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श्रावण माह शुरू : आज से महादेव की आराधना में डूबेगा इंदौर… व्रत, मौन और संयम का सावन

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व्रत, मौन और संयम का सावन : श्रावण मास- शिव कृपा शिव को प्रसन्न करने का माह
सभी मासों में श्रावण मास भोले बाबा को अति प्रिय हैं |यही वजह है कि इसे सभी मासों से उत्तम कहा जाता है, यह पूरा माह ही उत्तम फलदायक होता है|
इस वर्ष श्रावण मास में चार सोमवार आयेंगे| मान्यता है कि इस माह में भगवान शिव अपने ससुराल जाने के लिए धरती पर आते हैं, इसीलिए यह माह विशेष कृपा प्रदान करने वाला है |

इस माह में पूरे शरीर , इन्द्रियों, मन , वाणी और व्यवहार का संयम और व्रत ही भोले बाबा  को प्रसन्न कर सकता है , इक बार यदि आप निर्मल हुए तो तत्काल प्रसन्न और यदि मन निर्मल नहीं तो भगवान् शिव कभी प्रसन्न नहीं …इसलिए इस माह में किसी का हृदय ना दुखाएं और इसी अभ्यास को सदैव पूरे वर्ष करते रहे …भोले आपके पास आ जायेंगे …

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शिव का प्रिय महीना
सावन माह के बारे में एक पौराणिक कथा है कि- “जब सनत कुमारों ने भगवान शिव से उन्हें सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो भगवान भोलेनाथ ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के सावन महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया” |

प्राचीन कथाओ में यह भी वर्णन है कि, श्रावण मास में ही समुद्र मंथन से निकले विष को महादेव ने अपने कंठ में धारण कर लिया ,इसी कारण से उन्हें नीलकंठेश्वेर” महादेव कहते है विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओ ने उन्हें जल अर्पित किया था जलाभिषेक की ये परम्परा बरकरार है आज भी कई शिव भक्त श्रृंगी से  दुग्ध एवं जलाभिषेक करते है |

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श्रृंगी से अभिषेक करते हुए महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी जी

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पूजन
सावन मास में भगवान शंकर की पूजा उनके परिवार के सदस्यों संग करनी चाहिए। इस माह में भगवान शिव के ‘रुद्राभिषेक’ का विशेष महत्त्व है। इसलिए इस मास में प्रत्येक दिन ‘रुद्राभिषेक’ किया जा सकता है, जबकि अन्य माह में शिववास का मुहूर्त देखना पड़ता है। भगवान शिव के रुद्राभिषेक में जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, शक्कर या चीनी, गंगाजल तथा गन्ने के रस आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक कराने के बाद बेलपत्र, शमीपत्र, कुशा तथा दूब आदि से शिवजी को प्रसन्न करते हैं। अंत में भांग, धतूरा तथा श्रीफल भोलेनाथ को भोग के रूप में चढा़या जाता है।

 

शिवलिंग पर बेलपत्र तथा शमीपत्र चढा़ने का वर्णन पुराणों में भी किया गया है। बेलपत्र भोलेनाथ को प्रसन्न करने के शिवलिंग पर चढा़या जाता है। कहा जाता है कि ‘आक’ का एक फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से सोने के दान के बराबर फल मिलता है। हज़ार आक के फूलों की अपेक्षा एक कनेर का फूल, हज़ार कनेर के फूलों को चढ़ाने की अपेक्षा एक बिल्व पत्र से दान का पुण्य मिल जाता है। हज़ार बिल्वपत्रों के बराबर एक द्रोण या गूमा फूल फलदायी होते हैं। हज़ार गूमा के बराबर एक चिचिड़ा, हज़ार चिचिड़ा के बराबर एक कुश का फूल, हज़ार कुश फूलों के बराबर एक शमी का पत्ता, हज़ार शमी के पत्तों के बराकर एक नीलकमल, हज़ार नीलकमल से ज्यादा एक धतूरा और हज़ार धतूरों से भी ज्यादा एक शमी का फूल शुभ और पुण्य देने वाला होता है।

