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जंगल बुक – बेहतरीन फिल्म , बच्चों के साथ बड़ों को भी ज़बरदस्त रोमांचक अनुभव्

ये फिल्म ज़रूर जाएँ और हाँ परीवार के साथ

वर्षों पहले रुडयार्ड कि‍पलिंग ने ‘द जंगल बुक’ लिखी थी। रुडयार्ड किपलिंग का जन्म भारत में हुआ था और संभव है कि भारत के जंगलों से प्रेरित होकर उन्हें मोगली, बघीरा जैसे पात्र सूझे हों। उनकी लिखी कहानी कालजयी है। समय की धूल का इस पर कोई असर नहीं हुआ है। आज भी यह ताजा लगती है। तकनीकी स्तर पर फिल्म लाजवाब है। ‘द जंगल बुक’ वयस्क भी देखें और अपने साथ बच्चों को भी ले जाएं। वे इस ब्लॉकबस्टर अनुभव को लंबे समय तक याद रखेंगे।

रूडयार्ड किपलिंग की मोगली की कहानियों पर आधारित डिज्नी ने एक एनिमेटेड फिल्म 1967 में बनाई थी जिसे अब एक नए रूप में डिज्नी पेश कर रहा है।

इस फिल्म में नवोदित अभिनेता नील सेठी ने मोगली का किरदार निभाया है और फिल्म में वह अकेले मानवीय कलाकार हैं बाकि अन्य सभी कलाकार कंप्यूटर ग्राफिक्स से बनाए गए हैं।

नाना पाटेकर की आवाज ने शेर खान को गजब का खौफनाक बनाया है. वे आज भी कुछ नया कर चौंका सकते हैं, यह बात ‘द जंगल बुक’ में उनकी सिर्फ आवाज की उपस्थिति जता देती है

लगभग 107 मिनट लंबी इस फिल्म का कथानक इस तरह गढ़ा गया है कि आपको सांस लेने की भी फुरसत नहीं मिलेगी। भालू ‘बालू’ की आवाज को बिल मुरे और हिंदी में इरफान खान ने सजाया है और मोगली के साथ मानवीय बस्ती तक की उसकी यात्रा पर्दे पर रोमांचक प्रतीत होती है।

जानवर बलू, बघीरा, अकडू-पकड़ू और मोती की कहानी। जंगल के विलन और राजा शेर खान की कहानी। फिल्म में यूं तो एक ही जीवंत अदाकार है मोगली। नील सेठी ने इस किरदार में जान फूंक दी है। वहीं फिल्म का एक भी किरदार आपको यह अहसास नहीं दिलाता कि फिल्म के बाकी कलाकार एनिमेटेड हैं। फिल्म को हिंदी और इंग्लिश फिल्मों के मशहूर कलाकार जैसे नानापाटेकर, बेन किंग्सले, प्रियंका चोपड़ा, ओमपुरी, बिल मरे, इदरीस एल्बा, इरफान खान इत्यादि ने अपनी आवाज दी है। जिसे पर्दे के किरदारों के रूप में सुनना मनोरंजन से भरपूर है। 

शुरू-शुरू में बघीरा की आवाज बने ओम पुरी एक बुजुर्ग आवाज होने की वजह से कम अच्छे लगते हैं लेकिन जिस तरह का प्रौढ़ मेंटर का किरदार बघीरा यहां अदा कर रहा है, उसके लिए ओम पुरी पूरी तरह सही चयन हैं, ये हमें धीरे-धीरे ही सही समझ आ ही जाता है. इरफान खान बच्चों के चहेते भालू बल्लू को आवाज देते हैं और हंसी पैदा करने के लिए उनके पात्र को जो पंजाबी लहजा दिया जाता है उसे बड़ी खूबी के साथ निभाते हैं. उनका पात्र इंटरवल के बाद थोड़ी ढीली पड़ रही फिल्म को भी थाम लेता है और अपनी कारिस्तानियों से खूब मन मोहता है. हालांकि आखिर तक हमें ये भी लगता है कि अगर इरफान बघीरा की आवाज बनते तो शायद सबसे ज्यादा जंचते.

Neel_Sethi_Mowgli_2016

खैर, नील सेठी जंगल बुक के इस नए संस्करण में बतौर मोगली नख से लेकर शिख तक जंचते हैं और आप उनकी जगह इस रोल में किसी और बाल कलाकार की कल्पना भी नहीं कर पाते हैं. उनकी स्क्रीन प्रजेंस में एक अनोखा अपनत्व है जो उनके अभिनय को निखारता भी है और हमें एक यादगार मोगली भी दे जाता है. ऐसा मोगली जो एनिमेशन से नहीं इस बार हाड़-मांस से बना है! इसपर भी गौर कीजिए कि नील सेठी को पूरी ही फिल्म में ग्रीन स्क्रीन के सामने खड़े होकर उन काल्पनिक किरदारों के साथ अभिनय करना है जो बाद में कम्प्यूटर द्वारा रचे जाएंगे. सोचिए, एक 12 वर्षीय नौसिखिए बच्चे के लिए इस तरह अभिनय करना कितना मुश्किल रहा होगा.

फिल्म : द जंगल बुक (हिंदी)

निर्देशक : जॉन फेवरू

लेखक : रुडयार्ड किपलिंग, जस्टिन मार्क्स, मयूर पुरी (हिंदी संवाद)

कलाकार : नील सेठी, नाना पाटेकर, ओम पुरी, प्रियंका चोपड़ा, इरफान खान, शेफाली शाह, बग्स भार्गव, राजेश खट्टर

रेटिंग : 4 / 5

वामन हरी पेठे, इंदौर

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Founder and Editor, www.ohindore.com
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