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टिमटिम चाय, टोरी कॉर्नर और गिरि जी …| इंदौर की विरासत को सहेज कर रखने वाली चुस्की

 

टोरी कॉर्नर और गिरी जी की टिमटिम चाय 

टिमटिम चाय , गुलाबी चाय , चालू चाय , टिमटिम फुल , टिमटिम कट , गुलाबी कट जैसे नामो और वेरिएंट वाली, बेहतरीन सेकण्ड ब्लेंड से बनी , ताज़े दूध में बनी , अच्छी उकाली हुई चाय की कहानी 

इंग्लेंड की कंज़र्वेटिव पार्टी वो भी अमीरों की, पर रखा गया है नाम “टोरी” बड़ी दिलचस्प कहानी है इसको बता रहे हैं श्री शेखर गिरी जी ..चाय की ही तरह अपनी हल्की गुलाबी मुस्कान और मीठी बातों के साथ ….

शहर में खूब नाम है टिमटिम चाय , गुलाबी चाय का …. कैसे हुआ इस चाय का सफ़र शुरू .. 

१९४० की बात है …दो भाईयों बाबूलाल जी गिरी और छोटेलाल जी गिरी के कुछ व्यापार करने की ठानी, पूंजी नहीं थी, माँ ने इस स्टार्टअप को सहारा दिया, अपने जेवरात बेचकर रु २७ ( सत्ताईस रुपये) इकठ्ठा हुए और शंकर-विजय पान भण्डार की शुरुआत हुई| जो आज भी कायम है|

१ पैसे के ४ पान आते थे और रोजाना २ टोकनी पान की खपत , एक टोकनी में २५००पान …

 

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श्री शेखर गिरिजी , “इस शहर को टिमटिम देनेवाले “

ये सारी कहानी बताने के बड़े ही रोचक तरीके और एक्सप्रेशंस हैं गिरिजी के , उनकी आँखों की चमक उस स्वर्णिम दौर के वैभव को बताने पूरी तरह कामयाब थी |

 

खैर १९४७ तक आते आते ये पान की दुकान अड्डा बन गई इंदौर के प्रमुख लोगों के आने जाने , राजनीतिक चर्चा और ट्रेंड सेटिंग्स का |

यहीं से शुरू हुआ चाय की दुकान का सफ़र , १९४७ में डाल डी गई “औंकार-विजय चाय स्टाल”, ६ पैसे की चाय चीनी  के कप-बशी में और १० पैसे के पोहे चीनी  की प्लेट में |

वर्ण व्यवस्था का दौर भी देखा है गिरी जी  की दुकान ने और अब समाजवाद भी, जब हर वर्ग के लोग दुकान के अन्दर बैठ कर चाय पीते हैं | अब चाय की पुरातन दुकानें बहुत कम बची हैं जिनमे बैठकर सम्मान के साथ चाय और पानी परोसा जाये , अब तो महंगे कैफ़े ही ऐसी सुविधा देते हैं |

 

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मुकेश जी , ३३ वर्षों से यहाँ पर से सेवायें दे रहे हैं

बड़े बड़े “इन्दोरी भिया लोग” , राजनेता शाम होते ही यहाँ जमा हो जाते थे और चाय की चुस्कियों के साथ यहाँ पर अच्छी बहस होती , बहस याने संवाद , लड़ाई नहीं , मतभेद नहीं , गिरीजी  की चाय ने लोगो को जोड़ा ही है एकता ही बनी है भेदभाव् नही |

आज इसे संभाल रहें हैं श्री शेखर गिरी जी, बड़े ही मधुर स्वभाव के , शांत और पूरे ६ दशकों को अपने में समेटे सारी कहानियों और किस्सों को बड़े ही अपनेपन से सुनाते हैं,  उन्होंने आगे बताया कि सबसे पहले चालू चाय आई , फिर “डेढया” (१-१/२ चाय) आई जो की जापानी कप में परोसी जाती थे पर होती चालू चाय थी और फिर आई कांग्रेसी भपका चाय …

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ताज़ा टिमटिम और गुलाबी – इन मेकिंग

इसी बीच गंगाप्रसाद तिवारी जी दद्दू (पुराने इन्दोरी ) के एक दिन कहा की “यार गिरी तुम लोग(गिरी बंधू) बड़े “टोरी” किस्म के हो” और जब पूछा गया कि टोरी मतलब क्या तो पता लगा कि “टोरी” ब्रिटेन की एक कंज़र्वेटिव अमीर पार्टी है जो है बहुत अमीर पर कोई उसका प्रभाव ज्यादा नहीं |

यही से नाम हुआ इस चौराहे का टोरी कॉर्नर जो अब जग-प्रसिद्द है, यही से होली के उत्सव की शुरुआत की गई इन्ही मित्रों द्वारा और आज यह इवेंट रंगपंचमी के रूप म पूरे मालवा की पहचान है | गेर टोरी कॉर्नर से ही शुरू होती हैं और राजबाड़ा पर ख़तम |  

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टिम टिम के दीवाने , रोजाना के ग्राहक

फिर शुरू हुआ चाय को उम्दा बनाने का काम , कीमते बढ़ रहीं थी और धंधा भी चलाना था तो एक दोस्त की सलाह पर इन्होने चाय का स्टेट खरीदना शुरू किया , सेकण्ड ब्लेंड की (उत्तम क्वालिटी) चाय खरीदी  जाने लगी  साल भर के लिए और टिमटिम , गुलाबी चाय का जन्म हुआ |

आज भी इंदौर की सबसे बेहतरीन चाय यहीं मिलती है  

यहाँ के पोहे , टिमटिम चाय , सुपर चाय के शौक़ीन देश – विदेश में हैं|

यहाँ चाय पीने वालों में अटलबिहारी वाजपेई , बाबूलाल पाटोदी, लालाराम आर्य, जनसंघी, कांग्रेसी, समाजवादी हर कोई है | यहाँ पर प्रभुपाद स्वामी (इस्कॉन के संस्थापक ), शर्मा बंधू (मुजफ्फर नगर वाले ) लगभग हर नेता, कलाकार और वी आई पी  आ चुके हैं |

यहाँ आने वाले ग्रुप्स में ये भी होता था कि  “यदि कोई चाय पीते पीते अपना कप/ गिलास नीचे रख देता था तो पूरे ग्रुप के चाय की कीमत उसी से वसूली जाती थी”

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टिमटिम – चाय की रानी

चाय बड़ी ही अच्छी , कलरफुल और बढ़िया होती है , एक बार ज़रूर जाएँ अपने परिवार और बच्चों को लेकर और इंदौर की इस सबसे पुरानी चाय के मज़े लें , आप ज़रूर खुश होंगे और बार बार आयेंगे ये गारंटी है |

इस पीढी को इस शहर की संस्कृति से परिचित करवाएं ….गिरी जी की का वाकई में जवाब नहीं …निराली टिमटिम चाय और मस्त बातें , ये ही तो इंदौर है …

टिम टिम चाय है इंदौर की १ नंबर चाय …. ज़रूर जाएँ और उन्हें बताएं की आप उन्हें अब इन्टरनेट के माध्यम से जानते भी हैं …..

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समीर शर्मा | फाउंडर, www.ohindore.com

वामन हरी पेठे, इंदौर

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com
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