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इंदौर के रावण : इंदौर का दशहरा और व्यवहार

आईये आज देखे इंदौर में कैसे कैसे रावण बने हैं और क्या क्या  होता है एक टिपिकल इन्दोरी दशहरे में ..

सबसे पहले इन्दोरी दशहरे का वर्णन :

इन्दोरी व्यक्ति एक रात पहले से ही सोच लेता है कि गेंदे के फूल , मिठाई , सोना पत्ती (शमी की पत्ती), गिलकी , बेसन का कया करना है | अगर बच्चे हैं तो उन्हें कौन सा रावण मारने और दिखाने ले के जाना है | और हाँ बासी दशहरा जो ज्यादा महत्वपुर्ण है इन्दोरियों के लिए , उसपे, कहाँ कहाँ जाना है धोक देने के लिए.

हर घर में सुबह से ही गाडी-घोड़ों (इंदौर में व्हीकल्स को ये ही बोला जाता है ) कार , बुलेट, बस , रिक्शा को खूब धो-पोछ कर चमकाया जाता है यहाँ तक की टायर भी रगड़ रगड़ कर धो लेते हैं, आलसी स्टूडेंट्स भी अपनी अपनी गाड़ियाँ , साईकल धो डालते हैं |

उसके बाद बनते हैं गिलकी के भजिये , बंटते हैं शमी के पत्ते , इत्रदानी से महके हुए लोग बड़ों के पैर छूकर और दोस्तों के गले लगकर बधाई देंते हैं | बासी दशहरा पे मिलने -जुलने का कार्यक्रम और खाना-पीना | 

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गिलकी के भजिये
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शमी के पत्ते , सोना पाती

 

 

 

 

 

 

 

 

 

फिर हर घर में दरवाजे पर गेंदे के फूल की माला अलग अलग शेप और डिजाईन में टांगी जाती है , कुछ लोगों के पास शस्त्र और मशीने हैं उनकी भी पूजा की जाती है | इतर से महका के सौंफ -सुपारी के साथ खान पान की समाप्ति होती है | 

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Saunf Supari
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Itradani
Genda-Phool
Genda Phool
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Vahan-Aayudh Pooja

 

 

 

 

 

 

विशेष खाना , कड़क कपडे और शाम को रावण दहन …..जीपीओ , दशहरा मैदान , किला मैदान , तिलकनगर , यशवंत क्लब , मालवा मिल, विजयनगर, छावनी और छोटे रावण गली गली में … फूंक दिए जाते हैं | ये हैं कुछ रावण के पुतले जो दशहरे पे जलाए जायेंगे …

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Chhavnee Ushaganj
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Chiman bagh
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Indrapuri
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Rambagh

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तो ऐसा है भिया इन्दोरी दशेरा माफ़ करना दशहरा …… 

वामन हरी पेठे, इंदौर

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Founder and Editor, www.ohindore.com
error: नी भिया कापी नी करने का ...गलत बात