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इंदौर के 10 शर्मनाक ये मुद्दे …इसीलिए स्मार्ट सिटी नहीं बन पायेगा इंदौर

इंदौर शहर के १० बड़े धब्बे – इंदौर के लिए शर्म का सबब बने ये मुद्दे

१) बी आर टी एस
बी आर टी एस , बिना प्लान और गलतियों से  भरपूर इस प्रोजेक्ट को लेकर शहर का हर नागरिक परेशान सा और शिकायत करता हुआ मिलता है|

पहले शहर खोद दिया , फिर जगह जगह पर असमान चौडाई वाले रोड्स , यात्रियों के पहुँचाने का कोई मार्ग नहीं , सड़क को क्रॉस करके ही टैफिक के बीच से जाना पड़ता है आई बस तक , कोई फूट ओवर ब्रिज नहीं , सिग्नल की वायरिंग्स तक डालना भूल गए और उस पर बसेस भी ज़रुरत से कम | इसकी रैलिंग्स ने कितने ही नागरिकों की जान ली है| कई बी आर टी एस स्टेशंस पर खुलेआम बाईक्स आ जा रही हैं , लोगों के डिवाईडर्स तोड़ दिए हैं | सिर्फ चारों और एडवरटाइजिंग के लिए होर्डिंग्स से पटा हुआ है | बारिश में यह हाल हुआ था बी आर टी एस का …

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यह शहरवासियों के साथ एक बड़ा मज़ाक है , ४०% रोड्स सिर्फ ४० बसों के लिए , ये शायद न्याय नहीं  है और इसके पैसे भी हम नागरिकों के लगे हैं|

२) नेताओं के होर्डिंग्स
जगह जगह फ्लेक्स बैनर्स से पता हुआ शहर , ना तो बिल्डिंग्स ना ही पेड़ और यहाँ तक की रास्ता बताने वाले गेंट्रीज़ पर भी हर पार्टी चाहे कांग्रेस हो या बी जे पी सभी ने अघोषित कब्ज़ा कर रखा है | दादा दयालु हों या कैलाश विजयवर्गीय , सिंधिया या पटेल, एन एस यु आई तथा  अ. भा. वि. प. सब के सब यहां तक की गुंडे भी अपन बैनर जगह जगह पर लगा रहें हैं | किसी सांसद या विधायक ने आज तक यह शुरुआत नहीं की की मेरे इंदौर को स्वच्छ बनाने के लिए मै होर्डिंग्स को सिर्फ निर्धारित जगहों पर ही लगाऊँगा अन्यंत्र कही नहीं | ट्रैफिक डिवाईडर , स्कूल्स की दीवारें , बस, लाईट पोल्स पर अव्यवस्थित ढंग से लगे इन पोस्टर्स , बैनर्स ने इंदौर की सुन्दरता को धब्बा लगाया है|
जरूरत है एक सत्तासीन नायक की जो यह संकल्प
ले और पूरा करे |

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३) केसर बाग़ ब्रिज – 8 Yrs

आई डी ए , नगर निगम का मास्टर ब्लंडर है केसर बाग़ ब्रिज , दशक होने आया एक पुल नहीं बना सके हमारे प्रशासनिक प्लानर्स , जन प्रतिनिधि और संस्थाएं |
सभी न्यूज़ पेपर्स में रोजाना आने वाले इस मुद्दे ने इंदौर पर कामचोरी और भ्रस्ताचार का तिलक लगाया है , जनता त्रस्त और दुखी है और असहाय भी | १० सालों से भी ज्यादा से बी जे पी की सरकार निगम और प्रदेश में है पर कुछ भी नहीं हो रहा | इंदौर की जनता अब जवाब नहीं शायद आइना ही दिखा देगी इन्हें | इस शर्मनाक काण्ड में  कांट्रेक्टर , आई डी ए और नगर निगम साथ में विधायक ,सांसद और प्रदेश की सरकार सभी दोषी हैं |

ये पुल डिजाईन में भी गलत बना है और इसके दोनों सिरों में कोई मेल नहीं | इंदौर की जनता को एक गैर राजनैतिक और सामाजिक आन्दोलन की आवश्यकता है |

केसरबाग रेलवे ओवरब्रिज को लेकर जो आशंका थी, अंतत: वही हुआ। आईडीए ने पुल बनाने वाली कॉन्ट्रेक्टर कंपनी अरविंद टेक्नो का ठेका निरस्त कर दिया। फैसला मंगलवार को लिया, लेकिन यह अब सामने आया। ब्रिज के मामले में हाई कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई में ठेका निरस्ती पर भी बहस हुई, जहां से कॉन्ट्रेक्टर को स्टे नहीं मिला।

 

४) कचरा
कचरा समस्या ने इंदौर को एक गंदे शहर के रूप में  काफी आगे ला दिया है | हर कॉलोनी में कचरा एक प्रमुख समस्या है | नगर निगम कचरा प्रबंधन का
जिम्मेदार ही इस कार्य में पूर्णत: फेल हो गया है |इस की प्रमुख वजह पार्षदों के साथ साथ निगम कर्मियों की कामचोरी और भष्टाचार है | इन पर किसी एजेंसी का निरिक्षण ना होना और जनता का आन्दोलन ना करना भी एक कारक है |

