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माँ की लोरी – हर एक के बचपन का सबसे सुनहरा क्षण …

चंदामामा दूर के,  पुए पकाये गूड़ के   …..आई न याद …ये है आपकी ज़िन्दगी की सबसे पहली म्यूजिकल  प्लेलिस्ट जो आप कभी नहीं भूलेंगे ….लोरियां 

लोरी , जब भी आप यह “जादुई” शब्द सुनेंगे तो ये हीओ नहीं सकता की आप अपने बचपन में ना चले जाएँ ,या अपने बच्चों के बचपन में ….

ये एक ऐसी खुशबु  है जो परदेस में भी माँ के हाथ के लगाए “छौंक”  की याद  दिला देती है और आपको उसी क्षण यादों में खींच ले जाती है ….

लिटिलरेडबॉक्स.इन   हिंदी में लिखा जाने वाली रचनाओं का एक बेहतरीन ब्लॉग है,  और हमारे पोर्टल का एक नायाब हिस्सा …पेश है लोरी पर एक शानदार प्रस्तुति लिटिल रेड बॉक्स से …

-समीर शर्मा | एडिटर , ओहइंदौर.कॉम 

 

प्यारी लोरी,

तुम्हारे नाम में ही कितना सुकून, कितना प्यार घुला हुआ है, आखिर तुम्हारा रिश्ता सीधे माँ से जो जुड़ा हुआ है.

 

बचपन की बात तो सबको याद है न! दिन भर उधम करके, सबकी नाक में दम करके, जब रात में माँ की गोद में सर रखते तो ऐसा लगता जैसे दुनिया की सबसे आरामदायक जगह पर पहुँच गए हों…जहाँ कोई डर नहीं, चिंता नहीं, सिर्फ प्यार है.

 

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बालों में लाड से हाथ फिराती, हलकी-हलकी थपकियों से हमें सुलाती माँ, और चेहरे पर शरारती हँसी लिए सोने का नाटक करते हम…क्या कोई भूल सकता है वो क्षण!

 

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हम सोने को तैयार नहीं, दिन भर चूल्हे-चौके में लगी माँ उसी क्षण तो हमें पूरी मिल पाती थी, ये क्षण हम खोने क्यों दें? माँ की चिंता दूसरी है, वो चाहती है कि हम जल्दी सोएं, आखिर सुबह स्कूल के लिए जल्दी भी तो उठना है. ये नटखट खेल बहुत देर तक चलता था. और फिर माँ अपनी नाज़ुक आवाज़ में लोरी गाना शुरू करती थी…

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मक्खन-मलाई जैसी वो लोरियां. सीधे-सच्चे शब्द, भोली-भाली धुन, और माँ की शहद जैसी आवाज़, ये तीनों ऊँगली थामकर हमें नींद के गाँव की ओर ले चलते.

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लल्ला-लल्ला लोरी…चंदा मामा दूर के…रे मामा रे मामा रे…लकड़ी की काठी…नन्हीं कली सोने चली, सूरज है तू, मेरा चंदा है तू…एक से बढ़कर एक गीत जो एक ऐसी मासूम दुनिया की बात कहते जिसमें दूध-बताशों की मिठास होती, उड़न खटोले में सैर होती, कच्चे-पक्के सौदे होते, घोड़ों तक को ठण्ड लग जाती, हवाएं भी अपने हिसाब से बहतीं…

 

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गाने की रिदम पर हिलते-झूलते, झूलते-हिलते हम पता नहीं कब सपनों की दुनिया में जा पहुँचते. फिर धीरे से माँ हमारा सर नर्म तकिये पर रख देती और प्यार से माथा चूम लेती…नींद में भी वो ममता का स्पर्श महसूस होता था.

आज भी मन उन कानों में रस घोलने वाली लोरियों को और ममता के उन अद्भुत पलों को तरसता है…क्योंकि चाहे कितने भी बड़े हो जाएं, मन के अन्दर एक छोटा बच्चा अवश्य मौजूद रहता है.

  • www.littleredbox.in 

आपकी फेवरेट लोरी ज़रूर से कमेन्ट बॉक्स में लिखिए ….देखें कितनो को याद है …लोरी 🙂

 

और हाँ ये लोरी तो सुनना बनती है …..

 

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यह पोस्ट लिटिलरेडबॉक्स.इनसे साभार लिया गया है, ओहइंदौर.कॉम और लिटिलरेडबॉक्स.इन  के साझा करार के तहत अनुमति लेकर इसे प्रकाशित किया गया है | बेहतरीन हिंदी कटेंट को इंदौर के सभी लोगों तक पहुंचाने और अच्छे साहित्य को बढ़ाना ही इसका मूल उद्देश्य  है |

यह एक हिंदी ब्लॉग है जिसे श्री आरिश नांदेडकर और सुश्री अतुला गुप्ता दो मित्र और पार्टनर्स संचालित करते हैं | यह एक उम्दा हिंदी रचनाओं का ब्लॉग है, जो आपको आपके स्वर्णिम बचपन और पुरानी यादों में लेकर जाता है | 

चंदामामा दूर के,  पुए पकाये गूड़ के   .....आई न याद ...ये है आपकी ज़िन्दगी की सबसे पहली म्यूजिकल  प्लेलिस्ट जो आप कभी नहीं भूलेंगे ....लोरियां  लोरी , जब भी आप यह "जादुई" शब्द सुनेंगे तो ये हीओ नहीं सकता की आप अपने बचपन में ना चले जाएँ ,या अपने बच्चों के बचपन में .... ये एक ऐसी खुशबु  है जो परदेस में भी माँ के हाथ के लगाए "छौंक"  की याद  दिला देती है और आपको उसी क्षण यादों में खींच ले जाती है .... लिटिलरेडबॉक्स.इन   हिंदी में लिखा जाने वाली रचनाओं का एक बेहतरीन ब्लॉग है,  और हमारे पोर्टल…

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वामन हरी पेठे, इंदौर

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