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कैलाश मानसरोवर यात्रा : 2017 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू , सम्पूर्ण जानकारी इस यात्रा की “चलो कैलाश “

समीर शर्मा | कैलाश मानसरोवर | यात्रा | इंदौर

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यात्रा : कैलाश मानसरोवर 

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हर शिवभक्त की इच्छा रहती है कि वह जीवन में एक बार उस स्थान की यात्रा कर आये जो भगवान् शिव का घर माना जाता है , यानि कि कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील …

आज आपको इसी अद्भुत और एतिहासिक/ पौराणिक महत्व वाली श्रद्धा से भरी यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ | सभी तथ्य संकलन विभिन्न आधिकारिक सूचना तंत्र से लिए गए हैं और सही हैं |  विश्वास कीजिये ये २०-२५ दिन आपके जीवन के दर्शन को बदल देंगे | ऐसे २ यात्रिओं से संस्मरण सुनने के बाद ही इस लेख  को लिखने का मन हुआ |

 

सबसे पहले यह जान लें कि शिवशंकर का यह निवास भारत में नहीं अपितु चीन / चाईना में आता है , यह भारत के आधिपत्य में नहीं है | 

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क्या-क्या है यहाँ पर ?

कैलाश पर्वत

कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है। इसके पश्चिम तथा दक्षिण में मानसरोवर तथा राक्षसताल झील हैं।

यहां से कई महत्वपूर्ण नदियां निकलतीं हैं – ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलुज इत्यादि। हिन्दू धर्म में इसे पवित्र माना गया है।  इस क्षेत्र को स्वंभू कहा गया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप के चारों और पहले समुद्र होता था। इसके रशिया से टकराने से हिमालय का निर्माण हुआ। 

 

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कैलाश पर्वत Img Credits Firkee.in

 

मानसरोवर झील

यह मीठे पानी की  झील लगभग 320 वर्ग किलोमाटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके उत्तर में कैलाश पर्वत तथा पश्चिम मे राक्षसताल है। यह समुद्रतल से लगभग 4556 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसकी परिमिति लगभग 88 किलोमीटर है और औसत गहराई 90 मीटर। 
हिन्दू धर्म में इसे पवित्र माना गया है। इसके दर्शन के लिए हज़ारों लोग प्रतिवर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा में भाग लेते है। हिन्दू विचारधारा के अनुसार यह झील सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा के मन में उत्पन्न हुआ था। संस्कृत शब्द मानसरोवर, मानस तथा सरोवर को मिल कर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है – मन का सरोवर। यहां देवी सती के शरीर का दांया हाथ गिरा था। इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उसका रूप मानकर पूजा जाता है। यहां शक्तिपीठ है।

बौद्ध धर्म में भी इसे पवित्र माना गया है। एसा कहा जाता है कि रानी माया को भगवान बुद्ध की पहचान यहीं हुई थी। जैन धर्म तथा तिब्बत के स्थानीय बोनपा लोग भी इसे पवित्र मानते हैं। इस झील के तट पर कई मठ भी हैं।

 

 राक्षस ताल 

राक्षस ताल लगभग 225 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, 84 किलोमीटर परिधि तथा 150 फुट गहरे में फैला है। इस झील के तट राक्षसों के राजा रावण ने यहां पर शिव की आराधना की थी। इसलिए इसे राक्षस ताल या रावणहृद भी कहते हैं। एक छोटी नदी गंगा-चू दोनों झीलों को जोड़ती है।

मानसरोवर से अंतर : 
राक्षसताल के बारे में यह आस्था है कि इसे रावण से सम्बन्धित है, जिस कारणवश इसे रावणताल भी कहते हैं। जहाँ मानसरोवर का पानी मीठा है, वहाँ राक्षसताल का खारा है। मानसरोवर में मछलियों और जलीय पौधों की भरमार है जबकि राक्षसताल के खारे पानी में यह नहीं पनप पाते। स्थानीय तिब्बती लोग इसके पानी को विषैला मानते हैं।

मानसरोवर गोल है और इसे सूरज का और दिन की रोशनी का प्रतीक माना जाता है जबकि राक्षसताल के आकार की तुलना अर्धचंद्र से की जाती है और इसे रात्रि का और अंधेरे का प्रतीक माना जाता है|

 

कैसे और कब जा सकते हैं ? 

