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Technology Addiction : ये क्या हुआ इंदौर को , सर झुका ही रहता है यहाँ सबका

 

इंदौर हुआ टेक्नोलॉजी एडिक्शन का शिकार ?

साइकोलॉजीकल बीमारी की तरह बढ़ रहा है यह डिस-ऑर्डर 

 

छुट्टी की शाम , राजबाड़ा पर , माँ अहिल्या की प्रतिमा वाले बागीचे में , लगभग २०० लोग …

कुछ दोस्त , कुछ अकेले , कुछ परिवार , कुछ बच्चे , कुछ अनुभवी और आयु वाले लोगों के समूह वहां पर थे …

हम भी वहां पहुंचे और अवाक रह गए , ऐसा नज़ारा कभी सोचा नहीं था और पहली बार देख रहे थे ….उसमे से ९५ % लोग मोबाइल यूज़ करने में बिजी थे……हमारे मित्रों के पास कैमरा भी था और फिर ये स्टोरी बनी …

सर झुका हुआ है इन्दोरियों का अहिल्या माता के सन्मान में नही ,बल्कि  मोबाइल यूज़ में …

ध्यान से देखिये नीचे लगे फ़ोटोज़ को …परिवार साथ में पर सब अपने -अपने मोबाइल में लगे हुए थे …

हमने बात भी की तो ये ज़वाब थे स्मार्ट इन्दोरियों के  (नाम परिवर्तित किये  गए हैं )

ओह इंदौर :

आप गार्डेन में आये हैं दोस्त के साथ आपस में बात नहीं कर रहे , एक दुसरे के हाल चाल नहीं पूछ रहे , हंसी मज़ाक नहीं कर रहे हैं मोबाइल में ही लगे हुए हैं, क्यों ? आपको लगता नहीं कुच्छ गलत हो रहा है आप को मोबाईल की आदत सी लग गई है ?

अमित :  नहीं भिया , ऐसा नी है , आज छुट्टी है ओर फ्री वाई फाई भी मिल रिया है तो सोचा की व्हाट्स एप चेक कर लूँ दो मिनिट के लिए ओर इत्ते में आप आ गए | पर आपकी बात भोत सही है | अब क्या करे , लगता तो है की आदत हो गई है | लो बंद कर दिया ….वैसे आप कां से हो ..

एक परिवार से बात की :

ओह इंदौर : आप सब मोबाइल में लगे हुए हैं और अम्माजी और भाभी जी अकेली बैठी है ? आपको लगता नहीं परिवार के साथ बात-चीत करें या कुछ खाएं पियें ?

मुमताज भाई :

भाई पहली बात तो ये की मै बिजनस की बात कर रहा हूँ और ये मोबाईल है ही खराब ( मोबाईल की गलती और उसको गलियां ) साला इसकी वज़ह से झूठ अलग बोलना पड़ता है , जी का जंजाल बन गई है , अब देखो बच्चा भी हमारे घर आते ही मुझसे सिर्फ मोबाईल लेने के लिए आता है और फिर विडिओ गेम में लग जाता है 

यह एक बड़ा अलार्म है स्मार्ट सिटी बन रहे इंदौर के लिए : 

लगभग ५०   % मोबाइल  उपभोगकर्ता यदि अपने मोबाइल  का इस्तमाल कुछ समय के लिए न करे तो उन्हें तनाव, anxiety , और असुरक्षा की भावना होती है । लगभग ४३   % लोग  मीटिंग में , फ्लाइट  पर, धार्मिक स्थलों  , क्लास , हॉस्पिटल इत्यादि  निषिद्ध स्थलों पर मोबाइल पर बात करने  की पावंदी से तनाव ग्रस्त हो जाते हैं ।

वाई फाई ने ख़तम किये रिश्ते और दोस्ती , ऐसा इलज़ाम लगाया टेक्नोलॉजी पर ….क्या ये हमारी गलती नहीं देखिये इन तस्वीरों में …

ये जो अकेले आये , अब अकेले ही लगे हुए हैं मोबाइल में ….

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जो साथ आये , वो भी अलग – अलग लगे हुए हैं  मोबाइल में ….बगीचे में बैठे हुए बच्चे भी १ मोबाइल और सब उसमें विडिओ देख रहे थे ……

3

ठंडी हवा , शब ए मालवा की किसे परवाह और ज़रुरत व्हाट्स एप ज्यादा इम्पोर्टेंट है भैया …..

