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बहाई धर्म के अवतारों का जयंती उत्सव – महात्मा बाब और बहाउल्लाह का जन्मदिवस

बहाई धर्म के अवतारों का जयंती उत्सव:

बहाई धर्म, उन्नीसवीं सदी के ईरान में 186३  में स्थापित एक नया धर्म है जो एकेश्वरवाद और विश्वभर के विभिन्न धर्मों और पंथों की एकमात्र आधारशिला पर ज़ोर देता है।

इसकी स्थापना बहाउल्लाह ने की थी और इसके मतों के मुताबिक दुनिया के सभी मानव धर्मों का एक ही मूल है। इसके अनुसार ईश्वर ने मानवजाति के पास ’दिव्य शिक्षकों’ की एक श्रृंखला भेजी है – जो ईश्वर के अवतारों के रूप में जाने जाते हैं – जिनकी शिक्षाओं ने सभ्यता के विकास के लिये आधारभूमि प्रदान की है। इन अवतारों में शामिल हैं अब्राहम, कृष्ण, ज़रथुस्त्र , मूसा, बुद्ध, ईसा, मुहम्मद, बाब और अब बहाउल्लाह ।

बहाउल्लाह को कल्कि अवतार के रूप में माना जाता है, जो सम्पूर्ण विश्व को एक करने हेतु आएं है और जिनका उद्देश्य और सन्देश है ” समस्त पृथ्वी एक देश है और मानवजाति इसकी नागरिक” ।

ईश्वर एक है और समय- समय पर मानवजाति को शिक्षित करने हेतु वह पृथ्वी पर अपने अवतारों को भेजते हैं।इन अवतारों में नवीनतम हैं बहाउल्लाह जिन्होंने कहा है कि दुनिया के सभी धर्म एक ही ‘स्रोत’ से आये हैं और सार रूप में ईश्वर की ओर से आये एक ही धर्म के क्रमबद्ध अध्याय हैं।

बहाई मंदिर , नई दिल्ली , भारत

 

भारत सहित पूरी दुनिया के बहाई धर्म अनुयायी अपने धर्म संस्थापक और इस युग के अवतार द्वय  “महात्मा बाब” और “बहाउल्लाह” जन्मदिवस मनाएंगे ..

बहाई धर्म का आरम्भ ईश्वर द्वारा दो दिव्य संदेशवाहकों को दिये गये मिशन के साथ हुआ। ये संदेशवाहक थे बाब और बहाउल्लाह

बहाई धर्म की विशिष्ट एकता जो उन्होंने स्थापित की वह आज बहाउल्लाह द्वारा दिये गये स्पष्ट आदेशों से फूटी शाखा है, जिसने ‘उनके’ स्वर्गारोहण के बाद भी मार्गनिर्देश की निरन्तरता का आश्वासन दिया है।

 

क्या है बहाई धर्म ?

श्री गीता से चौथे अध्याय में प्रभु का वचन 

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।।7।।

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ।।8।।

बहाई धर्म सन १८६३ में ईरान में “बहाउल्लाह” की इस घोषणा के साथ प्रारम्भ हुआ जिसमे उन्होंने स्वयं को इस युग का अवतार घोषित किया | उन्होंने कहा की मैं श्रीराम , श्री कृष्ण, ह. मुहम्मद, ईसा मसीह, जरथुस्त्र, बुद्ध सभी की वापसी हूँ |

मैं , ईश्वर की संविदा (करार ) के अनुसार “जब-जब धर्म की हानि होगी , मैं  वापस आउंगा” को पूरा करने आया हूँ , जिसके प्रमाण श्री मद् भागवत गीता, पवित्र कुरआन , पवित्र बाइबिल में मिल जायेंगे |

बहाउल्लाह ने यह घोषणा की कि : “मैं अब इस संसार में वसुधैव कुटुम्बकम स्थापित करने आया हूँ “| मैं ही वह कल्कि हूँ जिसकी प्रतीक्षा हिन्दू, वह शाह बहराम हूँ जिसे पारसी , वह मिर्जा मेहदी हूँ जिसे मुस्लिम और वह पञ्चम बुद्धा मैत्री अमिताभा हूँ जिसकी प्रतीक्षा कलियुग में सदियों से की जा रही है |

बहाई धर्म के अनुयायी बहाउल्लाह को इस युग का अवतार मानते हैं और महात्मा बाब को उनका अग्रदूत जो उनकी अगवानी और सूचना के लिए इस धरती पर प्रकट हुए थे | आज बहाई धर्म पूरे विश्व में विस्तार के लिहाज़ से सबसे अधिक फैले हुए धर्मो में से एक है |

जैसा कि सूरदास जी ने भी संकेत दिया था, कि कब उनके प्रभु पुन: आयेंगे :

मन तैं काहे ना धीर धरे , मन तैं काहे ना धीर धरे !
एक सहस्त्र नौ सौ के ऊपर ऐसा योग पड़े , सहस वर्ष लौ सतयुग बीते धर्म की बेल बढें !
स्वर्ण फूल फूलें धरती पर जग की दशा फिरे , सूरदास कह हरी की लीला टारे नाहिं तारे मन तैं धीरज काहे ना धरे …….