यह कि यहाँ जाने के दो तरीके हैं , पहला सरकारी यात्रा जो भारत सरकार का विदेश मंत्रालय आयोजित करता है , दूसरा निजी टूर्स और ट्रेवल्स इसे ऑपरेट करते हैं | मैं आपको भारत सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली पूओंत: वैधानिक , सुरक्षित और सुनियोजित यात्रा के बारे में ही बता रहा हूँ | निजी यात्रा के लिए आप हमसे सीधे संपर्क करें | 

जो यात्रा भारत सरकार द्वारा सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के साथ आयोजित होती है वह २४ या २१ दिन की होती है , इसमें बीमा, भोजन, बस, स्वस्थ्य , सुरक्षा आदि के बेहतरीन इन्तेजामात किये जाते हैं , और यह विदेश मंत्रालय द्वार प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर के दौरान दो अलग-अलग मार्गों- लिपुलेख दर्रा (उत्तराखण्ड), और नाथु-ला दर्रा (सिक्किम) से इस यात्रा का आयोजन होता है। 

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रजिस्ट्रेशन / पंजीकरण (सिर्फ ऑनलाइन ही होता है )

.इसके लिए रजिस्ट्रेशन / पंजीकरण आरम्भ हो गए है ,और हाँ इसका रजिस्ट्रेशन सिर्फ ऑनलाइन ही होता है |

जिसमे फॉर्म भरने के बाद लॉटरी चयन द्वारा आपका सिलेक्शन किया जाता है|  इस हेतु अंतिम तिथि 15/03/2017  है | 

रजिस्ट्रेशन लिंक 

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 योग्यता और यात्रा से संबन्धित शर्तों का विवरण / जानकारी ध्यान से पढ़ें। यहां क्लिक करे

ऑनलाइन आवेदन करने से पूर्व इस साईट पर दिए हुए हर लिंक को पढ़ लें यह हिंदी और इंग्लिश दोनों में उपलब्द्ध है |

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यात्रा महत्व 

भगवान शिव के निवास के रूप में हिन्दुओं के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ यह जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी धार्मिक महत्व रखता है।

यह यात्रा उन पात्र भारतीय नागरिकों के लिए खुली है जो वैध भारतीय पासपोर्टधारक हों और धार्मिक प्रयोजन से कैलाश मानसरोवर जाना चाहते हैं। विदेश मंत्रालय यात्रियों को किसी भी प्रकार की आर्थिक इमदाद अथवा वित्तीय सहायता प्रदान नहीं करता।

कौन जा सकता है ? 

  • तीर्थयात्री भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  • उसके पास चालू वर्ष के 01 सितंबर को कम से कम 6 महीने की शेष वैधता अवधि वाला भारतीय पासपोर्ट होना चाहिए|
  • उसकी आयु चालू वर्ष की 01 जनवरी को कम से कम 18 और अधिक से अधिक 70 वर्ष होनी चाहिए।
  • उसका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 या उससे कम होना चाहिए।
  • धार्मिक प्रयोजनार्थ यात्रा करने के लिए उसे शारीरिक रूप से स्वस्थ और चिकित्सा की दृष्टि से उपयुक्त होना चाहिए।
  • विदेशी नागरिक आवेदन करने के पात्र नहीं हैं; अतः ओसीआई कार्डधारी पात्र नहीं हैं।

 

साथ में तीर्थयात्री इस लिंक पर लिखी सभी शर्तें पूरी करता हो :

 

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खर्च कितना होगा ?

