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कोल्डड्रिंक है या ज़हर , इच्छा आपकी …क्यूंकि लाइफ है आपकी ! एक खुलासा …

समीर शर्मा | इंदौर | इंदौर अलर्ट | इंदौर शहर

 

कोल्डड्रिंक है या ज़हर ?

भारत में तेज़ी से बढ़ता कोल्डड्रिंक व्यापार भारत के युवाओं और लोगों को न सिर्फ तेज़ी से डाईबिटीज़ की और धकेल रहा है अपितु आप सन्न रह जायेंगे कि यह कितने खतरनाक केमिल्कल्स और प्रेज़र्वेटिव्स आपके शरीर में पहुंचा रहा की यदि थोडा भी “केमिकल लोचा ” इम्बेलेंस हुआ तो तत्काल मौत के आगोश में …

बड़ी बात यह है कि बहुत छोटे अक्षरों में ये कंपनीज़ इन वार्निंग्स को लिख भी रही हैं लेकिन कोई भी उसे पढता नहीं ….

एक बार गूगल करें इन चेतावनी में लिखे केमिकल्स के नामों को तो खुद ही पता लगेगा की हम क्या पी रहे है|

 

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चेतावनी नंबर १ :

पेप्सी कोला बनाने में चीनी के स्थान पर Aspertem का प्रयोग किया जाता है जिससे मूत्रनली का कैंसर होता हैं। लगातार पेप्सी- कोला का सेवन करने से हड्डियों में Osteoporosis, Osteopenia नामक बीमारियाँ होती हैं जिसमे हड्डियाँ बहुत कमजोर हो जाती हैं।

 

 

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किसी एक कंपनी का नहीं …चाहे वो पेप्सी हो या कोका कोला , चाहे कोई और ..सभी में …

एक एड जिसने मुझे यह लिखने पर प्रेरित किया मेरे मित्र  द्वारा व्हाट्स एप पर भेजा गया था , फॉरवर्ड मैसेज की पड़ताल किये बिना मैं उसे आगे नहीं करता तो जिज्ञासावश मैंने उसकी सच्चाई जननी चाही और गूगल पर उन केमिकल्स और चेतावनी के मतलब ढूंढें ….इसके बाद मैं तो कोल्ड  ड्रिंक्स अब शायद ही कभी पियूं …..

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यह है वह विज्ञापन …इसमें हाईलाइट की हुई इन चेतावनी / वार्निंग्स को पढ़ें इसका क्लोज अप भी है आगे ..

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क्या लिखा है , हिंदी में बता दें आपको ?

इसमें एडेड फ्लेवर्स डाले हुए हैं , इसमें आर्टिफिशियल मिठास (स्वीटनर्स) डाले हुए हैं |  

कृत्रिम स्वाद व रंग (artificial colors and flavors): 

तरह-तरह के स्वाद और रंग की चाहत वाली ग्राहक-बाज़ार को पूरा करने के लिए भौतिकवादी उपभोक्ता बाज़ार में सॉफ़्ट-ड्रिंक्स कंपनियों ने कृत्रिम (नक़ली) स्वाद और रंग ही भरना शुरू कर दिया. कृत्रिम तो आख़िर कृत्रिम ही होता है! और आप को मैं बता दूं कि कृत्रिम रंग व स्वाद के लिए जो तत्व इस्तेमाल होता है वह कैंसर होने के मुख्य वाहक होते हैं.  

दुनिया के कई देश में कृत्रिम रंग व स्वाद वाले तत्व को प्रतिबंधित कर दिया गया है. जैसे: टारट्रेज़ाइन Tartrazine (पीले अथवा संतरे रंग के लिए) को नार्वे और फिनलैंड में प्रतिबंधित कर दिया गया है, कार्मोज़ाइन Carmoisine (लाल रंग के लिए) को अमेरिका और कनाडा में प्रतिबंधित किया हुआ है, ब्रिलिएंट ब्लू (brilliant blue) को तो लगभग सभी देशों में प्रतिबंधित किया हुआ है, लेकिन हमारे देश में इनका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है क्यूंकि हमें इन ड्रिंक्स की आदत / लत लग चुकी है |

