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नहीं रहा “वर्दी वाला गुंडा” : विश्व के सबसे प्रसिद्द उपन्यास के लेखक वेदप्रकाश शर्मा नहीं रहे …

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शर्मा जी नहीं रहे …..वेद प्रकाश शर्मा नहीं रहे
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इस खबर के बाद “उनका जाना हिंदी साहित्य के लिए भारी क्षति है.” जैसी लाइन इस्तेमाल नहीं की जाएगी. वेद प्रकाश शर्मा पल्प लिखने वाले लेखक थे. पल्प मतलब लुगदी कागज पर छपा साहित्य. बचपन में ‘बालहंस’ और गंभीर होने के बाद ‘हंस’ पढ़ने के बीच हम सब चोरी छिपे इन लुग्दियों को पढ़ते रहे. शायद हम सब के साथ ऐसा हुआ हो कि लुग्दी के नशे में डूबे रहने वाले हमारे चाचा, बड़े भाई हमें सलाह देते हों कि तुम ये सब किताबें मत पढ़ा करो. ये किताबें पढोगे तो आवारा हो जाओगे.

 

आपको एक किताब (वर्दी वाला गुंडा) का 8 करोड़ बिकना अतिश्योक्ति लगता हो तो इसका सिर्फ एक प्रतिशत ले लीजिए. 8 लाख, हिंदी साहित्य में आज जितनी भी नई किताबें ज़्यादा बिकने वाली श्रेणीं में आती हों सबकी बिक्री का टोटल इस आंकड़े के उन्नीस ही बैठेगा.

 

आज भी जब उनके जाने की बात हो रही है. तो हवाला दिया जा रहा है कि आमिर खान उनसे मिले थे. आमिर ने उनसे स्क्रिप्ट डिस्कस की थी. आमिर खान की सिनेमाई समझ को सलाम करते हुए मुझे पूछना है सबसे. 173 उपन्यास लिखने वाले का परिचय एक फिल्म स्टार से मिलना क्यों लिखा जाए?

शर्मा जी ने ‘इंटरनेशनल खिलाड़ी’ और ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ जैसी फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी. ये कहना बहुत ही क्लीशेड होगा मगर सच है कि अगर वो इंजीनियरिंग कॉलेज से आकर ये सब करते तो सुपर स्टार होते.

वर्दी वाला गुंडा जैसे चर्चित उपन्यासों के जरिये पाठकों के दिलों पर राज करने वाले प्रख्यात उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा चिरनिद्रा में लीन हो गए हैं। शुक्रवार रात करीब 11:50 बजे अपने शास्त्रीनगर स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली।.

वेद प्रकाश शर्मा का निधन: 'असली बेस्टसेलर' को अलविदा

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लेखक बनने का किस्सा

1972 में हाइस्कूल का पेपर देने के बाद गर्मी की छुट्टियों में उन्हें पैतृक गांव बिहरा भेज दिया गया. वे अपने साथ कोई एक दर्जन उपन्यास ले गए थे. वहां उनका न कोई दोस्त था, न कोई फ्रेंड सर्कल. उन्होंने लिखना शुरू किया और लिखते-लिखते एक कॉपी, दो कॉपी, कई कॉपी भर गईं. मेरठ पहुंचने पर यह बात उनके पिता को मालूम हुई. वे शाम को घर आए और उन पर लट्ठ बजाना शुरू कर दिया. कहा, ‘‘अब तक तो पढ़ै था, अब इसनै लिख दिया. इसनै तो उपन्यास लिख दिया. यह लड़का तो बिगड़ गया.’’

पिटाई के बाद पिता ने बोला, ‘‘क्या लिखा है, तैने? मुझै लाके दे.’’ किशोर वेद प्रकाश ने कॉपियां उन्हें लाकर दे दीं.

पिता ने सुबह कहा, ‘‘बहोत अच्छा लिखा है तैने. यह दिमाग में कहां से आ गई?’’ पिता स्क्रिप्ट लेकर प्रेस में कंपोजिंग सिखाने ले गए. वहां मानो उनकी किस्मत उनका इंतजार कर रही थी. वहां लक्ष्मी प्रेस के मालिक जंग बहादुर बैठे थे. बहादुर ने कुछ पन्ने पढ़े और इसके बाद क्या हुआ ये दुनिया जानती है.

परिवार:

पत्नी : मधु शर्मा,  पुत्र : शगुन शर्मा (बालाजी लाइट्स शोरूम के संचालक), बेटियां : करिश्मा, गरिमा और खुशबू 

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हिंदी उपन्यास के इस दिग्गज फनकार श्री वेद प्रकाश शर्मा को श्रद्धांजलि ….

ईश्वर शर्मा जी की आत्मा को शान्ति दे …

लेख संकलन : समीर शर्मा | इंदौर

About Sameer Sharma

Founder and Editor, www.ohindore.com

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