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इंदौर के सोलर एक्सपर्ट्स संभालेंगे वर्ल्ड सोलर कुकर इंटरनेशनल कांफ्रेंस , बड़ोदा में १६-१८ जनवरी

समीर शर्मा | इंदौर | सोलर

6th सोलर कुकर इंटरनेशनल(एससीआई)

वर्ल्ड कांफ्रेंस, बड़ोदा, गुजरात 16-18 जनवरी 2017

Muni Seva Ashram Goraj, Vadodara, Gujarat, India

लकड़ी की मदद से खाना पकाने वाली किसी महिला के बारे में सोचिए जो चूल्हे से उठने वाले धुएं के बीच काम करते हुए प्रति घंटे इतना धूंआ सांस में लेती है जितना कि 400 सिगरेट पीने वाले किसी व्यक्ति के फेफड़ों तक पहुंचता है। अब इस एक भोजन को उन लाखों परिवारों से गुणा करें जिनका खाना लकड़ी से ही पकता है। बस इसी बिंदु से सोलर एनर्जी से खाना पकाने की महत्ता समझी जा सकती है कि यह किस कदर हमारे जीवन में बदलाव लाने में सक्षम है…

इसे लेकर ग्रामीण महिलाओं के बीच लंबे समय से काम कर रहीं प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर जनक पलटा मगिलिगन कहती हैं कि ऐसे धुएं में महिलाएं काम करने पर मजबूर हों तो यह महिलाओं के प्रति हिंसा ही है। वे बताती हैं कि मध्यप्रदेश में 500 से ज्यादा सोलर कुकर काम कर रहे हैं जिन पर महिलाएं बआसानी काम कर रही हैं जिन्हें इस क्षेत्र की अग्रणी माना जाना चाहिए क्योंकि यह प्रयास गुणात्मक सुधार ला रहा है।

कब है कांफ्रेंस :

बड़ोदा , गुजरात में 16 से 18 जनवरी तक होने जा रहे सोलर कुकर्स इंटरनेशनल में तंजानिया से आई ग्रामीण, नेपाल के सुदूर गांव की महिला, फ्रांस में स्थित किसी रेस्टोरेंट के संचालक, चियापा की चीज डेरी के कर्ताधर्ता, बांग्लादेश के फिश फार्मर, इथियोपिया के रिफ्यूजी कैंप में काम कर रहे जापानी संस्थान के प्रतिनिधि मुफ्त मिलने वाली रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर अपने अनुभव और दक्षता साझा करेंगे और इस कांफ्रेंस की सचिव  हैं, हमारी शहर इंदौर की नागरिक पद्मश्री श्रीमती जनक मगिलिगन  …

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क्या होगा कांफ्रेंस में :

 इस स्थिति, इसे लेकर हो रहे प्रयोगों और प्रकृति व इंसानों के हालात बेहतर करने के उद्देश्य से गुजरात के मुनि सेवा आश्रम में दुनियाभर से सोलर एनर्जी के एक्सपर्ट जुटेंगे। इनमें 25 देशों के वैज्ञानिक,इस इंडस्ट्री से जुड़े जानकार,पॉलिसी मेकर्स, शिक्षण से जुड़े महारथी औरफील्ड प्रोजेक्ट मैनेजर भाग लेंगे। 19 देशों से सोलर कुकिंग में अपने नए आविष्कारों को लेकर 40 प्रेजेंटर आएंगे। कांफ्रेंस में रिफ्यूजी कैंप में सोलर प्रोजेक्ट्स, सोलर कुकर से खाने को सुखाने व प्रोसेस करने, माइक्रो फाइनेंस, इंडस्ट्रियल फूड प्रोसेसिंग, मार्केटिंग, सोलर थर्मल ऊर्जा को बढ़ावा देने व सस्टेनेबल फील्ड प्रोजेक्ट्स जैसे विषयों पर बात होगी।

कैसे बढ़ रहा है सोलर ऊर्जा का उपयोग :

जूली ग्रीन, बताती हैं कि केन्या से लेकर नेपाल तक में 1990 से लेकर अब तक हजारों रिफ्यूजी कैंप में सोलर ऊर्जा से खाना पकाया जाता है और जो इसका उपयोग करते हैं वे कहते हैं कि यह ऊर्जा हमारे लिए बेहद अहम है। वहीं बाकी जगहों पर भी जहां महिलाएं सोलर एनर्जी इस्तेमाल करती हैं वे परिवार की आय बढ़ाने में भी इस ऊर्जा को मददगार मानती हैं। केन्या में रहने वाली एलिजाबेथ का ही उदाहरण लें जो अपने दो बच्चों और अपंग पति के लिए खेतों में काम करती हैं। एलिजाबेथ अपने साथ सोलर कुकर खेत पर ले जाती हैं और दोपहर तक उनका खाना मुफ्त सोलर ऊर्जा से पक चुका होता है।

