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बैंजो – नई मूवी …ठीक ठाक है …एक बार देख सकते हैं , नया कुच्छ नहीं ..२ स्टार रेटिंग

बैंजो – मूवी रिव्यू 

बैंजो : सिर्फ उनके लिए जिन्हें अच्छी फिल्में देखने का शौक कभी रहा ही नहीं!

कहानी 

फिल्म की कहानी मुंबई की गलियों से गुजरती है जिसमें क्रिस यानी नर्गिस फाखरी बैंजो की धुन और उसे बजाने वाले कलाकार की खोज में विदेश से मुंबई आ पहुंचती है. यह धुन उसे अनूठी लगती है और इस कलाकार के साथ मिलकर वह एक बैंड बनाना चाहती है ताकि वह एक मशहूर संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा ले सके. लेकिन इस खोज के दौरान उसके सामने कई अड़चनें आती हैं. सवाल है कि क्या क्रिस अपने मकसद में कामयाब हो पाती है. यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

 

‘बैंजो’ इस मायने में भी एक विचित्र फिल्म है कि वो रितेश देशमुख से ज्यादा अभिनय करने के मौके नरगिस को देती है, और ऐसा करने पर क्या-क्या हुआ होगा, आप भली भांति समझ सकते हैं. रितेश देशमुख लुक और आक्रोश के मामले में अपने ‘लय भारी’ वाले अवतार में नजर आते हैं लेकिन अभिनय जड़ करते हैं. ओवरएक्टिंग भी ओवर करते हैं और उनके टपोरीपन में अभिनय का ऐसा कोई नया रंग नजर नहीं आता जो हिंदी फिल्मों के मुंबई छाप सैकड़ों टपोरी किरदारों से उन्हें अलग कर सके. गाने गाते वक्त भी अभिनय सलीके से नहीं कर पाते और उन्हें यह रोल करने से पहले तेज रफ्तार गानों पर लिपसिंक करते हुए गजब का अभिनय करना रणबीर कपूर से हर हाल में सीख लेना चाहिए था. क्योंकि ‘रास्ते का संगीत’ ही जिस फिल्म की मुख्य थीम हो उसके लिए संगीत का जुनून सर चढ़कर बोलना चाहिए था, जो न रितेश देशमुख पर चढ़ता नजर आता है और न ही निर्देशक रवि जाधव और उनकी बोझिल-पुरानी-आलसी पटकथा पर.

हांलाकि बैंजो इंदौर में खाया जाता है , इसलिए शहर में इस बजाने वाले बैंजो यानि, नई मूवी को लेकर बहुत उत्साह नहीं देखा गया …


कलाकार: रितेश देशमुख, नरगिस फाखरी, धर्मेश येलंडे, आदित्य कुमार, ल्यूक केनी, मोहन कपूर


निर्देशक : रवि जाधव,  निर्माता: कृषिका लुल्ला, वाशु भगनानी
लेखक-संवाद: कपिल सावंत, रवि जाधव, निखिल मल्होत्रा , संगीत: विशाल-शेखर
गीत : अमिताभ भट्टाचार्य  
रेटिंग 2 **

बैंजो - मूवी रिव्यू  बैंजो : सिर्फ उनके लिए जिन्हें अच्छी फिल्में देखने का शौक कभी रहा ही नहीं! कहानी  फिल्म की कहानी मुंबई की गलियों से गुजरती है जिसमें क्रिस यानी नर्गिस फाखरी बैंजो की धुन और उसे बजाने वाले कलाकार की खोज में विदेश से मुंबई आ पहुंचती है. यह धुन उसे अनूठी लगती है और इस कलाकार के साथ मिलकर वह एक बैंड बनाना चाहती है ताकि वह एक मशहूर संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा ले सके. लेकिन इस खोज के दौरान उसके सामने कई अड़चनें आती हैं. सवाल है कि क्या क्रिस अपने मकसद में कामयाब हो…

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Indore Ka Raja - Ganeshotsav

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Founder and Editor, www.ohindore.com