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कल्कि अवतार के अग्रदूत “महात्मा बाब” का शहीदी दिवस मनाएंगे बहाई धर्म के अनुयायी …

महात्मा बाब का शहीदी दिवस 

बहाई धर्म इस युग में सबसे नवीन ईश्वरीय धर्म है , और  इसके अनुयायी बहाउल्लाह को इस युग का अवतार मानते क्यूंकि कलयुग में एक विश्व-अवतार के प्रकट होने की बात सभी धर्मों के धर्मग्रंथों जैसे श्रीमदभागवद गीता ( हिन्दू) , पवित्र कुरआन (ईस्लाम), बाईबिल (ईसाई) , अवेस्ता(ज़ोराष्ट्रीयन) , धम्मपदों (बौद्ध)   एवं अन्य सभी में की गई है |

विष्णु के दशम अवतार कल्कि , हज़रात मेहदी की वापसी, ईश्वर के पुत्र की आभा , पंचम बुद्धा मैत्री अमिताभा जैसे अनेकों नाम से विश्व “उनकी” याने सर्व्महान ईश्वर के प्रगट होने की प्रतीक्षा कर रहा है |

“यदा – यदा हि धर्मस्य , ग्लानिर्भवती भारत:, अभ्युत्थानं अधर्मस्य, तदात्मानं सृजाम्यहम”  प्रभु का आश्वासन था और इसी हेतु अनेकों देशों में संत, ज्ञानी , भक्त कलयुग के तारण हार की प्रतीक्षा कर रहे थे … तब महात्मा बाब ने अवतार लिया सिर्फ इसलिए , यह बताने को , कि व सम्राटों का सम्राट , इस धरा का सृजनहार स्वयं एक बार पुन: अवतार लेने को है अत: तुम उसके स्वागत के लिए तैयार रहो , वैसे ही जैसे एक राजा के आने की मुनादी होती है , महात्मा बाब ने  बहाउल्लाह / भर्गोदेवस्य  के आने की मुनादी की और अपने आपने का उद्देश्य पूरा किया |

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वसुधैव कुटुम्बकम

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बहाई मानते हैं की बहाउल्लाह ही कल्कि अवतार हैं जो समस्त विश्व को एक एक करने आ गए हैं | वे ही पन्चम बुद्धा, वे ही मेहदी ईमाम  , वे ही जीजस की वापसी है |

धर्म प्रगतीशील होता है , और यदि वह समय के साथ ना चले तो उसका क्षय हो जाता है , इसीलिए समय-समय पर ईशदूत आते हैं मानवजाति को शिक्षित करने हेतु |

आईये जाने कौन थे महात्मा बाब और क्यूँ मना रहे हैं, बहाई अनुयायी  उनका बलिदान दिवस  : 

बाब का अर्थ होता है “द्वार” ..

महात्मा बाब , ईरान के शिराज़ शहर में पैदा हुए थे और उन्हें अवतार के रूप में पहचानने के लिए सबसे पहले १८ लोग अलग -अलग देशों से अपने आप आये और फिर उन्होंने इन सभी १८ आध्यात्मिक आतामाओं को इस सन्देश के साथ भेजा की सब जगह उस अवतार के आने की तैयारी और खोज शुरू कर दो, क्यूंकि सर्वमहान अवतार आने ही वाले हैं | इन सभी प्रारम्भिक अनुयायियों को “जीविताक्षर” कहा गया। इनमे से एक अनुयायी जीविताक्षार भारत से भी थे जिन्हें “सईद – ए – हिन्द” की पदवी महात्मा बाब ने दी  थी |

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महात्मा बाब की इस घोषणा से पूरे पर्शिया में एक नई लहर पैदा हुई और लोग अपने ईश्वरीय अवतार के आने की खबर मात्र से रोमांचित हो कर आध्यात्मिक ग्रंथों में रूचि लेकर उनकीशिक्षाएं मानने लगे| इससे मुल्ला वर्ग भयभीत हो गया, उन्हें अपनी दुकाने बंद होती दिखी और उसके बाद वे पूर्णत: महात्मा बाब के खिलाफ हो गए और उन्हें समाप्त करने के जतन करने लगे |

२३ मई १८४४ को महात्मा बाब ने अपने स्वयं के अवतार होने की घोषणा की थी, जिससे ईरान की कट्टरपंथी मुस्लिम सरकार घबरा गई और उन्होंने महात्मा बाब को  9 जुलाई 1850 को ईरान के तबरीज़ नामक शहर में 31 साल 7 माह और 22 दिन को उम्र में ,  उनके एक अनुयायी के साथ सरेआम 750 फौजियों  ने गोलियों की बौछार कर शहीद कर दिया था।

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इतिहास गवाह है की सारे अवतारों चाहे वो श्रीकृष्ण हों या हज़रात मुहम्मद हों, ईसामसीह या श्री राम , इस दुनिया के लोगों ने इन ईशदूतों को उनके जीवन काल में कभी नही स्वीकारा और ना ही समर्थन दिया , केवल मुट्ठी भर लोग ही जो आध्यात्मिक रूप से सक्शाम थे, जिनका हृदय निर्मल था , उन्होंने उनका साथ दिया था |  

 

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बहाई मंदिर , नई दिल्ली

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बहाई अनुयायी आज के दिन महात्मा बाब के बलिदान को याद करते हुए , प्रार्थनायें करते हैं कि यह विश्व जल्द ही विश्वशान्ति और एकता की और अग्रसर हो | बहाई धर्म सभी धर्मों को एक ही ईश्वर द्वारा भेजा मानते हैं और सभी को समान मानते हुए सभी अवतारों का आदर और मान्यता देते हैं | 

 

अधिक जानकारी के लिए विजिट करें ww.bahai.org

 

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