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मुफ्त का वाई- फाई और मोबाइल 

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दोस्ती के बीच मोबाईल आ गया …

6

 

कुछ एंजाईटीज और डिसऑर्डर्स :

Ring Anxiety  – लगभग 3 0 % मोबाइल  उपभोगकर्ता को 3 0  मिनट में कोई भी रिंग नहीं आती है तो उन्हें मानसिक तनाव हो जाता है । 

Nomophobia – लगभग 5 0  % मोबाइल  उपभोगकर्ता इस खोफ्फ़  में जीते हैं की कहीं उनका मोबाइल चोरी न हो जाए । इसके लिए वे बार बार उस जगह को चेक करते रहते हैं जहां वे अपना मोबाइल  रखते है ।

Stiff Neck – लगातार एक ही हाथ में मोबाइल पकड़ कर अपने गर्दन को एक ही साइड में झुककर मोबाइल का उपयोग करने से गर्दन में दर्द और अकडन  हो सकती है ।

Phantom Ringing – लगभग 3 0 -4 0 % मोबाईल उपभोगता को कभी – कभी लगता है की उनके मोबाइल की रिंग बज रही है, जब की वास्तव में ऐसा होता नही है । इसी चक्कर में वे बार बार अपना मोबाइल चेक करते है ।

Social Site Addiction  – स्मार्टफ़ोन पर इन्टरनेट सर्फिंग , फेसबुक, ट्विटर , चैटिंग, लाइव टी वी , ओन डिमांड क्लिप्स और जीवीआर पर प्रोग्राम सेव  करने की सुविधा के चलते  मोबाइल  एडिक्शन होना आम बात है |  सोशल साइट्स स्टेटस हमेशा अपडेट करने की फ़िक्र करना , दूसरों के कमेंट्स को लाइक /  डिस -लाइक करने या उनका रिप्लाई करने की टेंशन करना और  वर्चुअल रिलेशनशिप बनाने से मानसिक तनाव, डिप्रेशन , अनिद्रा , टूट टूट कर नींद आना आम बात हो गई है  |

 टीवी के पश्चात फेसबुक पारिवारिक कलह का माध्यम बनता जा रहा है । लगभग 2 0  %  परिवार इससे प्रतिकूल रूपसे प्रभावित हैं । जबकि 3 0  %  अभिभावक और बच्चों के बीच  स्मार्टफोन  कलह और अलगाव का कारण  बन रहा है । 

 

 Blackberry Thumb –   wiiitis, nintendinitis, playstation thumb या  cellphone thumb आदि नामों से जाने वाला यह रोग अंगूठे  में बंकि की चार उँगलियों के मुकाबले dexterity [निपुणता ] की कमी के कारण  होता है ।   इसमें PDAs, smartphones, और अन्य मोबाइल devices  में  अंगूठे द्वारा बार –  बार बटन प्रेस करने से उसके nerves  में स्ट्रेन आ जाता है , अंगूठे के साथ साथ कलाई पर भी थ्रोब्बिंग पेन  नज़र आ सकता है । 

 

Cellphone Elbow – लगातार एक ही हाथ में मोबाइल  रख कर बातें करने से ulnar nerve  में  खिचाव आने से एल्बो पेन हो सकता है । 

 

ड्राइविंग करते समय मोबाईल का प्रयोग –   ड्राइविंग के समय मोबाईल का प्रयोग करना अल्कोहल के नशे  में गाडी चलाने से अधिक घातक सिद्ध  हो सकता है ।

 

 चहरे पर दुष्प्रभाव – चहरे की त्वचा लटक जाती है , डबल चिन  की समस्या उत्पन्न हो जाती है , चहरे पर “marionette lines”  [  लाफ लाइन्स]    विज़िबल हो सकती है जिससे चेहरा उम्रदराज़ लग सकता है ।  मोबाइल  फ़ोन से होने वाले  अनवरत टेंशन और anxiety से चहरे की त्वचा की चमक खो जाती है और  उसका स्वाभाविक लचीलापन खत्म  हो जाता है ।

 

अन्य रोग –  स्मार्ट फ़ोन के अधिक इस्तमाल से सरदर्द , blurred vision, गर्दन में दर्द, आँखों का लाल होना ,  थकावट , ड्राई  eyes , वर्टिगो/ dizziness  , polyopia [एक से अधिक दिखाई  देना ] , तनाव और अनिद्रा जैसी व्याधियां होने की संभावना अधिक रहती है । मोबाइल  की लगभग 20% कॉल्स मार्केटिंग कॉल्स होती हैं जिनसे उपभोगकर्ता में खिन्नता और  गुस्सा उत्पन्न होता है । 