सबसे महत्वपूर्ण योग्यता और प्रश्न , कितना खर्च होता है ? तो साहब जान लीजिये कि दो रास्तों में से एक का चयन आप कर लें यह रहे दो विकल्प 

मार्ग 1:

लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड)- 

मार्ग का मानचित्र देखने के लिए-क्लिक करें
जत्थों की संख्या : 18
यात्रा अवधि : लगभग 24 दिन
प्रति व्यक्ति अनुमानित व्यय : 1.6 लाख रुपये
प्रत्येक बैच का यात्रा कार्यक्रम विवरणक्लिक करें 

मार्ग 2:

नाथुला दर्रा (सिक्किम)-
मार्ग का मानचित्र देखने के लिए-क्लिक करें
जत्थों की संख्या : 08
यात्रा अवधि : लगभग 21 दिन
प्रति व्यक्ति अनुमानित व्यय : 2 लाख रुपये
प्रत्येक बैच का यात्रा कार्यक्रम विवरणक्लिक करें 

 

अब आप निर्णय लें और रजिस्ट्रेशन करवा लें 

रजिस्ट्रेशन लिंक 

register-now

विशेष ध्यान रखने की बातें : 

अस्वीकरण:

इस मंत्रालय ने इस यात्रा के आयोजन के लिए किसी अन्य गैर-सरकारी संगठन, स्वैच्छिक संगठन अथवा व्यक्ति को किसी भी प्रयोजन के लिए अथवा किसी भी तरीके से शामिल नहीं किया है।

ऐसे संगठन अथवा व्यक्ति द्वारा संयोजन का कोई दावा उनका अपना है और विदेश मंत्रालय का इस संबंध में कोई दायित्व नहीं है।

परामर्श/ सुझाव :

इस यात्रा में प्रतिकूल हालात, अत्यंत खराब मौसम में ऊबड़-खाबड़ भू-भाग से होते हुए 19,500 फुट तक की चढ़ाई चढ़नी होती है और यह उन लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है जो शारीरिक और चिकित्सा की दृष्टि से तंदुरुस्त नहीं हैं।

यात्रा कार्यक्रम अंतिम है और उसमें शामिल स्थानों की यात्रा किसी भी समय स्थानीय हालात के अधीन  है।

भारत सरकार किसी भी प्राकृतिक आपदा के कारण अथवा किसी भी अन्य कारण से किसी यात्री की मृत्यु अथवा उसके जख्मी होने अथवा उसकी संपत्ति के खोने अथवा क्षतिग्रस्त होने के लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होगी।

तीर्थयात्री यह यात्रा पूरी तरह से अपनी इच्छा शक्ति के बल पर तथा खर्च, जोखिम और परिणामों से अवगत होकर करते हैं।

अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य 

किसी तीर्थयात्री की सीमा पार मृत्यु हो जाने पर सरकार की उसके पार्थिव शरीर को दाह-संस्कार के लिए भारत लाने की किसी तरह की बाध्यता नहीं होगी। अतः मृत्यु के मामले में चीन में पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के लिए सभी तीर्थ यात्रियों को एक सहमति प्रपत्र पर हस्ताक्षर करना होता है। 

 

 

सहयोगी संस्थाएं :

यह यात्रा उत्तराखंड, दिल्ली और सिक्किम राज्य की सरकारों और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के सहयोग से आयोजित की जाती है।

कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) और सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) तथा उनके संबद्ध संगठन भारत में यात्रियों के हर जत्थे के लिए सम्भारगत सहायता और सुविधाएं मुहैया कराते हैं।

दिल्ली हार्ट एवं लंग इंस्टीट्यूट (डीएचएलआई) इस यात्रा के लिए आवेदकों के स्वास्थ्य स्तरों के निर्धारण के लिए चिकित्सा जाँच करता है।

महत्वपूर्ण फॉर्म्स की डाउनलोड लिंक 

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फॉर्म डाउनलोड करें:

●  अंत्येष्टि के लिए सहमति पत्र  Click here to download filePDF
●  प्रमाणीकृत क्षतिपूर्ति बांड   Click here to download filePDF  Click here to download fileWord
● वचनपत्र :आपात स्थिेति में हेलिकॉप्टर से निकासी  Click here to download filePDF

समीर शर्मा | 9755012734 

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वामन हरी पेठे, इंदौर

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com
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