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बेटमा का ऐतिहासिक गुरुद्वारा हेरिटेज लिस्ट में …

म.प्र. का सबसे बड़ा लंगर हॉल 

धार रोड स्थित बेटमा साहिब गुरुद्वारे को सिख समाज हेरिटेज के रूप में विकसित कर रहा है। इसके तहत पहले चरण में गुरुसिंघ सभा द्वारा यहां प्रदेश में सबसे बड़ा लंगर हॉल बनवाया जा रहा है। 22 हजार स्क्वेयर फीट के इस हॉल में करीब 25 हजार लोग एक साथ लंगर छक (प्रसादी ग्रहण) सकेंगे। इसे संगत के लिए शुरू भी कर दिया गया है।

गुरुसिंघ सभा ने जीर्णोद्धार का काम शुरू किया था। पहले चरण में लंगर हॉल के साथ ही तीन मंजिला बिल्डिंग में 48 नए कमरे भी संगत के लिए बनाए गए। इसका ज्यादातर काम पूरा हो गया है। गुरुसिंघ सभा के अध्यक्ष मंजीतसिंह भाटिया रिंकू और महासचिव जसबीरसिंह गांधी ने बताया बेटमा साहिब गुरुद्वारे को हेरिटेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। 20 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण कार्य चल रहे हैं।

500 साल पहले गुरुनानक देवजी श्रीलंका से लौटते हुए आए एवं इंदौर में इमली के पेड़ के नीचे भक्तों को उपदेश दिए। वहीं जिले के बेटमा कस्बे में बावड़ी में स्नान किया व उपदेश दिए। बेटमा में गुरुसिंघ सभा इंदौर 20 करोड़ की लागत से विशाल गुरुद्वारा बना रही है, यह ग्वालियर किले स्थित गुरुद्वारे के बाद मध्यप्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा गुरुद्वारा होगा। गुरुनानक देवजी ने इंदौर, बेटमा, ओंकारेश्वर में भक्तों को उपदेश दिए थे, तीनों स्थानों पर इंदौर गुरुसिंघ सभा निर्माण व विकास कार्य करा रहा है। तीनों स्थानों में बेटमा में इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीस करोड़ की लागत से भव्य गुरुद्वारा 14 एकड़ में बनाया जा रहा है। इसकी भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरोवर में भी फिल्टर वाला पानी होगा, यानि संगत उसे पी सकेगी। 22 हजार फीट के लंगर हॉल में एक साथ दस हजार संगत लंगर छक सकेगी। एक साथ 600 यात्री विश्राम कर सकेंगे। 3 बैंक्वेट हॉल भी बनाए जा रहे हैं, साथ ही चारों ओर हजारों पेड़, पौधे, घास से हरियाली वाला वातावरण भी बनाया जा रहा है। साथ ही स्टाफ के लिए स्पेशल रूम, एक हजार वाहनों के लिए पार्किंग, 40 दुकानों का शॉपिंग कॉम्प्लेक्स आदि बन रहा है। इस योजना में लंगर हॉल एवं विश्रामालय का काम करीब पूरा हो गया है, नए स्वरूप का शत-प्रतिशत कार्य वर्ष 2016 की गुरुनानक जयंती पर होने की उम्मीद है।

गुरुद्वारे में गुरुद्वारा सिख समाज के अमृतसर, नांदेड़, पटना आदि के भव्य गुरुद्वारा पुराने होने के साथ ही अन्य विशेषताओं जैसे आकार, प्रकार, सुंदरता आदि के हिसाब से हेरिटेज श्रेणी के धर्मस्थल हैं। इसी तर्ज पर बेटमा साहिब का निर्माण भी नए तरीके से भव्यता से हो रहा है। संगत यहां गुरुद्वारा बावड़ी साहिब नामक एक ओर भव्य गुरुद्वारा बना रही है। परिक्रमा मार्ग बनाया जहां गुरुजी ने स्नान किया था, वह स्थान संगत के लिए सबसे ऊंचा है। इसलिए यहां सरोवर का निर्माण किया गया है, सरोवर में बावड़ी का पानी ही लाया जाता है। सरोवर के पास संगत के लिए परिक्रमा मार्ग भी 150 बाय 150 फीट का परिक्रमा मार्ग भी बनाया जा रहा है। 

 

वामन हरी पेठे, इंदौर

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Founder and Editor, www.ohindore.com

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