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फरियाली साबूदाने की खिचडी – इंदौर में वर्ल्ड फेमस, इंदौर का अनोखा ज़ायका

समीर शर्मा | सराफा इंदौर 

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 फरियाली – साबूदाना खिचडी 

महाशिवरात्री स्पेशल 

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भिया थोड़ा नीम्बू और ऊपर से मिच्चर डाल दो , और हाँ एक दो मोटे वाले चिप्स और १ हरी मिर्ची भी |

 

१०० प्रतिशत ये आदमी एक साबूदाने खिचड़ी के ठेले या दूकान पर खड़ा होता है और लगभग हर इन्दोरी की यही डिमांड रहती है | बहुत बोलने और बहुत  खाने वाले शहर इंदौर की एक और फेमस आईटम है (खाने की ) साबूदाने की खिचड़ी |

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साबूदाने की धोकर फिर उसे पीतल के बड़े भगोने में धीमी आंच पे पानी की भाप पर उबले हुए आलू और मूंगफली के दाने  के साथ पकाया जाता है ….फिर आता है इन्दोरीकरण यानि मसालों का दौर …सेंधा नमक, काला नमक, शक्कर बुरा , अनार दाना, धनिया पत्ती , आलू का मिक्चर  और नीम्बू  निचोड़कर बनता है यह अद्भुत स्वाद जो यह पढ़ते ही कईयों के मुंह में गंगा-जमुना ला देगा ये दावा है ….मोटे आलू के चिप्स , हरी तली  हुई १ मिर्च से गार्निश पेपर की प्लेट में आई इस बेहतरीन स्वादिष्ट , पोष्टिक और कहने को फरियाली डिश से आपकी आत्मा तृप्त हो जायेगी , आप एक प्लेट और खायेंगे ये पक्का है |

 

सफेद झक्क साबूदाने की खपत में पूरे भारत में पहला नंबर है इंदौर का , सियागंज रिपोर्टर के मुताबिक़ रोजाना लगभग ५ टन से भी ज्यादा साबूदाने की खपत होती है , और शिवरात्री पे जस्ट ट्रिपल )

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कब से शुरू हुई खिचड़ी ?

फलाहार कब फरियाली हुआ और कब साबूदाने की खिचड़ी और बड़े बनाने लगे ये शोध और विवाद का विषय हो सकता है…फिर भी हमने जांच -पड़ताल (रिसर्च) किया और वो ऐसा है :

वैसे साबुदान की खिचड़ी घरों में व्रत के दौरान सदियों से बनाई जाती है पर इंदौर में लगभग ८० वर्ष पूर्व (आज़ादी के पहले ) सराफे में बद्रीलाल जोशी जी ने पहला ठेला/ दूकान प्रारम्भ की ….आज उनके पुत्र कमल किशोर व्यास बीते ३० वर्षों से इसे उसी परम्परा के साथ चला रहे हैं …..

सबसे बढ़िया स्वाद वाली खिचड़ी यहीं सराफे में मंदिर के सामने मिलती है |

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उसके बाद , सराफे में ही सांवरिया सेठ की खिचडी पापुलर है इंदौर में…सराफे में जैन मंदिर के पास सांवरिया सेठ की खिचड़ी ने इसे नयी पहचान दी है …१ रु से शुरू हुई प्लेट आज २० रु की है |

अनंतानंद, रवि अल्पाहार, शर्मा जी, जे एम् बी , और लगभग  ५०० से ज्यादा ठेलों पर ये ज़ायका मिलता है और हर एक बेहद लज़ीज़….

कुछ और तथ्य : 

१) इस उपवासी आईटम को गैर उपवासी जनता ज्यादा खाती है |

२) ५ क्विंटल साबूदाना खिचड़ी रोजाना २-५ भिया लोगों के जन्मदिन और भंडारे पे यूँ ही मतलब यूँ ही बाँट दी  जाती है | 

३) स्टूडेंट्स के लिए जंक फ़ूड से बचने और सात्विक खाने का विकल्प | 

४) ५०% इन्दोरी लोग और बच्चे इस खिचड़ी के चक्कर में ही उपवास कर लेते हैं भिया | 

५) इंदौर के नौ रत्नों में शुमार है साबूदाने की खिचड़ी …

 

इंदौर में आने  वाले मेहमानों के लिए ….

आप इंदौर आयें तो यह ज़रूर खाएं ..

समीर शर्मा | 9755012734

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com

  1. No can beat the indore…, Indore is best always….!!!!!

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