इसी तरह मध्यप्रदेश के सेमलीपुरा की आदिवासी महिला कोमल डावर और उनके पति अपने सोलर टी स्टाल से 5000 रुपया महीना से ज्यादा आसानी से कमा लेते हैं जबकि उन्हें ऊर्जा पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना होता है। नेपाल की विधवा महिला माया भी काठमांडू से कुछ दूरी पर अपने सोर कुकर के जरिए हो रही कमाई से अपने दो बच्चों ही नहीं अपने सास ससुर को भी पा रही हैं। केन्या में तो एक गांव में कार्डबोर्ड, फॉइल और गोंद की मदद से एक दर्जन सोलर कुकर बनाने की शुरुआत हुई, जिनकी सफलता के बाद लगभग 800 घरों तक सोलर कुकर का दायरा बढ़ा। इसे देखकर पड़ोस के गांव वालों ने भी सोलर कुकिंग के गुर सीखने समझने की मांग की। निकारागुआ के ग्रामीण क्षेत्रों में तो महिलाएं सोलर एनर्जी को लेकर इतनी जागरुक हैं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर के एक्सचेंज कार्यक्रमों में वे बेहतररीन तरीके से सोलर कुकिंग के बारे में समझाने पहुंचती हैं।

अमेरिका के एंडियान क्षेत्र में अठारह हजार सोलर कुकर बांटे गए ताकि खाना पकाने में होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके। तंजानिया में जहां कईयों की आमदनी 2 डॉलर से भी कम है वहां हुए एक सर्वे के अनुसार सोलर कुकर के इस्तेमाल से वहां कोयले  की खपत 45 प्रतिशत, लकड़ी की खपत 41 प्रतिशत केरोसिन की खपत 4 प्रतिशत और एलपीजी की खपत 32 प्रतिशत तक कम हुई है। इस तरह उनके ईंधन पर खर्च में सीधे 36 प्रतिशत की बचत हुई है। इन सोलर एनर्जी इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का कहना है कि उनके घर में धुएं से होने वाली बीमारियों को लेकर भी खासी कमी आई है और वे पानी को भी ज्यादा बार पाश्चुराईज कर पाती हैं। इन महिलाओं का कहना है कि जब ईंधन मुफ्त मिल सकता है तो उसे खरीदने के बजाए उसी पैसे से खाना क्यों न खरीदा जाए।

अजेंडा :

ये ऐसे महज चंद उदाहरण हैं। इन्हीं उदाहरणों को सामने रखकर सोलर कुकर इंटरनेशनल चाहता है कि ये राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे यूनाइटेड नेशंस में उठाए जाएं। द नेशनली डिटर्मिंड कांट्रीब्यूशन्स(एनडीसी) द्वारा पेरिस 2015 सीओपी21 एग्रीमेंट में पेश किए दस्तावेज बताते हैं कि रिन्यूएबल एनर्जी का विकल्प कई देशो में तो लाया जाना समय के हिसाब से सख्त जरुरी हो गया है। यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज की एक्जीक्यूटिव सेक्रेटरी पेट्रिशिया एस्पिनोसा का मानना है कि मौसम में आ रहे बदलाव सीधे लोगों से जुड़े हैं और हमें हर कदम पर लो कॉर्बन सोसायटी के बारे में सोचना चाहिए। हम जो हवा सांसों में ले रहे हैं वह हमें, हमारे बुजुर्गा और बच्चों  को किस कदर प्रभावित कर रही है।

एससीआई की इस कांफ्रेंस के लिए भारत को चुना जाना इसलिए भी मसाने रखता है क्योंकि भारत बहुत तेजी से इस मामले मे आगे बढ़ रहा है। सरकार ने 30000 करोड़ की एक सोजना सामने रखी है जिससे करीब पांच लाख ग्रामीण स्कूलों में बनने वाले बच्चों के मध्यान्ह भोजन को सोलर एनर्जी से पकाया जाना प्रस्तावित है।

 