ये साफ़ लिखा है कि इसमें कोई भी फल या उसका पल्प नहीं हैं ( यानि की यह पूर्णत: केमिकल्स से बना है )

 

चेतावनी नंबर २ :

इसमें  मिलाई गई कृत्रिम मिठास २०० गुना मीठी होती है हमारी सामान्य शक्कर से ..आप कब डाईबिटिक हो जायेंगे पता ही नहीं चलेगा …

 क्युकी यह सोडा बेस्ड ड्रिंक्स हैं तो इसमें जो सोडा यानि कार्बोनेटेड वाटर है वह अस्पर्तेम और असेसुल्फेम पोटेशियम से बना हुआ  है | इस केमिकल्स की लिनक्स पर जाईये गूगल से तो पता चले की कौन सा ज़हर हम पैसे देकर पी रहे हैं

 

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असिड : (टूथ डीके हो जाता है ) 

वर्तमान में ज़्यादातर सॉफ़्ट ड्रिंक्स में अम्लीय तत्वों की प्रचुरता रहती है जैसे- फोस्फोरिक एसिड (phosphoric acid) व मैलिक (malic acid) अथवा टारटैरिक अम्ल (tartaric acid) आदि. एक अध्ययन के अनुसार इंसान के दांतों को दो दिन तक कोला ड्रिंक में डाल के रखा गया जिसके परिणामस्वरूप दांत मुलायम हो गए और दांतों के कैल्शियम में गिरावट आ गयी.

 

कार्बन-डाई-ऑक्साइड (CO2): 

सॉफ़्ट-ड्रिंक्स में कार्बन डाईआक्साइड को पानी में अत्यधिक दाब में समाहित करके बनाया जाता है. सोचिये, जिस गैस को हम सांस लेने के बाद गंदी हवा के रूप में शरीर से बाहर निकालते हैं, उसे सॉफ़्ट-ड्रिंक्स में अत्यधिक दाब में प्रेश्राईज़ करके डाला जाता है. तब इसके दुष्परिणाम क्या हो सकते हैं, इसका अंदाजा आप भी लगा सकते हैं.

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सॉफ़्ट-ड्रिंक्स प्रिज़र्वेटिव्ज़ (Preservatives): 

सॉफ़्ट-ड्रिंक्स को ज़्यादा वक़्त के लिए संरक्षित करने के लिए उसमें तरह तरह के संरक्षक मिला दिए जाते हैं जिससे दीर्घ समय तक भण्डारण में उसे रखा जा सके, लेकिन होता ये है कि ऐसा करके सॉफ़्ट-ड्रिंक्स की मूल अवस्थ को विकृत ही किया जाता है. आपको जानकार अत्यधिक आश्चर्य होगा कि भण्डारण में संरक्षित करने के लिए सोडियम बेंजोएट अर्थात बेंज़ोइक एसिड (benzoic acid) और सल्फर डाईआक्साइड (sulphur dioxide) मिलाया जाता है| 

क्या अब भी पीना है ?

– समीर शर्मा | 9755012734 

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समीर शर्मा | इंदौर | इंदौर अलर्ट | इंदौर शहर   कोल्डड्रिंक है या ज़हर ? भारत में तेज़ी से बढ़ता कोल्डड्रिंक व्यापार भारत के युवाओं और लोगों को न सिर्फ तेज़ी से डाईबिटीज़ की और धकेल रहा है अपितु आप सन्न रह जायेंगे कि यह कितने खतरनाक केमिल्कल्स और प्रेज़र्वेटिव्स आपके शरीर में पहुंचा रहा की यदि थोडा भी "केमिकल लोचा " इम्बेलेंस हुआ तो तत्काल मौत के आगोश में ... बड़ी बात यह है कि बहुत छोटे अक्षरों में ये कंपनीज़ इन वार्निंग्स को लिख भी रही हैं लेकिन कोई भी उसे पढता नहीं .... एक बार गूगल करें…

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धन्यवाद | ओहइंदौर.कॉम

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वामन हरी पेठे, इंदौर

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