इन सबसे ज्यादा खतरनाक “

नैतिक पतन  – मोबाइल ब्लैकमेलिंग का सुलभ साधन बन गया है।अश्लील तस्वीरें और संदेश के प्रसारण में मोबाइल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मोबाइल के द्वारा टीनएजर्स अपराध के नये-नये गुर सीख रहे हैं। 2 2  % मोबाईल फ़ोन धारक जो मोबाइल फ़ोन को  अपना  स्टेटस सिम्बल समझते हैं , वे  लेटेस्ट फ़ोन मॉडल्स और कीमती मॉडल्स खरीदने के लिए हमेशा बेताब रहते हैं । मोबाइल झूठ बोलने वालों और गप्पे मारने वालों  के लिए तो वरदान साबित हो रहा है । निम्न मध्यम वर्ग पर मोबाइल का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ रहा है। पेट में रोटी न रहे चलेगा, जेब में मोबाइल जरूरी है। टॉपअप जरूरी है। रिचार्ज कूपन जरूरी है। स्कूल-कॉलेज पढ़ने वालों के पास लंच बॉक्स न रहे चलेगा, मोबाइल जरूरी है। 

ये पूरा परिवार लगा हुया है ….

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मोबाइल …मोबाईल …मोबाइल …सिर्फ मोबाईल 

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टेक्नोलॉजी एडिक्शन ….

9 

 

 मोबाईल फ़ोन एडिक्शन रोकने के लिए के कुछ सुझाव :

  1. जरुरत न होने पर प्रति दिन 2  घन्टे  से अधिक मोबाईल पर बातें न करें ।
  2. दिन में एक ही बार मोबाइल चार्ज करें , यदि दुबारा डिस्चार्ज हो जाता है और इमरजेंसी नहीं है तो अगले दिन उसे चार्ज करने की प्रतीक्षा करें ।
  3. स्मार्ट फ़ोन के उपयोग में अंगूठे की जगह अन्य  उँगलियों का भी प्रयोग करें ।
  4. ड्राइविंग करते समय मोबाईल का इस्तमाल न करें यदि इमरजेंसी भी हो तो गाडी साइड में खड़ी करके बातें करें ।
  5. अनावश्यक सेल / मार्केटिंग की कॉल्स, स्पैम टेक्स्ट्स, जंक मेल को मोबाइल में ब्लॉक करके रखे ।
  6. जिन्हें मोबाइल  का प्रयोग प्रोफेशनल डिमांड अनुसार  अधिक करना पड़ता है वे मोबाइल का सीधा उपयोग करने के स्थान पर हैडफ़ोन तथा माइक्रोफ़ोन का उपयोग करें |
  7. सोने से आधे घन्टे पहले  इलेक्ट्रॉनिक कर्फ्यू रखे यानी कोई भी इलेक्ट्रॉनिक का सामान इस्तमाल न करें ।
  8. सोशल मीडिया एडिक्शन से बचने के लिए 3  महीनों में एक  बाद एक हफ्ते के लिए इन फेसबुक, ट्विटर आदि नेटवर्किंग साईट से दुरी बना कर रखे । सात दिन में एक दिन मोबाइल का न्यूनतम  प्रयोग करें ।
  9.  हैण्ड फ्री सेट का प्रयोग करें |

 

इंदौर एक ऐतिहासिक शहर है , इसकी एक संस्कृति रही है , इसे बचाएं , सुधरे , सतर्क रहें और हाँ वाकई में स्मार्ट बने …

 

समीर शर्मा | OHINDORE@GMAIL.COM

  इंदौर हुआ टेक्नोलॉजी एडिक्शन का शिकार ? साइकोलॉजीकल बीमारी की तरह बढ़ रहा है यह डिस-ऑर्डर    छुट्टी की शाम , राजबाड़ा पर , माँ अहिल्या की प्रतिमा वाले बागीचे में , लगभग २०० लोग ... कुछ दोस्त , कुछ अकेले , कुछ परिवार , कुछ बच्चे , कुछ अनुभवी और आयु वाले लोगों के समूह वहां पर थे ... हम भी वहां पहुंचे और अवाक रह गए , ऐसा नज़ारा कभी सोचा नहीं था और पहली बार देख रहे थे ....उसमे से ९५ % लोग मोबाइल यूज़ करने में बिजी थे......हमारे मित्रों के पास कैमरा भी था और…

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वामन हरी पेठे, इंदौर

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Founder and Editor, www.ohindore.com
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