डोर टू  डोर कचरा उठाने  का काम लेने वाली एजेंसी ने २ साल तक खूब पैसे वूले और काम कुछ नहीं किया | जनता भी कचरे के डब्बे क अन्दर नहीं आस पास कचरा डालती है | पार्षदों को चाहिए की वार्डवार समितियां बना कर इस समस्या को धीरे धीर कम करें |

५) ट्रेफिक सेन्स

यह शहर कभी नहीं रुकता , ट्रैफिक की लाल बत्ती  पर भी नहीं …….इंदौर के नागरिकों की एक बड़ी समस्या जिसके जिम्मेदार वे स्वयं है व है ट्रैफिक सेन्स |
लाल रंग की बत्ती होते ही न रुकना और टैफिक जाम कर देना इन्दोरियों की आदत में शुमार है | ३० लाख की जनसँख्या पर सिर्फ ३१० ट्रेफिक जवान हैं |यदि हम ट्रैफिक नियमो का पालन करें तो इस समस्या से ८०% निजात पाया जा सकता है |  इंदौर के लोग ट्रैफिक रूल्स तोड़ने के साथ बाद में गुस्सा और झगड़ा भी कर लेते हैं | हमें सुधारना होगा अन्यथा परिणाम गंभीरतम होंगे | कई बार परिवार के साथ जाते हुए बड़ी ही खराब स्थिति का सामना करना पड़ता है और रविवार को तो इंदौर में कार लेकर जाना किसी आर्मी मिशन की तरह ही है | मेरा एक मित्र कहता है की इंदौर में “रेड इस न्यू ग्रीन ”

६) गुटखा और पान की पीक
कार , बाईक और बस से थूकते लोग , मल्टीयों के कोने और चौराहों पर थूकना बड़ा ही गलत है पर इंदौर में यह बहुत हो रहा है | मना करने पर लोगो का गुस्सा फूट पड़ता है और झगडे की नौबत आ जाती है , ये एक ऐसी समस्या है जिसमें प्रशासन और नेताओं का कोई दोष नहीं | हमें ही सुधारना है , स्मार्ट सिटी बनाने के लिए हम कुछ आदतों को सुधारना होगा | पान- गुटखा खाना है आप खाएं बस उसे जगह जगह थूक कर शहर को गंदा न करें |

७) अतिक्रमण
नेताओं के संरक्षण से अतिक्रमण ने इस शहर के विकास को अवरुद्ध करने में बड़ी भूमिका निभाई है | भला हो नए नगर निगम कमिश्नर, कलेक्टर और पोलिस कप्तान की तिकड़ी का जो की लगे हुयें है इन्हें हटाने में बड़ी ही मुस्तैदी से …
उदाहरण के लिए , साउथ तुकोगंज स्थित एक ट्रेवल संचालक अपनी बसों के अतिक्रमण से कई कलेक्टर और एस पी का तबादला करवा चुका है पर अपनी बसों को वह सर्विस रोड के पैवर्स पर ही पार्क करता है और ट्रैफिक पोलिस उसे सहयोग…
धर्म के नाम पर , नेताओ के संरक्षण से , गुंडागर्दी से कई लोगो ने शहर के विकास को बाधित किया है | हद तो तब हुई जब हमने एक महिलाओं के एन जी ओ के बाहर गुंडों द्वारा अतिक्रमण देखा और बार बार शिकायत करने पर भी बरली संस्था विजयनगर रसोमा के पीछे स्थित ये अतिक्रमण बढ़ाते ही जा रहे हैं |

८) नेताओं की रैलीयां
नेताओं की रैलियां हर शहर में निकलती हैं पर चापलूस नेताओं के चलते इंदौर में आये दिन रैलियां और उनसे परेशान होता इन्दोरी एक सच्चाई बन गए हैं| पोलिस और प्रशासन लाचारी से देखते रहते हैं | धर्म, बरात और रेलियों के लिए यदि कोई नियमावली बन जाए तो यह समस्या हल हो सकती है पर अभी तक कोई नेता , धार्मिक गुरु या समाजसेवी इस हेतु हल या सुझाव लेकर नहीं आया है |
९) हॉर्न बजाना

शायद हॉर्न बजाये बिना इन्दोरियों की गाडी चल ही नहीं सकती , लाल बत्ती सिग्नल पर पीछे से हॉर्न बजाना , बेवजह हॉर्न बजाते हुए ड्राइविंग आम बात है | देश के टॉप १० होंकिंग सिटिज़ में इंदौर का नाम है |
ये आदत भी इन्दोरियों को सुधारना होगी | यहाँ हॉर्न दुर्भाग्य से मीन्स ऑफ़ कम्युनिकेशन में आता है |

१०) पार्किंग प्लेसेस की कमी और अवैध वसूली
शहर में पार्किंग की समस्या विकराल है और गिने चुने पार्किंग प्लेसेस भी गुंडों के कब्जों में हैं | राजबाड़ जैसी में जगह पर स्थित रेडीमेड बाज़ार के पार्किंग स्थल पर अवैध वसूली , कोठारी मार्किट पर अवैध वसूली सालों से जारी है |

इंदौर के लोगों , नेताओं और अफसरों को समझना होगा की स्मार्ट सिटी रोड, इंटरनेट और बिल्डिंग्स से नहीं बल्कि स्मार्ट सिटीजंस से बनती है |

फेसबुक पर  इसे शेअर ज़रूर करें और अपनी प्रतिकिया भी ज़रूर दें | 

       टीम ओह इंदौर  – ohindore@gmail.com 

वामन हरी पेठे, इंदौर

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com

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