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फिर से मिटटी के गणेश – ईकोफ्रेंडली गणेशोत्सव

“ग्रीन गणेशा – मिटटी के गणेश ” – एक निवेदन ओह इंदौर टीम का शहरवासीयों  से

ओह इंदौर . कॉम और इंदौर के शहरवासी इस बार मिलकर इस बार “माटी के गणेश – ग्रीन गणेशा केम्पेन ” को आग बढ़ा रहें हैं ,  शहरवासी यहाँ पर आकर अपनी इको-फ्रेंडली गणेश जी की मूर्ती स्थापित करें और उन्हें विसर्जित भी अपने ही घर पर करें ताकि २-३ दिन में मिटटी गल जाए और गमले या बागीचे में ही आपके गणेश आपके साथ सुख, प्रेम और समृद्धि रूप में बस जाएँ .

पहला प्रयास और निवेदन ये है कि आप मिट्टी की मूर्तियां ही स्थापित करें। छोटी हो तो सोने पर सुहागा। क्योंकि मिट्टी की मूर्तियां ही सबसे शुभ और फलदायी होती हैं। शास्त्रों, विद्वानों का कहना है कि मूर्तियां पृथ्वी तत्व यानी मिट्टी की ही होनी चाहिए। प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की नहीं।

दूसरा निवेदन ये है कि आप मिट्टी की मूर्ति की स्थापना कर लें और जब विसर्जन का समय आए तो उसे तालाब में विसर्जित करने के बजाय घर में ही साफ पात्र लें, उसमें शुद्ध पानी भरें और मूर्ति का विसर्जन करें। घुली हुई मिट्टी को अपने घर में ही तुलसी या अन्य पौधे में डाल दें। गणेशजी पौधे के रूप में हमेशा घर में रहेंगे। जो अत्यंत शुभ होगा।

मूर्ति छोटी होगी तो ज्यादा आसानी से घुल सकेगी। विसर्जन के अवसर पर आपका पूरा परिवार साथ रहेगा और ऐसा करके आप बहुत बड़ा सामाजिक सरोकार भी करेंगे। होता यह है कि पीओपी की बड़ी-बड़ी मूर्तियां तालाबों, जलाशयों में विसर्जित की जाती हैं। ये महीनों पानी में वैसी की वैसी रहती हैं। घुलती नहीं। पानी सूख जाता है और हमारे आराध्य गणेशजी की मूर्ति वहीं रह जाती है जो कि उनका अपमान है।

इस हेतु कई जगहों पर  ग्रीन गणेशा वर्कशॉप भी आयोजित किया जा रहा है |आशा है आप सभी शहरवासी इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेंगे |

ध्यान रखें :

१) मूर्ती छोटी हो (४-६ इंच तक की )

२) हाउसिंग सोसाईटी और मल्टीज़  में मिलजुल कर एक ही मूर्ती की स्थापना हो |

३) विसर्जन भी वहीं  पर हो |

४) साथियों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को प्रेरित करें इस ईको फ्रेंडली अभियान में भाग लेने हेतु |

इंदौर में यह ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं :

विजिट करें इस वेबसाईट पर  http://matiganesh.com/ (इंदौर के युवाओं का सराहनीय प्रयास )

Team www.ohindore.com

 

वामन हरी पेठे, इंदौर

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Founder and Editor, www.ohindore.com
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