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बेलपत्र
भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका उन्हें ‘बेलपत्र’ अर्पित करना है। बेलपत्र के पीछे भी एक पौराणिक कथा का महत्त्व है। इस कथा के अनुसार- “भील नाम का एक डाकू था। यह डाकू अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए लोगों को लूटता था। एक बार सावन माह में यह डाकू राहगीरों को लूटने के उद्देश्य से जंगल में गया और एक वृक्ष पर चढ़कर बैठ गया। एक दिन-रात पूरा बीत जाने पर भी उसे कोई शिकार नहीं मिला। जिस पेड़ पर वह डाकू छिपा था, वह बेल का पेड़ था। रात-दिन पूरा बीतने पर वह परेशान होकर बेल के पत्ते तोड़कर नीचे फेंकने लगा। उसी पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था। जो पत्ते वह डाकू तोडकर नीचे फेंख रहा था, वह अनजाने में शिवलिंग पर ही गिर रहे थे। लगातार बेल के पत्ते शिवलिंग पर गिरने से भगवान शिव प्रसन्न हुए और अचानक डाकू के सामने प्रकट हो गए और डाकू को वरदान माँगने को कहा। उस दिन से बिल्व-पत्र का महत्ता और बढ़ गया।

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विशेष
ज्यादा से ज्यादा मौन में रहें और कहा जाता है कि इस माह में शिवजी को संभव हो तो गंगा जल,शहद , दही ,विभिन फलों  का रस, कच्चा दूध,अक्षत,काले तिल, बिल्व पत्र,धतुरा,आँकडा ,शमी, दूर्वा,गोकर्ण पुष्प जो नीले व सफेद रंग के होते हे ,कनेर ,गुलाब, पारिजात, आदि | यदि आपको  अन्न का प्रशाद लगाना हो तो गुड के चूरमे का भोग भी लगा सकते हैं |

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इन फूलों से होता है श्रृंगार, इनमे हैं , पारिजात , गौ-कर्ण , कनेर और बिल्व पत्र 

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श्रावण मास में भगवान शिव को किन द्रव्यों से अभिषेक करने का लाभ 

जल -वर्षाजल ,
दुग्ध -संतान
दही – पशुधन
गन्ने का रस -धन
घी,मधु -धन लाभ
कुषा जल –शांति

इस माह में प्रभु की कृपा सभी पर बरसती है,  पूरे मन से ॐ नम: शिवाय का बारम्बार जप करे जिससे शिव सदा प्रसन्न होते है |
संसार में शिव ही ऐसे देव है जो कि मात्र बिल्व पत्र और जलाभिषेक से त्वरित प्रसन्न हो जाते है,  सच ही कहा है  “जाकी रही भावना जैसी ताको मिली प्रभु मूरत वैसी” 

 

वैसे इन्दोरियों को भोले बाबा का प्रसाद और खिचडी भी बहुत प्रिय है और इंदौर में इसकी खपत १० गुना बढ़ जाती है | 

 

 

ओम नमः शिवाय …

 

– शालिनी शर्मा

. व्रत, मौन और संयम का सावन : श्रावण मास- शिव कृपा शिव को प्रसन्न करने का माह सभी मासों में श्रावण मास भोले बाबा को अति प्रिय हैं |यही वजह है कि इसे सभी मासों से उत्तम कहा जाता है, यह पूरा माह ही उत्तम फलदायक होता है| इस वर्ष श्रावण मास में चार सोमवार आयेंगे| मान्यता है कि इस माह में भगवान शिव अपने ससुराल जाने के लिए धरती पर आते हैं, इसीलिए यह माह विशेष कृपा प्रदान करने वाला है | इस माह में पूरे शरीर , इन्द्रियों, मन , वाणी और व्यवहार का संयम और व्रत ही भोले बाबा…

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वामन हरी पेठे, इंदौर

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Founder and Editor, www.ohindore.com
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