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अजहर – नई मूवी रिलीज़ – देखिये अजहर की रीयल लाइफ रील में

‘यही थी मेरी कहानी, अगर आप इसे सच मानना चाहें तो आपकी मर्जी और न मानना चाहें तो आपकी मर्जी।’ 

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की जिंदगी की घटनाओं पर आधारित यह फिल्म कुल मिला कर उनकी कमीज चमकाने का प्रयास है। फिल्म से पहले दर्शक से कहा जाता है कि अजहर के अलावा यहां सब काल्पनिक है। अन्य खिलाड़ी, कोरबारी घराने, खेल संस्था। किसी को कलंकित करने का उद्देश्य नहीं है। आप अपनी समझ जेब में रखिए।

मैच फिक्सिंग में फंसे अजहर की कहानी मोहम्मद अजहरुद्दीन की जिंदगी के सार्वजनिक तथ्यों पर आधारित है। इसमें विवाहेतर संबंध और बॉलीवुड का तड़का भी है। एक हीरोइन (नरगिस फाखरी) अजहर के दिल में उतरती है, मगर साफ कहती है कि वह शादीशुदा मर्द से दूर रहेगी। तब भी अजहर का दिल है कि मानता नहीं! उधर सुंदर-सुशील पत्नी (नौरीन) घर-परिवार-बच्चों में इतनी उलझी है कि पति को वक्त नहीं दे पा रही।

इंडियन क्रिकेट टीम के एक्स कैप्टन अजहरुद्दीन की इस बायोपिक फिल्म के लिए डायरेक्टर डिसूजा ने सिनेमा की काफी हद तक लिबर्टी लेते कुछ सीन्स को अलग नजरिए से पेश किया है। वहीं ऐसा लगता है डायरेक्टर इस कहानी को कैमरे के सामने बयां करने में काफी हद तक कन्फ्यूज भी रहे तभी तो स्टार्ट टु लॉस्ट पूरी फिल्म सिर्फ अजहर की बात उन्हीं के नजरिए से पेश करने की एक पहल लगती है। कुछ सीन्स को देखकर ऐसा भी लगता है अजहर अपने दिल की जो बात मीडिया और अपने फैंस से खुलकर नहीं कर पाए अब उसी बात को उन्होंने रील लाइफ में इस फिल्म में कह दिया है।

अजहर की शक्ल और उसके हाव-भाव बेशक हाशमी से पूरी तरह मेल न खाते हों, लेकिन उन्होंने इस किरदार को परदे पर पेश करने में काफी मेहनत की है। हाशमी जब-जब स्क्रीन पर दिखते हैं तो अच्छा लगता है। यह उनका व्यक्तित्व ही है, जो उन्हें एक खिलाड़ी से ऊपर उठाकर एक स्टार के रूप में पेश करता है। दूसरी बात ये कि सब जानते हैं कि यह फिल्म अजहरुद्दीन पर केन्द्रित है, बावजूद इसके किसी पचड़े में न पड़ते हुए या कहिये किसी पर उंगली न उठाते हुए निर्देशक ने बड़ी सफाई ये कह दिया है कि उस पूरे प्रकरण में किसकी क्या भूमिका थी। उस दौर में कौन ड्रेसिंग रूम का प्लेबॉय हुआ करता था और कौन प्रेरित करता था।

अभिनय की बात करें तो हाशमी बांधे रखते हैं। प्राची देसाई भी ठीक ठाक लगती है, लेकिन संगीत का रोल में नरगिस फखरी कुछ ज्यादा नहीं कर पायी हैं। ये फिल्म कुछ खास हिस्सों में प्रभावित करती है। कोर्ट के सीन्स प्रभावी लगते हैं। अजहर को क्लीन चिट बस यूं ही दे देना थोड़ा अखरता है। आठ साल से ज्यादा लंबे समय तक चले इस केस में वो मशक्कत-सी नहीं दिखती। इसलिए यह फिल्म इमरान हाशमी और अजहरूद्दीन के प्रशंसकों में जरूर उत्साह जगा सकती है, लेकिन उस बायोपिक की भूख को शांत नहीं करती, जिसकी आस दुनिया लगाए बैठी थी।

कलाकार: इमरान हाशमी, प्राची देसाई, नरगिस फखरी, राजेश शर्मा, लारा दत्ता, कुणाल राय कपूर
निर्देशक: टोनी डिसूजा,  निर्माता: शोभा कपूर, एकता कपूर
लेखक : रजत अरोड़ा, संगीत : प्रीतम, मो. तारिक  , रेटिंग : २.५ / ५ 

‘यही थी मेरी कहानी, अगर आप इसे सच मानना चाहें तो आपकी मर्जी और न मानना चाहें तो आपकी मर्जी।’  भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की जिंदगी की घटनाओं पर आधारित यह फिल्म कुल मिला कर उनकी कमीज चमकाने का प्रयास है। फिल्म से पहले दर्शक से कहा जाता है कि अजहर के अलावा यहां सब काल्पनिक है। अन्य खिलाड़ी, कोरबारी घराने, खेल संस्था। किसी को कलंकित करने का उद्देश्य नहीं है। आप अपनी समझ जेब में रखिए। मैच फिक्सिंग में फंसे अजहर की कहानी मोहम्मद अजहरुद्दीन की जिंदगी के सार्वजनिक तथ्यों पर आधारित है। इसमें विवाहेतर…

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वामन हरी पेठे, इंदौर

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