 

बचपन से उन्हें संगीत का शौक था, उन्होंने उस्ताद जमाल खान और पंडित छगनलाल शर्मा से संगीत की शिक्षा ली थी.

खालिस उर्दू जाननेवालों की मिल्कियत समझी जाने वाली, नवाबों-रक्कासाओं की दुनिया में झनकती और शायरों की महफिलों में वाह-वाह की दाद पर इतराती गजलों को आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को दिया जाना हो तो जगजीत सिंह का ही नाम जुबां पर आता है.

उनकी गजलों ने न सिर्फ उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो-शायरी की समझ में इजाफा किया बल्कि ग़ालिब, मीर, मजाज, जोश और फिराक जैसे शायरों से भी उनका परिचय कराया.

1965 में बॉलीवुड में सिंगर बनने की तमन्ना लेकर जगजीत मायानगरी मुंबई पहुंचे. करियर के शुरुआत में जगजीत विज्ञापन फिल्मों में जिंगल गाया करते थे. इसी दौरान उनकी मुलाकात चित्रा से हुई और दोनों ने शादी कर ली. उसके बाद दोनों ने एक साथ कई एलबम में गाने गाए, उनकी जादूई आवाज लोगों के दिलों में उतर आई. जगजीत ने कई फिल्मों के लिए भी गाने गाए.

2003 में उन्हें भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया. 10 अक्टूबर, 2011 में जगजीत सिंह इस दुनिया को छोड़कर चले गए, लेकिन उनकी आवाज आज भी जिंदा है.

 

जगजीतसिंह जी के सभी प्रशंसकों को उनका जन्मदिन मुबारक 

चिट्ठी न कोई सन्देश , जाने वो कौन से देस , जहाँ तुम चले गए 

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