-( एक सहस्त्र नौ सो यानि  विक्रम संवत १९०० के बाद )

बाब » एक परिचय (1819-1850)

महात्मा बाब का समाधिस्थल – हैफा , इस्राईल

महात्मा “बाब” बहाई धर्म के अग्रदूत हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में उन्होंने घोषणा की कि वह एक ऐसे संदेश के संवाहक हैं जो मानवजाति के आध्यात्मिक जीवन में परिवर्तन को नियत करेगा। उनका मिशन अपने से भी महानतर ईश्वर के संदेशवाहक के आने के लिये मार्ग प्रशस्त करना था, जो शांति और न्याय के युग का आरम्भ करेंगे।

बाब का शाब्दिक अर्थ है “द्वार” उन्होंने कलियुग के इस स्वर्ण युग के द्वार को खोला और धरती पर लोगों को उस सर्व्महान अवतार के आने की सूचना डी यह कहकर ” वह जिसे ईश्वर प्रकट करेगा जल्द ही तुम्हारे बीच आने वाला है “

महात्मा बाब द्विजदयाल अवतार के पहले अवतार थे जिनका जन्म २० अक्टूबर १८१९ को शिराज़ में हुआ था | उनका आगमन विश्वअवतार के लिए इस मानवजाति को तैयार करना था |

बहाउल्लाह »  एक परिचय (1817-1892)

बहाउल्लाह-“ईश्वर की महिमा” – वह प्रतिज्ञापित अवतार हैं, जिनके अवतरण की पूर्वघोषणा बाब और पहले के सभी दिव्य संदेशवाहकों ने की थी। बहाउल्लाह ने ईश्वर का एक नया प्रकटीकरण मानवजाति को दिया। उनकी लेखनी से हज़ारों पद्य, पत्र और पुस्तकें प्रवाहित हुईं। अपने पावन लेखों में उन्होंने एक विश्व-सभ्यता की रूपरेखा प्रस्तुत की, जो मानव-जीवन के दोनों आयामों – आध्यात्मिक और भौतिक – का विवरण प्रस्तुत करते हैं। इसके लिये उन्होंने 40 साल की कैद, यंत्रणा और निष्कासन की पीड़ा सही।

बहाउल्लाह का जन्म ईरान में नूर प्रांत के धार्मिक नेता और वजीर के यहाँ १२ नवम्बर १८१७ को हुआ था | वे बचपन से ही अपने शहर में प्रसिद्द हो गए अपने आध्यात्मिक ज्ञान से अपने शिक्षकों सहित आध्यात्मिक गुरु भी  हतप्रभ रह गए | १८६३ में उन्होंने अपने अवतार होने की घोषणा की जिससे ईरान की मुस्लिम सरकार राजशाही   मुल्ला वर्ग नाराज़ हुआ और उन्हें लगभग ४० वर्षों तक कारावास में रहना पडा और फिर देश निकाल दे दिया गया |

बहाउल्लाह ने इस्लामिक कट्टर पंथे मुल्ला वादी समाज में सन १८६३ में स्त्री पुरुष की समानता, सभी के लिए शिक्षा , न्याय और ईश्वर भक्ति की बाते कहीं तो पूरे ईरान में एक क्रान्ति आ गई | पूरा समाज बहाउल्लाह के साथ हो लिए और ईरान सरकार उनके खिलाफ | वे उन्हें कभी मार नहीं पाए क्यूंकि उनकी लोकप्रियता और आध्यात्मिक असर ने पूरे ईरान को हिला कर रख दिया था |

बहाउल्लाह को फिर देश निकाल दिया गया और अपने अंतिम दिनों में वे हैफा, इस्राईल में रहे | उनकी समाधी बहजी ,हैफा , इस्राईल में स्थित है |

जयंती समारोह 

  बहाई धर्म के अनुयायी जो कि पूरे विश्व में शांति, एकता और आध्यात्मिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं पूरे हर्षौल्लास से इस पर्व को मनाएंगे | बहाई समुदाय को इस पावन पर्व की बधाईयाँ | इंदौर में भी , विजयनगर  में स्थित बहाई भवन पर इसका आयोजन किया गया है १ नवम्बर शाम ६ बजे से | 

 

 

 

 

 

बहाई धर्म के अवतारों का जयंती उत्सव: बहाई धर्म, उन्नीसवीं सदी के ईरान में 186३  में स्थापित एक नया धर्म है जो एकेश्वरवाद और विश्वभर के विभिन्न धर्मों और पंथों की एकमात्र आधारशिला पर ज़ोर देता है। इसकी स्थापना बहाउल्लाह ने की थी और इसके मतों के मुताबिक दुनिया के सभी मानव धर्मों का एक ही मूल है। इसके अनुसार ईश्वर ने मानवजाति के पास ’दिव्य शिक्षकों’ की एक श्रृंखला भेजी है - जो ईश्वर के अवतारों के रूप में जाने जाते हैं - जिनकी शिक्षाओं ने सभ्यता के विकास के लिये आधारभूमि प्रदान की है। इन अवतारों में शामिल…

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