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Ujjain Simhatha 2016 – Program

सिंहस्थ उज्जैन का महान स्नान पर्व है।

बारह वर्षों के अंतराल से यह पर्व तब मनाया जाता है जब बृहस्पति सिंह राशि पर स्थित रहता है। पवित्र क्षिप्रा नदी में पुण्य स्नान की विधियां चैत्र मास की पूर्णिमा से प्रारंभ होती हैं और पूरे मास में वैशाख पूर्णिमा के अंतिम स्नान तक भिन्न-भिन्न तिथियों में सम्पन्न होती है। उज्जैन के महापर्व के लिए पारम्परिक रूप से दस योग महत्वपूर्ण माने गए हैं।

Simhastha 2016 will begin on 22nd of April and will continue till 21st of May.

UJJAIN SIMHASTHA 2016 PROGRAM :

Main Dates Of Holy Bath
Schedule Dates

  1. First bath : Full Moon Night 22 April 2016 (Friday)
  2. Second Bath : Vaishakha Krishna Amavasya 6 May 2016 (Friday)
  3. Third Bath : Shukla Tritiya 9 May 2016 (Monday)
  4. Fourth Bath Shukla Panchami 11 May 2016 (Wednesday)
  5. Fifth Bath : Poornima 21 May 2016 (Saturday)

Nodal Nodal authorities

Mr Anil Saxena
Regional Manager

Adress: Madhya Pradesh Tourism

42, Residency Area,

Opp.Saint Paul H.S.School, Indore

Cell : 9424796830

Tel.: (+91) 731 249 9566

Fax : (+91) 0731 252 0466

Email:indore@mptourism.com

Mr. Avinash Lavaniya, IAS
Mela Adhikari

Cell : 9009100172

Email: : – commujjain@mpurban.gov.in

Temple site

Shree Mahakaleshwar Temple

Tel: (+91) 0734 255 0563

Email: : – admin@mahakaleshwar.nic.in

More Information is available on www.simhastha.com 

 

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कुंभ की कथा

पुराणों के अनुसार देवों और दानवों सहयोग से सम्पन्न समुद्र मंथन से अन्य वस्तुओं के अलावा अमृत से भरा हुआ एक कुंभ (घडा) भी निकला था। देवगण दानवों को अमृत नहीं देना चाहते थे। देवराज इंद्र के संकेत पर उनका पुत्र जयन्त जब अमृत कुंभ लेकर भागने की चेष्टा कर रहा था, तब कुछ दानवों ने उसका पीछा किया। अमृत-कुंभ के लिए स्वर्ग में बारह दिन तक संघर्ष चलता रहा और उस कुंभ से चार स्थानों पर अमृत की कुछ बूंदें गिर गईं। यह स्थान पृथ्वी पर हरिद्वार,प्रयाग, उज्जैन और नासिकथे। इन स्थानों की पवित्र नदियों को अमृत की बूंदे प्राप्त करने का श्रेय मिला। क्षिप्रा के पावन जल में अमृत-सम्पात की स्मृति में सिंहस्थ महापर्व उज्जैन में मनाया जाता है। अय स्थानों पर भी यह पर्व कुंभ-स्नान के नाम से मनाया जाता है। कुंभ के नाम से यह पर्व अधिक प्रसिध्द है।

प्रत्येक स्थान पर बारह वर्षों का क्रम एक समान हैं अमृत-कुंभ के लिए स्वर्ग की गणना से बारह दिन तक संघर्ष हुआ था जो धरती के लोगों के लिए बारह वर्ष होते हैं। प्रत्येक स्थान पर कुंभ पर्व कोफ्लिए भिन्न-भिन्न ग्रह सिषाति निश्चित है। उज्जैन के पर्व को लिए सिंह राशि पर बृहस्पति, मेष में सूर्य, तुला राशि का चंद्र आदि ग्रह-योग माने जाते हैं।

महान सांस्कृतिक परम्पराओं के साथ-साथ उज्जैन की गणना पवित्र सप्तपुरियों में की जाती है। महाकालेश्वर मंदिर और पावन क्षिप्रा ने युगों-युगों से असंख्य लोगों को उज्जैन यात्रा के लिए आकर्षित किया। सिंहस्थ महापर्व पर लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री और भिन्न-भिन्न सम्प्रदायों के साधु-संत पूरे भारत का एक संक्षिप्त रूप उज्जैन में स्थापित कर देते हैं, जिसे देख कर सहज ही यह जाना जा सकता है कि यह महान राष्ट्र किन अदृश्य प्रेरणाओं की शक्ति से एक सूत्र में बंधा हुआ है।

www.simhastha.com

Indore Ka Raja - Ganeshotsav

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