जाहिर है इससे प्रदूषण रोकने में मदद मिलने के साथ बच्चों को पौष्टिक खाना मिलने में मदद होगी। इस कांफ्रेंस को कराने वाली कमेटी के सभी सदस्य रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र के पुरोधा हैं। कांफ्रेंस के को चेयरमैन दीपक गढ़िया का कहना है कि इस कांफ्रेंस से 133 देशों के हमारे ग्लोबल पार्टनर्स को अपने आविष्कार, अपनी दक्षता आैर संभावनाओं को सामने रखने का मौका मिल सकेगा।

वड़ोदरा के करीब गोरज के मुनि सेवा आश्रम में यह कांफ्रेंस रखी गई है और यह जगह भी अपने आप में रिन्यूएबल एनर्जी की किसी बेहतरीन क्लास से कम नहीं है। यहां 600 बच्चों का खाना बनाने, पानी गरम करने, सोलर एयर कंडीशनिंग, बायोगैस और बायोमास जैसी सुविधाओं के साथ ही अस्पताल, किचन और गेस्टहाउस तक संचालित होते हैं। डॉक्टर जनक पलटा मगिलिगन जो इस कांफ्रेंस की सचिव हैं पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित हो चुकी हैं। उनके रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में सोलर कुकर, बायोगैस जैसे प्रयासों के अलावा ऑर्गेनिक फार्मिंग को लेकर कए गए प्रयास भी कमाल के हैं।

जिमी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के कॉन्सेप्ट  पर उनका कहना है कि प्रकृति के संसाधनों का सही तरीके से उपयोग ही स्मार्ट सिटी या स्मार्ट गांव की सही अवधारणा हो सकती है। सोलर कुकिंग मूवमेंट ऐसा प्रयास है जो भारत को स्मार्ट और समृद्ध भारत में भी बदल देगा।

 

कांफ्रेंस की कमेटी में जो अन्य सदस्य हैं उनमें PRINCE के डॉक्टर अजय चांडक हैं जो भारत के नए सोलर कुकर मॉडल बनाने वालों के साथ ही इनोवेटिव रिसर्चर हैं। रिन्यूएबल एनर्जी संबंधी पॉलिसी अध्येता हैं।

तापी फूड प्रोडक्ट्स के फाउंडर व सीईओ घनश्याम लुखी व श्री चांडक उन बिजनेस लीडर्स के सेशन संचालित करेंगे जो फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं या करना चाहते हैं। इस कांफ्रेंस में दिल्ली की पर्यावरणविद डॉक्टर वंदना शिवा, ग्लोबल नेटवर्क अहमदाबाद के जगत शाह, ऊर्जा वैज्ञानिक व पर्यावरणविद आरएल साहनी के अलावा सोलर कुकर इंटरनेशनल की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर जूली ग्रीन भी तथ्य रखेंगी।

आप भी भाग ले सकते हैं , रजिस्ट्रेशन ऐसे होगा :

इस कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की अंतिम तिथि 8 जनवरी 2017 है। इस कांफ्रेंस को कराने वाली एससीआई संस्था पिछले तीस सालों से विश्व भर में क्लीन कुकिंग, पर्यावरण संबंधी जागरुकता के लिए काम करते हुए उन क्षेत्रों पर खास ध्यान दे रही है जहां गरीबों के बीच समुचित ईंधन संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। सोलर कुकर इंटरनेशनल व ग्लोबल कुकिंग मूवमेंट के बारे में और अधिक जानकारी के लिए www.solarcookers.org पर भी जानकारी ली जा सकती है।

रजिस्ट्रेशन लिंक  Conference registration button

 

 

 

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समीर शर्मा | इंदौर | सोलर 6th सोलर कुकर इंटरनेशनल(एससीआई) वर्ल्ड कांफ्रेंस, बड़ोदा, गुजरात 16-18 जनवरी 2017 Muni Seva Ashram Goraj, Vadodara, Gujarat, India लकड़ी की मदद से खाना पकाने वाली किसी महिला के बारे में सोचिए जो चूल्हे से उठने वाले धुएं के बीच काम करते हुए प्रति घंटे इतना धूंआ सांस में लेती है जितना कि 400 सिगरेट पीने वाले किसी व्यक्ति के फेफड़ों तक पहुंचता है। अब इस एक भोजन को उन लाखों परिवारों से गुणा करें जिनका खाना लकड़ी से ही पकता है। बस इसी बिंदु से सोलर एनर्जी से खाना पकाने की महत्ता समझी जा सकती है कि यह…

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वामन हरी पेठे, इंदौर

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