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औरतों को सिर्फ शारीरिक उपयोग की वस्तु समझने वालों के मुह पे तमाचा है सुपरहिट मूवी “पिंक”

किसको अच्छा लगता है सर , कोई किसी को इस तरह से छुए , ज़बरदस्ती , बिना इच्छा के …

 

‘पिंक’ पुरुषवादी मानसिकता के खिलाफ यह कड़ा संदेश देती है कि यदि महिला ‘न’ कहती है तो किसी भी पुरुष को उसे छूने या जबरदस्ती करने का अधिकार नहीं है, फिर वह महिला चाहे पत्नी हो या सेक्स वर्कर।

अमिताभ बच्चन की ‘पिंक’ को फिल्म क्रिटिक्स की ओर से 4.5 और 5 स्टार तक मिले हैं |

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स्टार कास्ट- अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी, अंगद बेदी, पीयूष मिश्रा

डायरेक्टर- अनिरूद्ध रॉय चौधरी

प्रोड्यूसर- रश्मि शर्मा, शूजित सरकार

रेटिंग: **** (चार स्टार)

 

पिंकएक ऐसी फिल्म है जो हर उस शख्स को कटघरें में खड़ा करती है जिसने किसी लड़की या महिला को उसकी ड्रेस, उसके ड्रिंकया उसके देर सबेर बाहर आने जाने को देखकर कैरेक्टर सर्टिफिकेट देने की कोशिश की हो. फिल्म अपने तीखे सवालों से हर संवेदनशील मानस को झकझोरती है कि कैसे समाज में जी रहे हैं. ऐसा समाज जो किसी लड़की के साथ हुए बुरे बर्ताव के लिए उसे ही दोषी ठहराता है. जो उसके साथ हुई जो हर घटना के बाद कहता है ऐसी लड़कियों के साथ ऐसा होता है.तीन कामकाजी लडकियों की कहानी के जरिये समाज को अपने गिरेबां में झांकने के लिए मजबूर करती है, ये पाठ पढ़ाने की कोशिश करती है कि मोमबत्ती औऱ तख्तियां ले सड़क पर आंदोलन करने से पहले अपनी सोच को बदलना ज्यादा जरूरी है.  

एक महिला जब ‘NO’ या नहीं कहती है तो ये उसका अधिकार है. इसके मायने क्या हैं. बेहद दमदार तरीके से फिल्म अपने एक डायलाग ‘No’ के जरिये इसे समझाता है- ना सिर्फ एक शब्द नहीं है, एक पूरा वाक्य है जिसे किसी व्याख्या (Explanation) की जरूरत नहीं है. ‘No’Means No. चाहें वो आपकी गर्लफ्रेंड हो, आपकीपत्नी हो या फिर कोई सेक्स वर्कर हो.

कहानी

फिल्म दिल्ली में रहने वाली तीन आम लड़कियों मीनल अरोड़ा (तापसी पन्नू), फलक अली (कीर्ति कुल्हाड़ी) और एंड्रिया तेरियांग (एंड्रिया तेरियांग) की कहानी है. एक रात इन तीनों की एक रॉक कंसर्ट में तीन लड़कों से झड़प हो जाती है. जहां मीनल एक लड़के (अंगद बेदी) के सिर पर एक बोतल मार देती है. लड़किया इस घटना के बाद घबरा जाती हैं. पुलिस कंप्लेन नहीं चाहती क्योंकि इन्हें कोर्ट के चक्कर में नहीं पड़ना. तीनों लड़कियां भले ही इस घटना को भूल जाती है लेकिन लड़के धमकी देते हैं कि मीनल उनसे माफी मांगे नही तो सबक सीखने को तैयार रहे… सबक सिखाने का क्या मतलब है ये सभी को पता है.

आगे जानें के लिए फिल्म देखना बेहतर होगा ..

ये इतनी कसी हुई फिल्म है कि अगर इसके स्क्रिप्ट राइटर की बात ना करें तो नाइंसाफी होगी. इसके स्क्रिप्ट राइटर रितेश शाह हैं. कुछ दिनों पहले एक इंटरव्यू में शूजित सरकार ने कहा था कि इस फिल्म के लिए लड़कियों को लेना उतना मुश्किल नहीं था, जितना उनके किरदारों के साथ न्याय करना. फिल्म को देखने के बाद लगता है कि वाकई रितेश ने हर कैरेक्टरके साथ पूरा न्याय किया है.

 

 

म्यूजिक

फिल्म का म्यूजिक शांतनु मोइत्रा ने दिया है. गाने और म्यूजिक बैकग्राउंड में चलते हैं और फिल्म के असर को और मजबूत करते हैं.

क्यों देखें-

फिल्म समाज की असली सूरत देखने के लिए देखें. उन कड़वी बातों औऱ सच्चाई के लिए देखें जो समाज यानि आप औऱ हम स्वीकार नहीं करना चाहते. इसे देखने के लिए आपको बहुत ही धैर्य औऱ संवेदनशीलता की जरूरत पड़ेगी क्योंकि कोर्ट रूम में किए गए सवाल और जवाब आपको अंदर तक बेचैन कर देंगे. ये फिल्म उन लोगों के लिए बिल्कुल भी नहीं है जो आइटम सॉन्ग और कॉमेडी के लिए फिल्में देखते हैं. लेकिन फिल्म में जिस मुद्दे को उठाया गया है वो हर शख्स के लिए देखना और समझना बहुत जरूरी है.

तो काफी दिनों से आपने बहुत सारी कॉमेडी फिल्में देख ली हैं अब सुलगतेसवालों वाली ये एक गंभीर फिल्म भी देखिए और दूसरों को भी दिखाइए.

 

टीम ओह इंदौर !

 

वामन हरी पेठे, इंदौर

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com
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