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इंदौर बनेगा बच्चों की हत्या में नंबर 1 ? सूरत हादसा और इंदौर ….

इंदौर बनेगा बच्चों की हत्या में नंबर 1 ? सूरत हादसा और इंदौर ….

बच्चों की सामूहिक हत्या , प्रशासन, पोलिस और पैसों के भूखे कोचिंग संस्थानों का सिंडिकेट

मेरे शहर को आदत लग गई है नंबर 1 होने की।

सफाई में, वोटिंग में और अब सामूहिक हत्या की बारी है, जी हां ठीक पढ़ रहे हैं आप…

इंदौर शहर एजुकेशन हब बन गया है और जैसा कि सूरत में बड़ा हादसा कोचिंग संस्थानों में हुआ है अब इंदौर इसमे बाज़ी मारेगा।

पालक इसके सबसे बड़े जिम्मेदार हैं, इंदौर में लगभग 400 से ज्यादा कोचिंग संस्थान हैं जिनमे 50 से 10000 तक बच्चे प्रति संस्थान में पढ़ रहे हैं। कुल मिलाकर 2 लाख बच्चे इंदौर में।कोचिंग लेते हैं।

क्या इन बिल्डिंगों और संस्थानों के सुरक्षा ऑडिट्स हुए हैं??

नहीं !! हमारे नगर निगमों में कागजी तौर पर तो इसकी व्यवस्था या कहें आवश्यक अनुमति का प्रावधान है परंतु क्या सच में इंदौर के स्कूल्स, कॉलेज और कोचिंग संस्थान इसके लिए तैयार हैं ।

आपको एक जोरदार वाकया बताता हूँ, शाम होने को है और कंचनबाग , गीता भवन , पलासिया और विजय नगर में कोचिंग संस्थानों के बाहर का नज़ारा देखिये अंधाधुंध उल्टे ट्रैफीक में आते हज़ारों बच्चे, बेतरतीबी से खड़े रिक्शा, मैजिक और कारों की लाइन, उसपर सायकल, दोपहिया वाहनों से आते बच्चे वो भी दोनों साइड, साथ ही डिवाइडर फाँदते हुए।

ट्रैफिक और फायर सेफ्टी ये दो ऐसे विषय हैं जो इंदौर को एक बेढंगे और नो ट्रैफिक सेंस वाला शहर बनाते हैं ।

कोचिंग संस्थानों से बातचीत करने पर वे उनके कैम्पस के बाद कि जवाबदारी नही उठाने की बात कहकर कंधे उचका देते हैं , उनके मालिकों तक पहुंचना रिसेप्शन की मोटी दीवार को भेदकर लगभग असंभव है और बाकी उनके पास मोटा पैसा है जो सब मैनेज कर लेता है।

खैर मातापिता तो सिर्फ फीस भरने के काम के हैं, इस पीढ़ी के मातापिता इतने निरीह है जिन्हें न तो टेक्नोलॉजी समझ मे आई न बच्चे न नैतिक मूल्य न बच्चों का भविष्य …तकनीक , फोन्स और इंटरनेट का सहारा लेकर बच्चों ने उन्हें ये कब से समझ दिया की आपको तो कुछ आता ही नही और इन्होंने मान भी लिया है।

ये लोग कभी एडमिशन के समय यह ना यह देखते हैं कि कोचिंग वाला कितना जिम्मेवारी वाला है यानी उसे आपके बच्चे की सुरक्षा की कितनी फिक्र है।

वह सिर्फ अपना टीशर्ट और ब्रांडेड बैग ही मेंडेटरी करता है। बच्चों के लाइसेंस, उनकी फायर सेफ्टी उन्हें ट्रैफिक नियमो पर चलना, केम्पस के बाहर की व्यवस्था और सड़क पर उनकी वजह से जाम न हो इसका कोई भी कार्य ये लोग नही कर रहें ।

इन्हें एडमिशन के साथ इन शर्तों को पूरा कर लेना चाहिए। बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाले बच्चों को दोपहिया की अनुमति न हो वे तीन या चार न बैठें आदि आदि।

अब नगर निगम, पोलिस और प्रशासन को चाहिए कि वे एक थर्ड पार्टी ऑडिट, सर्टिफिकेट शुरू करें और क्वार्टरली इनका ऑडिट हो जिसमें फाइन, फीडबैक और इसके रिपोर्टिंग तक का प्रावधान हो इसी पर इनकी रेटिंग हो तभी शायद बच्चों के बारे में हम सोच पाएं ।

आपको जानकर खुशी होगी कि दूसरे देशों में जहां बच्चों को बहुमूल्य रिसोर्स माना जाता है वहां यह सभी सुरक्षा पालन नियमों और व्यापक ऑडिटिंग के बिना आप व्यवसाय ही शुरू नही लार सकते और ना ही अभिभावक किसी जगह बच्चों को भेज सकते हैं । बड़ी पेनल्टी का प्रावधान है।

खैर वापस विषय पर, इंदौर इस असावधानियों के बारूदी ढेर पर है। अगला हादसा इंदौर में हो सकता है । कुछ करें …अभिभावक तो कम से कम सवाल करें, एक्टिविस्ट पिटीशन लगाएं और प्रशासन पॉलिसी बनाकर इम्प्लीमेंटेशन करवा दे। नही तो फिर हादसा , कैंडल मार्च, बहुत से सम्पादकीय, और डीपी भी बदलना पड़ेगा। बस बच्चे मार जाएंगे बहुत सारे।

कुछ खास खतरनाक जगह – गीता भवन, हाईकोर्ट के पास साउथ तुकोगंज, पलासिया, विजयनगर, सुदामानगर, भवरकुआँ

समीर शर्मा। 9755012734

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