Breaking News
Home / Culture / कहानी दाल-बाटी की – मालवा और राजस्थान के सबसे मशहूर पकवान और पहचान की

कहानी दाल-बाटी की – मालवा और राजस्थान के सबसे मशहूर पकवान और पहचान की

दाल-बाटी-चूरमा 

DSC01406

 

दाल बाटी (Daal – Bati) जितना राजस्थान में पसंद किया जाता है, उतना ही इंदौर-मालवा के इलाके में भी पसंद किया जाता है.

जब भी कभी छुट्टी हो, घर में मेहमान हों, और आप गप शप में दिन बिता रहे हों तो दाल बाटी (Daal Baati)  या दाल बाफला (Dal Bafla)  बनाईये. इसे बनाते समय आप बीच बीच में अपनी गप शप भी करते रहिये.  आपको इन्हें बनाते समय बातचीत के लिये भरपूर समय मिलेगा और आप स्पेशल खाना भी तैयार कर सकेंगे.

मालवा के दाल-बाटी और दाल – बाफले इतने प्रसिद्द हैं की इन्हें खाने के लिए लोग देश – विदेश से आते हैं | दाल बाफले के खाने के बाद व्यक्ति आनन्दमयी  हो जाता है और पानी पी पीकर नींद के आगोश में चला जाता है|

 

इंदौर | Indore City portal | Indore Food | Indori

 

दाल-बाटी  खाना एक पूरे दिन का कार्यक्रम है और जीवन भर न भूल पाने वाला अनुभव |

 

मालवा में रतलाम , उज्जैन , इंदौर , शाजापुर , महिदपुर, आगर मालवा , धार , खंडवा फेमस हैं इनके लिए |

बाकी पूरा राजस्थान तो है ही ….

.
bafla1

 

 

किसने बनाई सबसे पहले दाल बाटी ?

इतिहास में देखें तो पता चलता है कि मेवाड़ रियासत के संस्थापक बप्पा रावल के ज़माने में इस जायके का उल्लेख मिलेगा | गहलोत (गुहिल ) वंश के ज़माने में यह युद्ध के समय का आधिकारिक खाना हुआ करता था | 

 

 

बप्पा रावल के सैनिक जब युद्ध के लिए जाते थे तो सुबह निकलते वक्त गर्म रेत में आटे  की बड़ी बड़ी गोलियां यानि की बाटियां रेत में गाड़ कर चले जाते थे और जब शाम को आते थे तो रेत की गर्मी में दिनभर सिकी बाटियाँ तेयार मिलती थी जिसे चटनी , दाल के साथ खाया जाता था | 

.

 

बाटी और बाफला – फ़र्क ?

 

बाटी और बाफले में एक ही फर्क है की बाटी कंडों/ अवन पे सेंकी जाती है और बाफले उबाल कर कंडों पे  सेंके जाते हैं , जब बाफले घी में नहाकर पत्तल / थाली तक पहुँचते है तो खाने वाले को स्वर्गिक आनद की अनुभूति होती है और उसका पेट तो भर जाता है पर मन नही |

 

bafle
घी में तर बाफले

 

मालवा के दाल-बाटी और दाल – बाफले लड्डू और हरी चटनी के साथ खाए जाते हैं | लड्डू और चूरमा अगर ना खाय तो साब यह भोजन पूरा नहीं होता | इसके बाद १-२ बाल्टी पानी पीना और ३-४ घंटे की योगनिद्रा अति आवश्यक नहीं अटल ही होती है |

लोग पिकनिक पर भी इस विशेष पकवान  को बनवाते हैं |

4305336097_a7fce6ab15_z

खैर अब आते हैं असली बात पर , इंदौर में कहा खा सकते हैं ये सब 🙂

तो जनाब इंदौर में कुच्छ जगह फेमस हैं मालवा के दाल-बाटी और दाल – बाफले खाने के लिए :-

  • १) नखराली ढाणी
  • २) चोखी ढाणी
  • ३) राजहंस भोजनालय सराफा बाज़ार
  • ४) बस स्टेंड के ढाबे
  • ५) अनंतानद भोजनालय
  • ६) अपना स्वीट्स

 

वैसे बाफले शादी, सगाई, विशेष मौकों , पिकनिक या मेहमानों के आने पे

बनाकर खाने का मज़ा अद्भुत है …

Sameer Sharma | 9755012834 

 

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


*